Jharkhand Chunav 2024: झारखंड में महिला वोटरों के पास क्यों है सत्ता की चाबी?

Jharkhand Election 2024: झारखंड विधानसभा का चुनाव दो चरणों में 13 और 20 नवंबर को होने जा रहा है और 23 नवंबर को नतीजे आएंगे। लेकिन, एक बात तय है कि अगली सरकार बनाने में महिला मतदाताओं का बहुत बड़ा रोल रहने वाला है। उनका झुकाव जिस भी दल या गठबंधन के की ओर होगा, उसी की सरकार बनने की संभावना है।

देश में पिछले कुछ वर्ष से कई राज्यों में जितने भी चुनाव हुए हैं, उसमें एक बहुत बड़ा ट्रेंड दिखाई पड़ रहा है कि महिला मतदाता बहुत ही समर्पित वोटर बन चुकी हैं। वह जिस भी पार्टी को समर्थन देना तय कर लेती हैं, वह आसानी से अपना इरादा नहीं बदलतीं। यही वजह है कि अन्य राज्यों की तरह ही झारखंड में सत्ताधारी और विपक्षी दोनों ही गठबंधनों ने महिला मतदाताओं को लक्ष्य बनाकर कई सारे लोक-लुभावन वादे किए हैं।

jharkhand chunav

पुरुष वोटर रोजगार के लिए करते हैं पलायन, महिला वोटरों के हाथों में चाबी
महिला वोटर अब लगभग हर चुनावों में एक बहुत बड़ा वोट बैंक बनकर उभरने लगी हैं। लेकिन, झारखंड का मामला तो और भी खास है। झारखंड की मतदाता सूची के मुताबिक राज्य में कुल 2.59 करोड़ वोटर हैं। इनमें 1.31 करोड़ पुरुष और 1.28 करोड़ महिला वोटर हैं। लेकिन, एक तथ्य तो ये है कि 81 विधानसभा क्षेत्रों में से 32 में महिला वोटरों की संख्या पुरुषों से ज्यादा है।

दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण तथ्य ये है कि पिछले लोकसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि कुल मतदाताओं में पुरुषों की तादाद जरूर ज्यादा है, लेकिन वह रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में चले जाते हैं, इसकी वजह से जब मतदान की बारी आती है तो वह पुरुष मतदाताओं से आगे निकल जाती हैं।

81 विधानसभा सीटों में से 68 पर महिलाओं ने ज्यादा किया मतदान
इस साल लोकसभा के चुनाव में झारखंड की 14 सीटों पर कुल 1.7 करोड़ वोटरों ने मतदान में हिस्सा लिया। इनमें महिला मतदाताओं की संख्या 87.11 लाख रही, जबकि वोट डालने वाले पुरुष वोटरों की तादाद उनसे कम 83.85 लाख ही रही।

इस चुनाव के बाद झारखंड मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रविकुमार ने बताया, 'अगर हम विधानसभा चुनाव क्षेत्रों के हिसाब से आंकड़े देखें तो महिला मतदाताओं ने 68 सीटों पर पुरुषों को पीछे छोड़ दिया और सिर्फ 13 विधानसभा सीटों पर ही ज्यादा पुरुष मतदाताओं ने मतदान में भाग लिया।'

झारखंड की सभी सुरक्षित सीटों पर महिला वोटरों की संख्या ज्यादा
एक और दिलचस्प तथ्य ये है कि झारखंड की जिन 32 विधानसभा सीटों पर महिला वोटरों की तादाद पुरुष मतदाताओं से अधिक है, उनमें से 26 अनुसूचित जनजातियों (ST) और 2 सीटें अनुसूचित जातियों (SC) के लिए सुरक्षित हैं। राज्य में अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लिए कुल 28 सीटें रिजर्व रखी गई हैं। मतलब, 4 सामान्य वर्ग की सीटों पर ही महिला वोटर पुरुषों से अधिक हैं।

जेएमएम गठबंधन का 'मैया सम्मान योजना' पर दांव
झारखंड में महिला वोटरों की अहमियत को देखते हुए ही हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा की गठबंधन सरकार ने अगस्त से 'मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना' (MMSY) लागू किया है। इसके तहत 18 से 50 साल तक की महिलाओं को 1,000 रुपए महीने की सहायता दी जाने लगी है।

इस योजना का लाभ 48.15 लाख महिलाओं ने लेना शुरू भी कर दिया है। 50 साल से अधिक की महिलाओं को पहले से ही यूनिवर्सल पेंशन योजना के तहत 1,000 रुपए महीने दिए जाने का प्रावधान है।

लोकसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद हेमंत सरकार ने लागू की स्कीम
दरअसल, लोकसभा चुनावों में बीजेपी की अगुवाई वाले गठबंधन ने झारखंड की 14 में से 9 सीटें जीत लीं। जबकि, सत्ताधारी जेएमएम गठबंधन सिर्फ 5 सीटों पर ही अटक गया। अगर विधानसभा सीटों के हिसाब से देखें तो इसमें भी विपक्षी भाजपा गठबंधन को आसान बढ़त मिल गई। इसी के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने 'मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना' लागू करके महिला वोट बैंक के लिए बहुत बड़ा दांव चलने की कोशिश की है।

बीजेपी ने चला 'गोगो दीदी योजना' वाला दांव
जेएमएम सरकार के जवाब में बीजेपी ने भी अपनी सरकार बनने पर 'गोगो दीदी योजना' के तहत महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपए देने का वादा किया है। गोगो एक संथाली शब्द है, जिसका अर्थ मां है और दीदी का मतलब बहन से है।

जब जेएमएम ने बीजेपी का वादा देखा तो उसने 'मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना' की राशि 14 अक्टूबर को बढ़ाकर 2,500 रुपए महीना करने का एलान कर दिया। हालांकि, इसपर दिसंबर से अमल किए जाने की बात कही गई है।

महिलाओं को पैसे देने का वादा बन चुका है चुनाव जीतने का फंडा
महिलाओं के खाते में निश्चित रकम डालने के चुनावी वादे ने विभिन्न राजनीतिक दलों को कई राज्यों में सरकारें बनवाने में मदद की है। झारखंड से पहले महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने भी 'मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना' शुरू की है, जिसके तहत लड़कियों और महिलाओं के खाते में हर महीने 1,500 रुपए डाले जा रहे हैं।

इससे पहले मध्य प्रदेश और हरियाणा में बीजेपी को, कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को और पंजाब में आम आदमी पार्टी को महिलाओं के खाते में हर महीने निश्चित रकम डालने के चुनावी वादों से जबर्दस्त फायदा मिल चुका है और उनकी सरकारें बन चुकी हैं।

वैसे यह 23 नवंबर को ही मालूम पड़ेगा कि झारखंड की महिला वोटरों को 'मैया सम्मान योजना' पसंद आ रहा है या फिर वह 'गोगो दीदी योजना' को अपना विकल्प बनाना चाहती हैं।

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