Jharkhand Election: झारखंड की आदिवासी और ग्रामीण जनता किसके साथ? गढ़वा सीट से ग्राउंड रिपोर्ट
Jharkhand Assembly Election 2024: झारखंड में अब जल्दी विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होने जा रही है। मुख्य लड़ाई बीजेपी और झामुमो के बीच मानी जा रही है। ऐसे में चुनाव प्रचार तेज हो चुका है। रैलियों और वादों का दौर जारी है। इस बीच वनइंडिया की टीम झारखंड के गढ़वा जिला पहुंची, जहां वोटर्स से सीधी बात करते हुए जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की।
झारखंड में चुनावी मौसम परवान पर है। यहां दो चरणों में वोटिंग होगी। ऐसे में झारखंड की जनता इस बार हेमंत सोरेन (Hemant Soren) सरकार की सत्ता में वापसी करवाएगी या सत्ता परिवर्तन होगा। यही जानने वनइंडिया हिंदी की टीम झारखंड में है। ऐसे में गाउंड रिपोर्ट के तहत गढ़वा जिले के लोगों का क्या कहना है? चलिए जानते हैं...

गढ़वा की विधानसभा सीटों के लिए प्रथम चरण में मतदान 13 नवंबर को होगा और मतगणना की तिथि 23 नवंबर निर्धारित की गई है। गढ़वा में 20 और भवनाथपुर में 17 उम्मीदवार चुनाव मैदान में होंगे।
आदिवासी और ग्रामीण जनता का दर्द
झारखंड के गढ़वा जिले में राजनीतिक वादों के बीच एक गांव में विकास की चाहत साफ दिखाई देती है। मुख्य रूप से आदिवासी समुदाय प्रगति और उपेक्षा के बीच खड़ा है। चुनाव नजदीक आते ही ग्रामीण उम्मीदें और निराशा व्यक्त करते हैं। कुछ सड़कों के निर्माण और सुविधाओं के बावजूद, व्यापक विकास की मांग बदस्तूर जारी है।
जीवन के अनुभव और अधूरी जरूरतें
इस बीच वनइंडिया के कैमरे पर स्थानीय लोगों ने अधूरे बुनियादी ढांचे के वादों की कहानियां साझा कीं, घरों के पास सड़कों की गैरमौजूदगी और इसके परिणामस्वरूप होने वाली चुनौतियों के बारे में अपना दर्द साझा किया। हमारे संवाददाता शिवेंद्र गौड़ के साथ ग्रामीणों की बातचीत में उनके जीवन के अनुभव और अधूरी जरूरतें निकलकर सामने आईं। सड़क, साफ पानी और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं यहां मुख्य बिंदु हैं, जो सरकारी वादों और वास्तविकता के बीच के अंतर को दर्शाती हैं।
इतना ही नहीं अपने जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए ठोस सुधार चाहते हैं, जो छिटपुट विकास परियोजनाओं और प्रगति में बाधा डालने वाली नौकरशाही बाधाओं की ओर इशारा करते हैं।












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