झारखंड विधानसभा में पारित बिल को राज्यपाल ने किया वापस, समन्वय समिति को राजभवन में प्रवेश देने से किया इनकार

झारखंड सरकार द्वारा विधानसभा में पारित 1932 के खतियान, आरक्षण और मॉब लिंचिंग के विधयेक को राज्यपाल ने वापस कर दिए हैं। राज भवन ने उसमें कुछ त्रुटि बताई थी, लेकिन हेमंत सरकार इसे संविधान के अनुच्छेद-200 के अनुरूप बता रही है।

इस मामले को लेकर झारखंड समन्वय समिति के सदस्य रविवार को राजभवन पहुंचे। समिति की ओर से 3 सितंबर रविवार को राज्यपाल से समय मांगा था। लेकिन जब समिति के लोग राज भवन पहुंचे तो उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। कहा गया कि उन्हें समय नहीं दिया गया है।

झारखंड विधानसभा में पारित बिल को राज्यपाल ने किया वापस

इसके बाद समिति के लोग नाराज हो गए। राजभवन के मुख्य गेट पर अपना आवेदन रिसीव कराया। प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने आरोप लगाया कि राजभवन किसी खास व्यक्ति या दल के इशारे पर काम कर रहा है। साथ ही कहा कि राज्य समन्वय समिति की तरफ से वक्त मांगा गया था, लेकि राजभवन ने कोई मैसेज अब तक नहीं दिया है।

जबकि समन्वय समिति राज्यपाल से मिल कर राज्य से जुड़े तीन विधेयक को लेकर अपनी बात रखना चाहता था। प्रतिनिधि मंडल में राजेश ठाकुर, विनोद पांडे, बंधु तिर्की, योगेंद्र महतो, फागू बेसरा शामिल रहे।

संवाद सूत्र: अभिषेक कुमार, झारखंड

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