Jharkhand Chunav: कांग्रेस की सभाओं में क्यों नहीं जुट रही भीड़? JMM-RJD ने भी पीट लिया माथा!

Jharkhand Chunav 2024: झारखंड विधानसभा चुनावों में आधी से ज्यादा सीटों के लिए मतदान हो चुका है। अबतक पूरे प्रचार अभियान में कांग्रेस पार्टी की जो रणनीति रही है, उससे पार्टी के नेता-कार्यकर्ताओं को तो हैरानी हो ही रही है, सहयोगी दलों में भी हड़कंप मचा हुआ है कि आखिर पार्टी करना क्या चाह रही है।

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक जेएमएम और राजद जैसे सहयोगी दलों में सबसे पहले तो यह सवाल उठ रहा है कि कांग्रेस के जो बड़े नेता चुनाव प्रचार करने आ भी रहे हैं, वह सिर्फ अपनी पार्टी के उम्मीदवारों पर ही फोकस क्यों कर रहे हैं। जबकि सहयोगी दलों वाली सीटों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

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कांग्रेस की सभाओं में क्यों नहीं जुट पा रही भीड़?
सबसे बड़ी बात ये है कि जिन सीटों पर कांग्रेस पार्टी का उम्मीदवार चुनाव लड़ भी रहा है, वहां न तो पार्टी के झंडे दिख रहे हैं और ना ही प्रचार वाली गाड़ियां ही नजर आ रही हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है कि पार्टी अपनी रैलियों में भीड़ जुटाने में भी नाकाम हो रही है। कांग्रेस राज्य की 81 सीटों में से 30 पर लड़ रही है, जिनमें से 17 पर पहले ही चरण में वोटिंग हो चुकी है।

घोषणापत्र जारी करने में भी हुई भयंकर देरी
पार्टी की रणनीति तब किसी के समझ में नहीं आई, जब 43 सीटों पर पहले चरण की वोटिंग से एक दिन पहले तक वह घोषणापत्र भी जारी नहीं कर सकी थी। और जब जारी किया तो साइलेंस पीरियड के उल्लंघन का आरोप लगा और बीजेपी शिकायत लेकर चुनाव आयोग में पहुंच गई।

कांग्रेस की रणनीति से नेता-कार्यकर्ता भी परेशान
कांग्रेस पार्टी के इस ढीले रवैए को उसके कार्यकर्ता भी नहीं पचा पा रहे हैं। एक कांग्रेस नेता ने कहा है, 'पहले चरण की वोटिंग वाली सीटों पर वोटरों तक इतने कम समय में चुनावी वादे कैसे पहुंचाए जा सकते थे, जबकि उस चरण के लिए प्रचार भी बंद हो चुका था....।'

चुनावों की घोषणा के बाद बदल दिया कमान
झारखंड में कांग्रेस की चुनावी रणनीति शुरू से ही बहुतों के समझ में नहीं आ रही है। चुनाव आयोग ने अक्टूबर में जब चुनाव तारीखों का एलान कर दिया तब जाकर कांग्रेस पार्टी को अपने प्रदेश अध्यक्ष को बदल का ख्याल आया। राजेश कुमार की जगह तीन बार के विधायक केशव महतो कमलेश को जिम्मेदारी दी गई। लेकिन, प्रदेश समिति अबतक गठित नहीं हुई है और पहले वाला सिर्फ मीडिया सेल ही काम कर रहा है।

पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता आरके सिन्हा ने भी माना है कि नई समिति कब गठित होगी कहना मुश्किल है, लेकिन दलील दे रहे हैं कि पुराने पदाधिकारी और कार्यकर्ता ही चुनाव अभियान का संचालन कर रहे हैं।

कांग्रेस के स्टार प्रचार भी झारखंड में दिख रहे हैं फिसड्डी!
कांग्रेस का झारखंड में उत्साह का स्तर क्या है, इसका एक और प्रमाण ये है कि जेएमएम के स्टार प्रचारक हेमंत और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन अगर 60 रैलियां कर चुके हैं, तो देश में कांग्रेस पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा राहुल गांधी शुक्रवार की रैली को लगाकर सिर्फ 7 सभाएं ही कर सके हैं। हां, उनसे ज्यादा पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन जरूर गिनती पूरा कर चुके हैं।

कांग्रेस को सीट बंटवारे में मिली सीटों की संख्या पर उठने लगे सवाल
एक जेएमएम नेता ने कहा है, 'कांग्रेस को गठबंधन में जितना हिस्सा (सीटों का) मिला है, उनक नेताओं को और ज्यादा रैलियां करनी चाहिए।' उन्होंने हैरानी जताई कि कहीं कांग्रेस को 'राज्य में उसकी क्षमता से ज्यादा सीटें तो नहीं दे दी गई हैं।'

'स्थानीय आदिवासी खड़गे को नहीं समझ पाते'
झारखंड कांग्रेस के एक सूत्र का कहना है कि पार्टी को जितनी भी सीटें मिली हैं, उस हिसाब से भी वह भीड़ जुटाने में नाकाम हो रही है। उसने कहा, 'लोग, खासकर आदिवासी राहुल जी को सुनना चाहते हैं, लेकिन वह सिर्फ कुछ ही जगहों पर आए हैं। स्थानीय आदिवासी खड़गे को नहीं समझ पाते हैं, जिन्होंने एक रैली में कर्नाटक के बारे में बोलने से भाषण शुरू किया।'

हर सहयोगी दे रहा है कांग्रेस पार्टी को सीख
जबकि, राजद और सीपीआई-एमएल के नेता भी सहयोगी दलों की सीटों पर जाकर प्रचार कर रहे हैं। एक जेएमएम नेता ने कहा, 'राहुल और खड़गे जी राष्ट्रीय चेहरा हैं और उन्हें सहयोगियों की सीटों पर भी जाना चाहिए, ताकि इंडिया ब्लॉक में एकता का संदेश जा सके।'

कांग्रेस का प्रचार जेएमएम और राजद के भरोसे!
आरजेडी कांग्रेस की सबसे करीबी सहयोगी है। लेकिन इसने भी इसके नेताओं के रवैए पर नाखुशी जाहिर की है। एक राजद नेता ने कहा, 'कांग्रेस का कैडर यहां कमजोर है।...यहां कांग्रेस पार्टी का कार्यकर्ता भी खुद को नेता मानता है और जमीन पर काम नहीं करना चाहता। कुल मिलाकर उनका प्रचार जेएमएम और आरजेडी के भरोसे है। कांग्रेस उम्मीदवार भी सोरेन दंपति और तेजस्वी जी के प्रोग्राम की मांग कर रहे हैं।'

हालांकि, कांग्रेस प्रवक्ता आरके सिंह 'कमजोर प्रचार' के दावों का खंडन कर रहे हैं और इसके लिए भी आरोप बीजेपी पर लगा रहे हैं कि वह गलत अफवाह फैला रही है।

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