वादे पे तेरे मारा गया! JMM पर बीजेपी का तीखा हमला, CM हेमंत को दिलाई 'चुनावी गारंटी' की याद
झारखंड में भी चुनावी पारा पूरी तरह चढ चुका है और सियासी मुकाबला रोचक होता जा रहा है। एक तरफ हेमंत सोरेन अपनी गद्दी बचाने के लिए धुआंधार प्रचार कर रहे हैं लेकिन उनके कार्यकाल की नाकामियां उनका पीछा छोडती नज़र नहीं आ रही है। झारखंड से मिले ग्राउंड इनपुट से करीब करीब एक बात तो साफ होती जा रही है कि लोगों में हेमंत सोरेन के प्रति अविश्वास पनप रहा है। दूसरी तफ भाजपा भी हमलावर है। जेएमएम सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोडती है।
हाल ही भाजपा ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर झारखंड मुक्ति मोर्चा और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर तीखा प्रहार किया है। X (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए एक पोस्ट में भाजपा ने सोरेन सरकार की पुरानी योजनाओं और वादों को लेकर जोरदार कटाक्ष किया है। बीजेपी झारखंड के आधिकारिक हैंडल से किए गए एक्स-पोस्ट में लिखा गया, "खुली है हेमंत सोरेन की पोल जैसा खुला हो पुराना पर्चा, चलो जेएमएम झारखंड के वादों की करें फिर से चर्चा।"

इसके साथ पार्टी ने एक वीडियो भी शेयर किया है जिसे सोशल मीडिया पर महज पांच मिनट में ही 6 सौ से अधिक लाइक्स और रिएक्शन मिले हैं। यह पोस्ट न सिर्फ एक कटाक्ष है, बल्कि JMM सरकार की विफलताओं की एक पूरी कहानी कहता है। सोशल मीडिया फॉलोवर्स जमकर इस पोस्ट का लुत्फ उठा रहे हैं और झामुमो की हेमंत सरकार की विश्वसनियता पर सवाल उठा रहे हैं।
इसी पोस्ट के बहाने आइए करते हैं हेमंत सरकार के वादों का रियल्टी चेक
खोखले वादे, अधूरे सपने
हेमंत सोरेन ने जब सत्ता में कदम रखा, तब जनता से बड़े-बड़े वादे किए गए थे। लेकिन सच्चाई यह है कि ज्यादातर वादे सिर्फ कागजों पर ही रह गए। युवाओं को रोजगार देने का वादा हो, किसानों की मदद का दावा हो, या फिर आदिवासियों के हितों की बात - सभी वादे हवा में उड़ते नजर आए हैं। भाजपा का कहना सही है कि JMM की सरकार ने झारखंड के लोगों को सिर्फ सपने दिखाए, लेकिन उन सपनों को हकीकत में बदलने में पूरी तरह विफल रही। आज प्रदेश का युवा रोजगार की तलाश में दर-दर भटक रहा है, किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं, और भ्रष्टाचार ने पूरे राज्य में जड़ें जमा ली हैं।
रोजगार योजनाओं का बंटाधार
प्रदेश में 5 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा था। शिक्षकों के पदों पर स्थायी नियुक्ति, मेडिकल विभाग में नियुक्ति सहित बेरोजगारी कानून के तहत भत्ते देने का भी आश्वासन था। लेकिन पांच सालों में नतीजा रहा टाँय-टाँय फिस्स! तुर्रा जब हेमंत सोरेन के जेल जाने पर चंपई सोरेन मुख्यमंत्री बने और युवाओं को रोजगार दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाया तो न केवल उनकी राहों में रोडे अंटकाए बल्कि उन्हें अपमानित कर पद से हटा दिया।
इसी प्रकार महिलाओं को प्रतिमाह 2000 रुपये पेंशन देने की घोषणा भी आजतक घोषणा ही रह गई। सरकार ने किसानों के मुआबजे और अनुदान के लिए भी उदासीन ही रही। यहाँ तक केंद्र की योजनाओं को भी राज्य में लागू करने में अधिकांशतः विफल रही है।
झारखंड में बेरोजगारी का बढ़ता आंकड़ा
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने पिछले 5 वर्षों में रोजगार सृजन के मामले में कई चुनौतियों का सामना किया है। 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में बेरोजगारी की वर्तमान दर राष्ट्रीय औसत 8 फीसदी की तुलना में 14.03 प्रतिशत थी। 2022 के आंकड़ों के मुताबिक झारखंड देशभर में बेरोजगारों दर में तीसरे स्थान पर था। सीएमआईई 2021 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में बेरोजगारी दर 17.3 फीसदी थी। राज्य में उस वक्त करीब 4 लाख रजिस्टर बेरोजगार युवाओं की फौज थी। झारखंड के युवा अलग-अलग राज्यों में रोजगार की तलाश में पालयन कर रहे हैं। यह आंकड़ा यह दिखाता है कि राज्य में रोजगार के अवसरों की कमी है।
हेमंत सरकार ने विभिन्न योजनाओं जैसे 'मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना' और 'झारखंड स्टेट एंप्लॉयमेंट मिशन' का ऐलान किया, लेकिन इन योजनाओं के तहत वास्तविक रोजगार के अवसर सीमित रहे हैं। इन आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि हेमंत सोरेन सरकार के तहत झारखंड में रोजगार की स्थिति चिंताजनक है। बेरोजगारी दर में वृद्धि, सरकारी योजनाओं की विफलता और निजी निवेश में कमी ने राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को सीमित कर दिया है।
भ्रष्टाचार में डूबी सरकार
हेमंत सोरेन की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप तो जैसे आम बात हो गई है। चाहे वह खनन घोटाला हो या फिर भूमि आवंटन में गड़बड़ी, हर जगह सरकार की नाकामी नजर आ रही है। भाजपा ने तो कई बार सोरेन सरकार को इस भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कदम उठाने की चुनौती दी है, लेकिन जवाब में सिर्फ मौन ही मिला है। हेमंत सोरेन खुद इस मामले में जेल जा चुके हैं। जांच एजेंसियों की पडताल अभी जारी है लेकिन फिलहाल सोरेन जमानत पर हैं। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, परिवारवाद और धार्मिक तुष्टिकरण झारखंड के विकास पर अब भारी पर रहा है।
भ्रष्टाचार और घोटालों की लंबी लिस्ट
झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार के पिछले 5 सालों में भ्रष्टाचार और घोटालों की एक लंबी सूची सामने आई है। अलग विभागों में अनियमितताएं और वित्तीय भ्रष्टाचार के मामलों ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को कमजोर किया है। सबसे पहले खाद्य आपूर्ति विभाग में 2021 में घोटाला हुआ, जिसमें करोड़ों रुपये की अनियमितताएं सामने आईं। यह घोटाला तब उजागर हुआ जब राशन की आपूर्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें आईं।
उसके बाद 2022 में सामने आया आधार और राशन कार्ड घोटाला। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 1 लाख फर्जी राशन कार्ड जारी किए गए थे। जिससे सरकार को लगभग 150 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
झारखंड का मनरेगा घोटाला भी चर्चाओं में था। मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान में अनियमितता के मामले में भी गंभीर आरोप लगे। पिछले 5 वर्षों में करोड़ों का घोटाला हुआ है। राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में छोटे-छोटे घोटालों की भरमार है। जैसे कि शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा, स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा उपकरणों की खरीद में गड़बड़ी, और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की शिकायतें मिली हैं।
इन घोटालों की वजह से विकास योजनाओं पर बुरा असर पड़ा है। सरकारी योजनाओं का लाभ गरीब और जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच सका है, और राज्य में विकास की गति धीमी हो गई है।
हेमंत सरकार: प्रचार में हीरो, काम में जीरो
भाजपा के इस सोशल मीडिया पोस्ट ने झारखंड की जनता के सामने JMM सरकार की सच्चाई को फिर से उजागर किया है। हेमंत सोरेन की सरकार ने अपने कार्यकाल में जितना समय विज्ञापनों और प्रचार पर खर्च किया है, अगर उतना समय जनता की समस्याओं के समाधान में लगाया होता, तो शायद आज झारखंड की तस्वीर कुछ और होती।
लेकिन सच्चाई यह है कि JMM सिर्फ अपने राजनीतिक लाभ के लिए जनता को गुमराह कर रही है। सरकार की नीतियां सिर्फ खोखले वादों पर आधारित हैं, और जनता की समस्याओं का कोई ठोस समाधान नजर नहीं आता।
भाजपा ने इस पोस्ट के जरिए हेमंत सोरेन की सरकार की पोल पूरी तरह खुल चुकी है, और अब झारखंड की जनता को खुद तय करना है कि वे भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी के खिलाफ कब आवाज उठाएंगे। वह झारखंड की जनता को JMM के झूठे वादों के चंगुल से मुक्त कराना चाहती है। अब वक्त आ गया है कि झारखंड की जनता JMM की धोखाधड़ी को समझे और भाजपा के साथ खड़ी होकर एक सशक्त और विकासशील झारखंड का निर्माण करें।












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