'इंटरनेट बंदी की आड़ में JSSC परीक्षा की सीटें बाहरी को बेचने का खेल तो नहीं चल रहा', मरांडी ने उठाए सवाल
Babulal Marandi on Jharkhand Internet Ban: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में JGGLCCE परीक्षा को लेकर मोबाइल इंटरनेट बंद करने के फैसले की आलोचना की है। बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि इंटरनेट बंदी की आड़ में कहीं जेएसएससी परीक्षा की सीटें बाहरी लोगों के हाथों बेचने का खेल तो नहीं चल रहा।
असल में JGGLCCE परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी को लेकर आज 21 सितंबर को हेमंत सरकार ने सुबह 8 बजे से दोपहर 1.30 तक मोबाइल इंटरनेट पूरे राज्य में बंद रखा। रिपोर्ट के मुताबिक अब 22 सितंबर को सुबह 4 बजे से शाम साढ़े तीन बजे तक के लिए इंटरनेट सेवा बंद रखी जाएगी। इसी मामले पर बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन को घेरा है और उनके इरादे पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

बाबूलाल मरांडी बोले- हेमंत सोरेन जैसे अक्षम मुख्यमंत्री से जल्द मुक्ति मिलेगी
बाबूलाल मरांडी ने 21 सितंबर की शाम सोशल मीडिया पोस्ट एक्स पर लिखा, ''परीक्षा में धांधली के लिए अपने करीबी व्यक्ति के पास एडमिट कार्ड जमा कराने वाले हेमंत सोरेन ने झारखंड में साढ़े पांच घंटे इंटरनेट बंदी की मियाद बढ़ाकर लगभग 12 घंटे का कर दिया है। झारखंड में कल सुबह 4 बजे से शाम साढ़े तीन बजे तक के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।''
बाबूलाल मरांडी ने कहा, ''जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सबसे करीबी व्यक्ति ही छात्रों का एडमिट कार्ड इकट्ठा रखता हो, जब सिर्फ प्रश्न पत्र ही नहीं, पूरी की पूरी परीक्षा केंद्र को ही 'सेट' कर लिया जाता हो...वैसे में सिर्फ इंटरनेट बंदी से परीक्षा में धांधली पर कैसे रोक लगाया जा सकता है? यह इंटरनेट बंदी का खेल सिर्फ लोगों का ध्यान भटकाने के लिए तो नहीं है?''
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'इंटरनेट बंदी के फैसले ने जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया है'
बाबूलाल मरांडी ने कहा, '' इंटरनेट बंदी की आड़ में जेएसएससी परीक्षा की सीटें बाहरी लोगों के हाथों बेचने का खेल तो नहीं चल रहा? वजह चाहे जो भी हो, इंटरनेट बंदी के इस बेहूदे फैसले ने झारखंड के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया है। झारखंड को हेमंत सोरेन जैसे अक्षम मुख्यमंत्री से जल्द मुक्ति मिलेगी।''
बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि इंटरनेट हमारी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। बच्चों की पढ़ाई लिखाई से लेकर बैंकिंग कार्यों तक, सरकारी दफ्तरों से लेकर गांवों के प्रज्ञा केंद्रों तक...स्कूल, कचहरी, अस्पताल, मकान, दुकान, सड़क यातायाता, रेल सेवा, हवाई सेव, इंटरनेट हर जगह की जरूरत बन चुका है। हेमंत सोरेन इंटरनेट बंद किए जाने के फैसले से आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है।












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