कुत्ते को बचाने के चक्कर में अपनी जान गंवाने वाले मेजर अंकित का राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
झांसी। जम्मू-कश्मीर में बारामूला जिले के गुलमर्ग क्षेत्र में घर में लगी आग के बाद कई लोगों की जान बचाने के दौरान एक पालतू कुत्ते को आग की लपटों से बचाने के चक्कर में मेजर अंकित बुद्धराजा ने अपनी जान न्यौछावर कर दी। मंगलवार को शहीद मेजर अंकित का पार्थीव शरीर झांसी लाया गया और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। शनिवार की रात को उनके घर में आग लगी थी।
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एसएसटीसी में कोर सिग्नल से जुड़े मेजर अंकित बुद्धराज ने अपनी पत्नी के साथ अन्य लोगों और एक कुत्ते को घर से बाहर सुरक्षित निकाल लिया। लेकिन दूसरे कुत्ते को बचाने के दौरान वह 90 फीसदी जल गए और घटनास्थल पर उनकी मौत हो गई। उनके अंतिम संस्कार में सैन्य अफसरों के साथ ही जन सैलाब उमड़ आया। सोमवार को उनका पार्थिव शरीर झांसी के राजगढ़ में पैतृक आवास पर लाया गया। सुबह एल्डिको कॉलोनी से उनकी अंतिम यात्रा मुक्ति धाम, बिजौली के लिए निकली।
मेजर अंकित बुद्धराज भेल के सिक्षा निकेतन में प्राइमरी से लेकर इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद जनवरी साल 2005 में टेक्निकल इंजीनियरिंग सर्विस में चयन हो गया। आइएमए देहरादून में एक साल की ट्रेनिंग की। इसके बाद वे इंदौर के महू में मिलिट्रि हेडक्वार्टर आ गए, जहां चार वर्ष आईटी इंजीनियरिंग की। इसके बाद साल 2008 में 13 दिसंबर को लेफ्टीनेंट बनाए गए। साल 2010 में कैप्टन तथा दिसंबर 2014 में मेजर बन गए।
मेजर अंकित बुद्धराज की शादी करीब पांच साल पहले भोपाल की रहने वाली अनुभूमि के साथ हुआ। अनुभूमि ने बीटेक किया हुआ है। लेकिन वह पति के साथ ही रह रही थीं। वहां वे सोशल वर्क करती थीं।












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