Jaunpur News: जौनपुर में युवक ने ऑनलाइन साइट्स पर डाले फर्जी विज्ञापन, बनाया गिरोह, फिर ठगे लाखों
Jaunpur News: जौनपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका एक युवक कर्ज के बोझ से दबकर अपराध की राह पर निकल पड़ा। आरोपी ने खुद का गैंग खड़ा किया और सोशल मीडिया पर सस्ते ट्रैक्टर और भैंस के फर्जी विज्ञापन डालकर लोगों को लूटने लगा।
पुलिस के अनुसार आरोपी जितेंद्र प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला है। उसने जौनपुर के छह युवकों को अपने साथ जोड़कर गिरोह बनाया और ठगी की पूरी स्कीम खड़ी कर दी। विज्ञापनों में ट्रैक्टर और भैंस बेहद कम दाम पर दिखाए जाते थे, जिससे लोग झांसे में आ जाते थे।

रुपए लेने के बाद करते थे मारपीट
कौशांबी के रहने वाले सचिन मिश्रा और प्रयागराज निवासी विनोद पांडेय इस गैंग के शिकार बने। दोनों ने ऑनलाइन विज्ञापन देखकर ट्रैक्टर और भैंस खरीदने की मंशा जताई थी। आरोपियों ने उन्हें जौनपुर बुलाया और क्यूआर कोड स्कैन करवा कर लाखों रुपये ऐंठ लिए।
सचिन मिश्रा से एक लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। इसी तरह विनोद पांडेय से दो लाख रुपये ठगे गए। इसके बाद दोनों को सुनसान स्थान पर ले जाकर और पैसे मांगे गए। पैसे न देने पर उनके साथ मारपीट की गई और धमकी दी गई कि वे घर जाकर और रुपये भेजें।
पुलिस ने सर्विलांस की मदद से पकड़े सात आरोपी
पीड़ितों की शिकायत पर सरायख्वाजा थाने में केस दर्ज किया गया। पुलिस ने सर्विलांस टीम की मदद से जांच शुरू की तो परत दर परत सच्चाई सामने आई। मामले में पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस गैंग का मास्टरमाइंड जितेंद्र यादव पहले से ही 10 हजार रुपये का इनामी था।
गिरफ्तारी के वक्त पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, नकद रुपये और अपाचे बाइक भी बरामद की। उसके बाद पकड़े गए लोगों से पूछताछ के बाद ठगी के इस ऑनलाइन धंधे का खुलासा हुआ। पूरा मामला जानने के बाद पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।
आर्थिक तंगी के चलते चुना अपराध का रास्ता
मामले पर जौनपुर के ASP ग्रामीण आतिश कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी जितेंद्र बीटेक पास है और आर्थिक तंगी के चलते अपराध में लिप्त हो गया। वह सोशल मीडिया पर विज्ञापन डालकर लोगों को कम दाम का लालच देता था।
फिर अपने गिरोह के साथ मिलकर क्यूआर कोड से पैसे ट्रांसफर कराता और जबरन वसूली करता था। फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है और इनके अन्य नेटवर्क व बैंक खातों की भी जांच की जा रही है।












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