जम्मू में आतंकी हमलों की असली वजह क्या है, साल 2020 में भारत का कौनसा फैसला आतंकियों के लिए बना मौका?
Jammu terrorist attack Reason: कश्मीर में लगभग शून्य हो चुका आतंकवाद जम्मू में रीजन में सिर इस कदर उठा रहा है कि आए दिन भारतीय सेना पर आतंकी हमले हो रहे हैं। पिछले 86 दिन में तो 10 से ज्यादा आतंकी हमलों में 12 जवान शहीद हो गए।
20 साल से शांत जम्मू रीजन में आतंकी हमले बढ़ने की वजह क्या है? क्या साल 2020 में जम्मू से भारतीय सेना हटाकर लद्दाख भेजने का कदम आतंकियों के लिए सबसे बड़ा मौका बन गया? या फिर बॉर्डर पार पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के इशारे पर जम्मू में जैश और लश्कर जैसे आतंकी संगठनों का 20 साल पुराना लोकल नेटवर्क फिर एक्टिव हो गया।

जम्मू में साल 2024 में आतंकी हमलों में चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि आतंकियों को स्थानीय मददगार मिल रहे हैं। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के लोकल नेटवर्क में शामिल ये वो स्थानीय लोग हैं, जो कभी आतंकियों का सामान ढोने का काम करते थे। अब उन्हें गांवों में ही पनाह, भोजन, हथियार और गोला बारूद मुहैया करवाए रहे हैं।
दैनिक भास्कर में छपी एक खबर के अनुसार बीते दिनों भारतीय सेना में जिन 25 संदिग्ध मददगारों को पकड़ा, उनसे पूछताछ में कई सुराग मिले। पता चला कि उनका लोकल नेटवर्क जम्मू रीजन के 10 में से 9 जिलों में पांव जमा चुका है। इनमें राजौरी, कठुआ, पुंछ, रियासी, ऊधमपुर, डोडा, किश्तवाड़, जम्मू और रामबन आदि जिले शामिल हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञ पूर्व जनरल कमांडिंग इन चीफ नॉर्दन कमांड ले. जनरल दीपेंद्र सिंह हुड्डा कहते हैं कि साल 2020 तक जम्मू रीजन में काफी सुरक्षा बल तैनात था, लेकिन गलवान हिंसक झड़प के बाद चीन की आक्रामकता का जवाब देने के लिए जम्मू से भारतीय सेना को हटाकर लद्दाख भेज दिया गया था।
जम्मू से सेना हटाने के भारत के कदम को आतंकियों ने मौके के रूप में लिया और आतंक अपना अड्डा कश्मीर से जम्मू से शिफ्ट कर दिया। पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का 20 साल पुराना लोकल नेटवर्क जम्मू रीजन में पहले से ही मौजूद था। उसे सिर्फ एक्टिव करना था, जो आतंकियों ने बखूबी कर लिया।












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