उरी आतंकी हमला: सेना के हथियार लाने वाले कुली पर अटकी शक की सुई
जम्मू-कश्मीर। उरी आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एंजेसी (एनआईए) को कैंप में काम करने वाले कुलियों पर भेदिया होने का शक है।

बीते रविवार को जम्मू कश्मीर के उरी सेक्टर में सेना के कैंप पर आतंकियों ने हमला कर दिया था, जिसमें 19 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।
इस हमले में कई सुरक्षाचक्रों को तोड़कर आंतकी कैंप तक पहुंचे थे, जहां उन्होंने सोते हुए सैनिकों पर ग्रेनेड से हमला किया था।
इस पूरे मामले को देखते हुए एनआईए को शक है कि कैप के भीतर कोई ऐसा था, जिसने आतंकियों को भीतर की जानकरी दी।
एनआईए लगातार कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। एनआईए के शक की सुईं कैप में काम करने वाले कुलियों, मैकेनिक और पलंबर पर शक है।
कुलियों को बहकाना है आसान
एनआईए को शक है कि कैंप में काम करने वाले कुली इस हमले में किसी तरह से शामिल हो सकते हैं। कैंप में 35 से 36 कुली काम करते हैं, ये कुली ही कैंप में हथियार लाने और ले जाने का काम करते हैं।
कैंप में काम करने वाले ये कुली बहुत थोड़ी सी तनख्वाह पाते हैं, साथ ही इन्हें पेंशन या दूसरी कोई सुविधा भी नहीं मिलती है। ऐसे में गरीबी के कारण इनको पैसे के लिए बहकाया जा सकता है।
ऐसे में एनआईए कुलियों और मैकेनिक से पूछताछ कर सकती है। साथ ही एनआईए इन पहाड़ियों की भी जांच कर रही है, जिनके रास्ते आतंकियों के सीमापार पाकिस्तान से आने का शक है।
एक दुकानदार पर भी है एनएआई का शक
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनएआई) को एक स्थानीय दुकानदार पर भी शक है, एक मोबाइल फोन रिटेलर पर एजेंसी छानबीन कर रही है। रिटेलर ने हमले से कुछ दिन पहले ही 6 बिहार रेजिमेंट के सैनिकों को सिम कार्ड उपलब्ध कराए थे।
रिलेटर पर एनआईए का ध्यान इसलिए गया क्योंकि हमले से ठीक एक दिन पहले यानी शनिवार को उसकी दुकान निर्धारित समय के तीन घंटे बाद बंद हुई थी।
इस रिटेलर की दुकान बंद होने के कुछ ही घंटों बाद वहां आतंकियों ने हमला बोला था। आर्मी कैंप में आमतौर पर साढ़े छह बजे दुकाने बंद हो जाती हैं।












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