कश्मीर कैबिनेट में सज्जाद लोन, निर्मल सिंह में क्या है खास?
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। जम्मू-कश्मीर में रविवार को जिस नई सरकार ने शपथ ली, उसके दो मंत्रियों का इतिहास गजब का है। महाराज हरि सिंह की करीबी सुरक्षा में तैनात रहने वाले सुरक्षाकर्मी के बेटे डा. निर्मल सिंह रविवार को जब उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए मंच की ओर बढ़ रहे थे तो हाल में बैठे उनके पिता मुस्कुरा रहे थे।

खासबात यह है कि उनके बेटे ने मुस्लिम बहुल प्रदेश में पहले भाजपा मंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने बिलावर विधानसभा क्षेत्र में तत्कालीन सहकारिता राज्यमंत्री मनोहर लाल को 18 हजार मतों से पराजित किया।
अलगाववाद का हिस्सा
उधर कभी जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद का हिस्सा रहे सज्जाद गनी लोन ने मुख्य धारा की राजनीति में एक नया सफर तय करते हुए मंत्री पद की शपथ ली। करीब एक दशक पहले अलगाववाद से नाता तोड़ने वाले सज्जाद पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता अब्दुल गनी लोन के बेटे हैं।
श्रीनगर में हत्या
अब्दुल गनी लोन की श्रीनगर में हत्या कर दी गई थी। लोन की इस नयी कामयाबी से राज्य की अलगाववादी राजनीति पर असर पड़ने की उम्मीद है।मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा कि लोन ने शुरुआत की और यह दूसरे अलगाववादियों के लिए भी एक रास्ता है।
सज्जाद लोन के पिता की हत्या लोन के लिए निर्णायक मोड़ था। इसके बाद वह हुर्रियत कांफ्रेस में रहे लेकिन कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की ओर से उन पर आरोप लगाया कि 2002 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने छद्म उम्मीदवार खड़े किए। इसको लेकर हुर्रियत में विभाजन हो गया।
सर्वसम्मत उम्मीदवार
उधर, निर्मल सिंह गठबंधन सरकार की संभावनाओं के बाद भाजपा की ओर से उपमुख्यमंत्री पद के लिए एकमात्र सर्वसम्मत उम्मीदवार रहे। 25 साल के लंबे राजनीतिक जीवन में डा. निर्मल सिंह ने लोकसभा और विधानसभा के कई चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें पहली बार जीत का स्वाद विधानसभा चुनाव 2014 में ही मिल पाया।












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