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चेहरा दिखते ही बजेगा अलार्म! Amarnath Yatra की सुरक्षा में टेक्नोलॉजी का पहरा, क्या है सुरक्षा प्लान?

Amarnath Yatra 2025: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अमरनाथ यात्रा के पहलगाम रूट पर आतंकवादियों की किसी भी साजिश को नाकाम करने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) स्थापित किया है। यह सिस्टम हाईटेक तकनीक पर आधारित है, जो किसी भी संदिग्ध या वांछित व्यक्ति के कैमरे की नजर में आते ही सुरक्षा बलों को रियल टाइम में अलर्ट करता है।

एक अधिकारी ने बताया कि इस सिस्टम में सक्रिय आतंकवादियों और संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्करों की तस्वीरें फीड कर दी गई हैं। जैसे ही कोई ऐसा व्यक्ति कैमरे की नजर में आता है, सुरक्षा केंद्र में हूटर बज उठता है, जिससे फौरन कार्रवाई की जा सके।

Amarnath Yatra

क्या है FRS?

फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम डिजिटल फोटोज या वीडियो में चेहरे की विशेषताओं का विश्लेषण करता है और उसे एक डेटाबेस से मिलान करता है। इस तकनीक को जल्द ही बालटाल रूट पर भी इंस्टॉल किया जाएगा, ताकि 3 जुलाई से शुरू होने वाली यात्रा से पहले सुरक्षा पुख्ता की जा सके। इस साल की अमरनाथ यात्रा 9 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी। यात्रा की अवधि इस बार 52 की बजाय 38 दिन रखी गई है।

अमरनाथ यात्रा पर पहले भी कई आतंकी हमले हो चुके हैं

  • अगस्त 2000: नुनवान बेस कैंप पर हमला, 32 लोगों की मौत, जिनमें 24 अमरनाथ यात्री थे।
  • जुलाई 2001: शेषनाग बेस कैंप पर हमला, 13 लोग मारे गए।
  • 2002: चंदनवाड़ी बेस कैंप पर हमला, 11 यात्रियों की मौत।
  • जुलाई 2017: कुलगाम में बस पर हमला, 8 यात्री मारे गए।

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सुरक्षा के तगड़ा इंतज़ाम

  • RFID टैगिंग: सभी वाहनों और यात्रियों को रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग से जोड़ा गया है, ताकि उनकी मूवमेंट ट्रैक की जा सके।
  • CCTV निगरानी: जम्मू से लेकर गुफा तक के पूरे रूट को सीसीटीवी की निगरानी में लाया गया है।
  • तीन लाख से ज़्यादा रजिस्ट्रेशन: 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बावजूद, इस बार अब तक 3 लाख से अधिक तीर्थयात्री रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं।
  • अधिकारियों का कहना है कि अमरनाथ यात्रा पर हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए चप्पे-चप्पे पर निगरानी और सख्त सुरक्षा जरूरी है, ताकि हर तीर्थयात्री की यात्रा सुरक्षित और शांतिपूर्ण हो सके।

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