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महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान के लोकतंत्र पर दिया बड़ा बयान, 'हम चाहते हैं.....'

श्रीनगर, 11 अप्रैल: कश्मीर मसले के स्थाई समाधान के लिए बार-बार पाकिस्तान की राग अलापने वाली पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती अब पाकिस्तान की अस्थिरता से परेशान नजर आ रही हैं। उनको भी लगता है कि पाकिस्तान की तरक्की के लिए जरूरी है कि वहां लोकतांत्रिक संस्थाओं को ताकत मिले और राजनीति में पाकिस्तानी सेना का दखल कम हो। उन्होंने सीधे तौर पर तो पाकिस्तानी सेना का नाम नहीं लिया है, लेकिन जिस तरह से लोकतंत्र की बहाली पर जोर दिया है, उसका इशारा पाकिस्तानी सेना की ओर ही जाता है, जो बीते सात दशकों से भी ज्यादा वक्त से पाकिस्तान की सत्ता को अपने कब्जे में रखती आई है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में इमरान सरकार का खात्मा जरूर हो चुका है, लेकिन वहां के हालात बिल्कुल ऐसे नहीं हैं, जिससे लगे कि वहां का सारा सियासी संकट दूर हो चुका है और आने वाली नई सरकार भारत के साथ सही रिश्ते बहाली की दिशा में कोई गंभीर प्रयास करेगी।

पाकिस्तान में लोकतंत्र की मजबूती पर महबूबा का जोर

पाकिस्तान में लोकतंत्र की मजबूती पर महबूबा का जोर

पाकिस्तान में इमरान खान सरकार की छुट्टी हो चुकी है, लेकिन वहां राजनीतिक संकट अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में जम्मू और कश्मीर की राजनीतिक पार्टी पीडीपी की सुप्रीमो महबूबा मुफ्ती वहां की सियासी हालात को लेकर बहुत बड़ी बात कही है और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को स्थापित करने की पैरवी की है। पाकिस्तान को लेकर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा का जो रवैया रहा है, उसमें उनका ताजा बयान काफी अहम माना जा रहा है। क्योंकि, पाकिस्तान का आज तक का रिकॉर्ड है कि कोई सरकार ना तो अपना कार्यकाल पूरा कर पाई है और ना ही कोई सरकार पाकिस्तानी मिलिट्री के साए से पूरी तरह से खुद को अलग रख सकी है।

'हम चाहते हैं कि वहां लोकतंत्र फले-फूले'

'हम चाहते हैं कि वहां लोकतंत्र फले-फूले'

दरअसल, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को पाकिस्तान में जारी राजनीतिक संकट को लेकर कहा है कि 'पाकिस्तान हमारा पड़ोसी है और हम चाहते हैं कि वहां लोकतंत्र फले-फूले।' पीडीपी नेता का पाकिस्तान में लोकतंत्र की मजबूती वाला आह्वान काफी अहम माना जा रहा है। क्योंकि, जम्मू-कश्मीर में जो भी राजनीतिक समस्याएं रही हैं, उसके पीछे पाकिस्तानी सेना का खतरनाक मंसूबा ही रहा है और पाकिस्तान के कमजोर लोकतंत्र के लिए भी वहीं की सेना को ही जिम्मेदार माना जाता है। यहां तक कि इमरान सरकार की विदाई में भी कहीं ना कहीं पाकिस्तानी सेना के चीफ कमर जावेद बाजवा के सक्रिय रोल से इनकार नहीं किया जा सकता।

पाकिस्तान से बातचीत पर देती रही हैं जोर

पाकिस्तान से बातचीत पर देती रही हैं जोर

एक दिन पहले ही मुफ्ती ने बीजेपी के खिलाफ आरोप लगाया था कि वह जम्मू और कश्मीर की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करने की कोशिश कर रही है और यहां के लोगों का 'दमन' करना चाहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी आरोप लगाया था कि वह ये सब चुपचाप देख रहे हैं और उन्हें अब उनसे कोई उम्मीद नहीं रह गई है। उन्होंने कुपवाड़ा में संवाददाताओं से यह भी कहा कि यदि केंद्र सरकार घाटी में शांति के दावे करती है तो फिर सुरक्षा बलों की ताकत बढ़ाई क्यों गई है। इससे पहले महबूबा पाकिस्तान से बातचीत पर जोर देकर कह चुकी हैं कि जबतक कश्मीर का मसला नहीं सुलझता, शांति नहीं आ सकती। उन्होंने इसके लिए पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के लोगों की बातचीत की बात कही थी।

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