रुला देगी 14 साल के विकलांग परवेज की कहानी, हर दिन एक पैर से 2 किलोमीटर पैदल चलकर जाता है स्कूल

रुला देगी 14 साल के विकलांग परवेज की कहानी, हर दिन एक पैर से 2 किलोमीटर पैदल चलकर जाता है स्कूल

श्रीनगर, 04 जून: कुछ कर दिखाने का जज्बा और जुनून जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा के एक 14 वर्षीय छात्र में देखने को मिली है। विकलांग छात्र, जिसका एक पैर नहीं है, वो हर दिन 2 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पढ़ाई करने जाता है। इस विकलांग छात्र का नाम परवेज है। परवेज के दिल दहला देने वाले वीडियो न्यूज एजेंसी एएनआई ने शेयर किया है, वीडियो में दिख रहा है कि परवेज अपने गांव की जर्जर सड़क की स्थिति के बावजूद एक पैर पर स्कूल जाता है। परवेज का कहना है कि वो जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहता है, उसके बड़े सपने हैं। उसने सरकार से कृत्रिम अंग दान में मांगी है।

'सड़कें अच्छी नहीं है...लेकिन मैं स्कूल जाना नहीं छोड़ सकता...'

'सड़कें अच्छी नहीं है...लेकिन मैं स्कूल जाना नहीं छोड़ सकता...'

परवेज ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, ''सड़कें अच्छी नहीं हैं। अगर मुझे कृत्रिम अंग मिल जाए, तो मैं चल सकता हूं। जिंदगी में कुछ हासिल करने का मेरा सपना है। खराब सड़कों की वजह से मैं स्कूल जाना नहीं छोड़ सकता हूं।'' बता दें कि बहुत ही कम उम्र में एक भीषण आग में परवेज अपना बायां पैर खोने के बावजूद, वर्तमान में नौगाम के सरकारी हाई स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ रहा है।

'मैं एक पैर पर बैलेंस बनाते हुए, स्कूल के लिए 2KM चलता हूं...'

'मैं एक पैर पर बैलेंस बनाते हुए, स्कूल के लिए 2KM चलता हूं...'

एएनआई से एक्सक्लूसिव बातचीत में 14 साल के परवेज ने कहा, "मैं एक पैर पर संतुलन बनाते हुए रोजाना करीब दो किलोमीटर की दूरी तय करता हूं। सड़कें अच्छी नहीं हैं। मैं अपने स्कूल तक पहुंचने के लिए प्रतिदिन दो किलोमीटर पैदल चलता हूं। मेरे स्कूल पहुंचने का रास्ता क्षतिग्रस्त है। स्कूल पहुंचने के बाद मुझे बहुत पसीना आता है क्योंकि मेरे लिए चलना मुश्किल है।''

परवेज ने कहा- मेरे अंदर सपनों को हासिल करने की आग है

परवेज ने कहा- मेरे अंदर सपनों को हासिल करने की आग है

परवेज ने कहा, " मैं स्कूल पहुंचने के बाद प्रार्थना करता हूं मुझे क्रिकेट, वॉलीबॉल और कबड्डी पसंद है। मुझे उम्मीद है कि सरकार मेरे भविष्य को आकार देने में मेरी मदद करेगी। मेरे अंदर अपने सपनों को हासिल करने की आग है।' परवेज ने कहा कि हालांकि समाज कल्याण विभाग ने उन्हें व्हीलचेयर प्रदान की थी, लेकिन उनके गांव की सड़कों की हालत खराब होने के कारण इसे कभी इस्तेमाल नहीं किया गया।

'जब मैं दोस्तों को ठीक से चलते देखता हूं तो दुख होता है...'

'जब मैं दोस्तों को ठीक से चलते देखता हूं तो दुख होता है...'

परवेज ने कहा, ''मुझे यह देखकर दुख होता है कि मेरे दोस्त ठीक से चल सकते हैं। हालांकि, मुझे शक्ति प्रदान करने के लिए मैं अल्लाह को धन्यवाद देता हूं। मैं सरकार से मुझे एक उचित कृत्रिम देने का आग्रह करता हूं। अंग या परिवहन का कोई अन्य साधन जो स्कूल और अन्य स्थानों पर मेरी यात्रा को आसान बना देगा।''

'मेरे पिता को बेचनी पड़ी थी संपत्ति...'

'मेरे पिता को बेचनी पड़ी थी संपत्ति...'

परवेज ने कहा कि एक अस्पताल में डॉक्टरों ने उनका इलाज किया था, जिसके लिए उनके पिका को एक बड़ी राशि का भुगतान करना पड़ा था। परवेज ने कहा, ''मेरे इलाज का खर्चा पिता नहीं उठा सकते हैं। एक इलाज के लिए मेरे पिता को संपत्ति बेचनी पड़ी थी।

डॉक्टर बनना चाहते हैं परवेज

डॉक्टर बनना चाहते हैं परवेज

वर्तमान में सरकारी हाई स्कूल नौगाम में कक्षा 9 में पढ़ रहे परवेज का लक्ष्य डॉक्टर बनना है। एएनआई से बात करते हुए, परवेज के स्कूल शिक्षक गुलाम मोहम्मद ने कहा, "वह एक मेहनती बच्चा है। वह पढ़ाई और पाठ्येतर गतिविधियों में अच्छा है। मैं उसके प्रयासों के लिए उसकी सराहना करता हूं। वह एक बहुत ही प्रतिभाशाली लड़का है।"

अब मिलेगा परवेज को कृत्रिम अंग

अब मिलेगा परवेज को कृत्रिम अंग

जयपुर फुट यूएसए के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने कहा है कि वो परवेज को कृत्रिम अंग मुफ्त में देंगे। एएनआई द्वारा अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किए गए लड़के के वीडियो को देखने के बाद भंडारी ने लड़के की मदद करने का फैसला किया। अध्यक्ष ने कहा, "जैसे ही मैंने एएनआई का ट्वीट पढ़ा, मैंने परिवार से संपर्क करने का फैसला किया। मैं परवेज को मुफ्त में एक कृत्रिम अंग प्रदान करूंगा।"

बता दें कि जयपुर फुट एक गैर सरकारी संगठन है जो विशेष रूप से विकलांगों के शारीरिक, आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास को सुनिश्चित करता है, ताकि वे अपनी गतिशीलता और गरिमा हासिल कर सकें और समाज के स्वाभिमानी बनकर जी सकें।

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