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जम्मू कश्मीर: हुर्रियत संगठनों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी में केंद्र सरकार, UAPA के तहत किया जा सकता है बैन

श्रीनगर, अगस्त 22। जम्मू कश्मीर में पिछले दो दशक से भी अधिक समय से अलगाववादी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हुर्रियत संगठनों पर मोदी सरकार बड़ी कार्रवाई की योजना बना रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दोनों धड़ों पर कड़े गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

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आतंकी संगठनों को फंडिंग कर रहे हैं ये संगठन?

दरअसल, पाकिस्तान स्थित संस्थानों की ओर से कश्मीरी छात्रों को MBBS सीट देने के मामले में हाल में की गई जांच से संकेत मिलता है कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का हिस्सा रहे कुछ संगठन स्टूडेंट्स से रुपए लेकर केंद्रशासित प्रदेश में आतंकवादी संगठनों को फंड दे रहे हैं। ऐसे में UAPA की धारा 3(1) के तहत हुर्रियत के दोनों धड़ों को बैन किए जाने की संभावना है। टीओई की खबर के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया है कि अगर केंद्र सरकार को ये लगता है कि ये संगठन गैर कानूनी तो वो आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी कर ऐसे संगठनों को बैन कर सकती है।

हुर्रियत में हैं 26 संगठन, लेकिन 2005 में पड़ी थी फूट

आपको बता दें कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गठन साल 1993 में हुआ था। इस संगठन में 26 समूह हैं, जिसमें कुछ पाकिस्तान समर्थित भी हैं। इनमें जमात-ए-इस्लामी, जेकेएलएफ (जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) और दुख्तरान-ए-मिल्लत के साथ-साथ पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और मीरवाइज उमर फारूक की अध्यक्षता वाली अवामी एक्शन कमेटी भी शामिल हुई। 2005 में ये अलगाववादी संगठन टूट गया, जिसके बाद ये दो गुटों में बंट गया। एक गुट का नेतृत्व मीरवाइज उमर फारूख और दूसरे गुट का नेतृत्व सैयद अली शाह गिलानी के हाथों में था।

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    ये दो संगठन 2019 में हुए थे बैन

    इन संगठनों में से जमात-ए-इस्लामी और जेकेएलएफ पर केंद्र सरकार ने 2019 में बैन लगा दिया था। इन हुर्रियत संगठनों के समय-समय पर आतंकी संगठनों से संबंध मिलते रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि आतंकवादी समूहों की फंडिंग की जांच में अलगाववादी नेताओं की कथित संलिप्तता का संकेत मिलता है। इन नेताओं में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के लोग भी शामिल हैं।

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