'मैं दबंग और जिद्दी, महबूबा जज्बातों में बह जाती', आखिर क्यों इल्तिजा अपनी मां के साथ एक घर में नहीं रहतीं?
Iltija Mufti Jammu Kashmir Chunav 2024: जम्मू-कश्मीर चुनाव 2024 के नजदीक आते ही राजनीतिक गर्माहट बढ़ती जा रही है। 90 विधानसभा सीटों पर तीन चरणों में होने वाले चुनावों की तैयारियों में सभी राजनीतिक दल पूरी ताकत लगा रहे हैं। इसी सियासी माहौल में पीडीपी (People's Democratic Party) नेता महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती भी चुनावी मैदान में उतर आई हैं।
इल्तिजा मुफ्ती ने दक्षिण कश्मीर के सिरीगुफवारा-बिजबिहाड़ा विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन जमा कराया है। इस नामांकन के साथ ही वे मुफ्ती परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं, जो इस सीट से चुनाव लड़ रही हैं। उनकी मां महबूबा मुफ्ती जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, और अब इल्तिजा अपनी खुद की पहचान बनाने के लिए चुनावी रण में उतरी हैं।

महबूबा और इल्तिजा की सियासी सोच में अंतर (Mehbooba and Iltija Mufti)
आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान इल्तिजा ने अपनी मां महबूबा मुफ्ती से अपने रिश्तों और विचारधारा के अंतर पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वे थोड़ी "दबंग" और "जिद्दी" स्वभाव की हैं, जबकि उनकी मां भावुक हो जाती हैं। इल्तिजा ने साफ किया कि वे इस समय अपनी मां के साथ नहीं रहतीं। इसका मुख्य कारण उनका राजनीति में अलग नजरिया है।
कश्मीरी मतदाताओं की सोच को समझना मुश्किल
जब इल्तिजा से कश्मीरी मतदाताओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कश्मीरी वोटर क्या सोचते हैं, यह समझना आसान नहीं है। यहां के लोग अपनी भावनाएं तब जाहिर करते हैं जब वे वोट डालने जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि लोग उन्हें मुफ्ती परिवार के अलावा भी पहचानते हैं।
इल्तिजा की राजनीतिक रणनीति (Iltija Political Strategy)
राजनीति में अपनी जगह बनाने को लेकर इल्तिजा ने कहा, "जब मैं प्रचार के लिए जाती हूं, तो लोग मुझे इल्तिजा के तौर पर जानते हैं, ना कि सिर्फ मुफ्ती परिवार के सदस्य के रूप में।" उन्होंने कहा कि वे दबंग टाइप की हैं और अपनी मां की जिद को अपनाकर राजनीति में उतरी हैं। इल्तिजा ने गांवों में जनता की समस्याओं पर ध्यान देते हुए कहा कि कई जगहों पर आज भी पानी और सड़कों की कमी है।
युवाओं के लिए एजेंडा और बेरोजगारी का मुद्दा
जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए अपने एजेंडा पर बात करते हुए इल्तिजा ने कहा कि पिछले कुछ सालों में यहां के लोगों को नौकरियों से निकाला गया है। उन्होंने बताया कि कई सरकारी कर्मचारियों को सिर्फ इसलिए बर्खास्त कर दिया गया क्योंकि उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ लिखा था। इल्तिजा ने यह भी चिंता जताई कि युवाओं में ड्रग्स की समस्या भी बढ़ती जा रही है।
'कश्मीर' के दिल में दर्द और दिल्ली की हार
इल्तिजा ने यह भी कहा कि कश्मीर में भले ही दुकानें खुली हैं और स्कूल चल रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हालात सामान्य हैं। लोगों के दिलों में दर्द है, और यह दिल्ली की सरकार की सबसे बड़ी हार है। उन्होंने इंजीनियर रशीद की जीत का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी जीत कश्मीरी लोगों की भावनाओं को दर्शाती है।
बीजेपी और गठबंधन सरकार
बीजेपी पर निशाना साधते हुए इल्तिजा ने कहा कि यहां खंडित जनादेश होगा और पीडीपी किंगमेकर की भूमिका में रहेगी, जबकि बीजेपी यहां किंगमेकर नहीं बन पाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि अभी यह तय नहीं है कि वे कांग्रेस या नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन करेंगी या नहीं, लेकिन जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं होगा।
रशीद को अभी बेल क्यों मिली?
इल्तिजा ने यह भी सवाल उठाया कि इंजीनियर रशीद को अभी बेल क्यों मिली? उन्होंने कहा कि लोगों के बीच चर्चा है कि इंजीनियर राशिद को अभी बेल क्यों मिली? बहुत अच्छा है कि उन्हें जमानत मिली है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं बल्कि उन सभी की रिहाई का मुद्दा है, जिनके परिवार जेलों में बंद हैं।
इल्तिजा मुफ्ती का राजनीति में आगमन और उनके बेबाक बयान यह दिखाते हैं कि वे अपनी खुद की पहचान बनाने के लिए तैयार हैं। उनके एजेंडे में युवाओं की समस्याएं, बेरोजगारी, और कश्मीर की असल चुनौतियों को उठाना शामिल है। उनका मानना है कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बदलाव जरूरी है और पीडीपी इस बदलाव में एक अहम भूमिका निभाएगी।












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