हैदरपोरा एनकाउंटर: आतंकी की पत्थर से जान लेने वाले लतीफ माग्रे ने कहा- बेटा नहीं था 'टेररिस्ट'
श्रीनगर, 17 नवंबर। एक समय आतंकवादी को पत्थर से मार गिराने वाले मोहम्मद लतीफ माग्रे ने पुलिस के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें उनके बेटे को आतंकवादी कहा जा रहा है। दरअसल, पुलिस का कहना है कि हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए चार संदिग्धों में से एक लतीफ माग्रे का बेटा आमिर माग्रे था, जो जम्मू-कश्मीर में एक 'हाइब्रिड' आतंकवादी था। लतीफ माग्रे ने पुलिस के इस दावे का खंडन करते हुए कहा, हम भारतीय है, मेरा बेटा आमिर निर्दोष था और श्रीनगर की एक दुकान पर मजदूर के रूप में काम करता था।

जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के एक दूरदराज के गांव में रहने वाले लोक इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारी लतीफ ने कहा कि पुलिस ने उनके बेटे का शव लौटाने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनका 24 वर्षीय बेटा किसी आतंकी गतिविधि में शामिल नहीं था, सोमवार रात मुठभेड़ में मारे जाने तक वह श्रीनगर में पिछले छह महीने से एक दुकान पर मामूली वेतन पर काम किया करता था। लतीफ को उनके इलाके में काउंटर विद्रोही के रूप में जाना जाता है।
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पत्थर से मारकर की आतंकवादी की हत्या
लतीफ ने दावा किया कि उन्होंने अतीत में सुरक्षा बलों के साथ कई आतंकवादियों को मार गिराया और 2005 में जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल एनएन वोहरा द्वारा उनकी बहादुरी के लिए एक पदक से भी सम्मानित किया गया था। उन्हें कई अन्य पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। लतीफ ने बताया, 'एक दिन मेरी कुछ उग्रवादियों से बहस हो गई और वे मुझे मारने आए। मैंने उनके साथ लड़ाई की और एक को तो सिर्फ पत्थर से मारकर मार डाला। वे मेरी तलाश में फिर आए, लेकिन मेरे ना मिलने पर बदले में उन्होंने मेरे चचेरे भाई को मार डाला।'
आतंकवादी के रूप में बेटे को किया 'ब्रांडेड'
लतीफ ने बताया कि उन्हें कई सालों तक उधमपुर में शरण लेने के लिए अपने रिश्तेदारों के साथ गांव से भागना पड़ा। उन्होंने कहा, 11 साल बाद में अपने घर वापस आया था, 'तब से मुझे सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। आईटीबीपी के कुछ 10 से 12 लोग संगलधन गांव में मेरे घर पर मेरी सुरक्षा कर रहे हैं।' उन्होंने मंगलवार को कहा कि वह यह जानकर स्तब्ध हैं कि उनके बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी गई है और उसे एक आतंकवादी के रूप में 'ब्रांडेड' कर दिया गया। उन्होंने कहा, 'मैं कुछ गांवों के सरपंचों और कुछ रिश्तेदारों के साथ श्रीनगर आया था, लेकिन वहां की पुलिस ने हमें बताया कि आमिर एक आतंकवादी था और उसे दफना दिया गया। मुझे उसका पहचान पत्र दिया गया और कहा गया कि उसका शरीर वापस नहीं दिया जा सकता।'
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