'जो 30 साल में नहीं हुआ, वो इस बार हुआ...', 15 अगस्त पर शादी की शहनाइयों से गूंजीं कश्मीर की वादियां
Wedding in jammu kashmir: मंगलवार को देशभर में आजादी की 77वीं वर्षगांठ का जश्न मनाया गया और दिल्ली में लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन बदलावों का जिक्र किया, जो उनके अभी तक के कार्यकाल में हुए।
लेकिन, सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला देश की राजधानी दिल्ली से दूर जम्मू कश्मीर में...जहां 30 साल में पहली बार 15 अगस्त के दिन वादियों में जमकर शादियों की शहनाई गूंजीं।

कश्मीर ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों ने 1990 में जब 15 अगस्त को एक काला दिवस करार दिया, तभी से घाटी में कोई भी परिवार अपने घर में 15 अगस्त के आस-पास शादी रखने का ख्याल भी दिल में नहीं लाता था। लेकिन, इस बार ऐसा नहीं था। तीन दशक में पहली बार 15 अगस्त के दौरान कश्मीर में शादियां हुईं, वलीमा की दावत का भी लुत्फ उठाया गया और दूसरे पारिवारिक समारोह भी पूरी आजादी के साथ मनाए गए।
'घाटी में अब पूरी तरह से शांति है'
जिन परिवारों में ये शादियां थीं, उन्होंने बताया कि उनके लिए 15 अगस्त का दिन वैसा ही सुरक्षित और सुकून भरा रहा, जैसे बाकी दिन होते हैं। सेंट्रल कश्मीर के बडगाम जिले में चारूरा इलाके के रहने वाले सज्जाद अहमद डार ने इस बारे में बात करते हुए कहा, 'घाटी में अब पूरी तरह से शांति है और इसीलिए हमने तय किया था कि मेरे चचेरे भाई की शादी का कार्यक्रम हम 14 और 15 अगस्त को रखेंगे। अल्लाह का शुक्र है कि सब कुछ बहुत ही इत्मिनान और आसानी से हो गया।'
सज्जाद के चचेरे भाई मोहम्मद अल्ताफ शेख की शादी चादूरा बडगाम की रहने वाली जवाहरा बेगम से हुई है। वहीं, सज्जाद अहमद डार के पिता ने बताया कि 15 अगस्त के दिन उनके इलाके में करीब 4 घरों में शादियां हुईं और सभी शांतिपूर्ण तरीके से हुईं। इनके अलावा बांदीपोरा के रहने वाले गुमान नबी शेख ने भी अपनी बेटी की शादी 15 अगस्त के दिन ही करने का फैसला किया।
'15 अगस्त को ही रखूंगा शादी, कुछ नहीं होगा'
गुमान नबी शेख ने बताया, '15 अगस्त को सरकारी छुट्टी होती है, सभी रिश्तेदार घर पर ही होते हैं, तो मैंने बेटी की शादी के लिए इसी तारीख को चुना। हालांकि मेरे कुछ रिश्तेदारों ने मुझसे कहा कि शादी किसी और दिन रखी जाए, लेकिन मैं जानता था कि कुछ नहीं होगा और सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से निबट जाएगा।'
'कश्मीर की नई हकीकत को लोगों ने स्वीकार लिया है'
इसके अलावा 15 अगस्त पर एक और बड़ा बदलाव दिखा और बड़ी संख्या में लोग अपनी छुट्टी बिताने के लिए ग्रामीण इलाकों मे भी गए। पहलगाम, दूधपथरी और गुलमर्ग में मंगलवार को रिजॉर्ट मेहमानों से फुल थे। अपने परिवार के साथ घूमने आए और कश्मीर में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद से रिटायर हुए मोहम्मद इकबाल ने बताया, 'लोगों के अंदर एक एहसास है कि सब कुछ ठीक है, आसान है। कश्मीर की नई हकीकत को लोगों ने बड़े पैमाने पर अब स्वीकार कर लिया है।'












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