जम्मू-कश्मीर के मेंढर में 9 POK नागरिकों को जारी किया निर्वासन नोटिस, एक शख्स पुलिस विभाग में कर रहा नौकरी
Jammu and Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के 9 व्यक्तियों को निर्वासन नोटिस जारी किए गए हैं। इस नोटिस के बाद विवाद पैदा हो गया है क्योंकि वे जम्मू और कश्मीर के निवासियों के रूप में अपनी स्थिति का दावा करते हैं उन्होंने अपनी निर्वासन को चुनौती दी है।
इनमें कांस्टेबल इफ्तिखार अली भी शामिल हैं, जिन्होंने 27 वर्षों तक पुलिस विभाग में सेवा की है और वर्तमान समय में माता वैष्णो देवी मंदिर के कटरा बेस कैंप में तैनात हैं।

शख्स के पास है सारे जरूरी दस्तावेज
निर्वासन नोटिस में 30 अप्रैल तक पाकिस्तान वापस जाने का आदेश दिया गया है। हालांकि ये व्यक्ति दावा करते हैं कि उनके पास जम्मू और कश्मीर में अपनी रेजिडेंसी साबित करने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज हैं। मेंधार के निवासी सफीद चौधरी ने बताया कि ये परिवार 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद से साल्वा गांव में रह रहे हैं और उनके पास भूमि रिकॉर्ड, मतदाता कार्ड और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज हैं।
सफीद चौधरी बोले- गंभीर अन्याय है
सफीद चौधरी ने जम्मू और कश्मीर के लंबे समय से रहने वालों को निर्वासित करने की निष्पक्षता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा "इन परिवारों के साथ यह एक गंभीर अन्याय है," उन्होंने सरकार से निर्वासन के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
इफ्तिखार अली बोले- मेरा परिवार कहां जाएगा
वहीं इफ्तिखार अली ने भावुक होकर सवाल किया कि निर्वासित होने पर उनका परिवार कहां जाएगा, निर्वासित होने के बाद उन्हें PoK में किसी से भी संबंध ना होने की बात कही।
परिवार को हिरासत में लिया गया
अली के परिवार को मेंढ़र से लाने के बाद जम्मू के बेलिचरान पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने निर्वासन प्रक्रिया को रोकने के लिए कानूनी हस्तक्षेप मांगा है। अली ने कहा "मैं अपने परिवार के सामने आ रही स्थिति के कारण अदालत गया।" अदालत ने तब से निर्वासन नोटिस पर रोक लगा दी है।












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