गिलानी की मौत के बाद मसरत आलम बना हुर्रियत का नया अध्यक्ष, जानिए कौन है?
नई दिल्ली, सितंबर 08। कश्मीर पर बुरी नजर डालकर बैठा पाकिस्तान एकबार फिर से बड़े पैमाने पर घाटी में दखल देने की कोशिश कर रहा रहा है। NDTV की खबर के मुताबिक, सूत्रों ने बताया है कि अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद पाकिस्तान ने कश्मीर में दखल देने की अपनी नापाक हरकत को फिर से शुरू कर दिया है और इसका ताजा उदाहरण है पाकिस्तानी समर्थक अलगाववादी नेता मसरत आलम भट को ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का नया अध्यक्ष बनाया जाना। आपको बता दें कि अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद मसरत आलम को हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
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2015 से तिहाड़ जेल में बंद है मसरत आलम
आपको बता दें कि मसरत आलम हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े का वो चेहरा है, जो अपने पाकिस्तान परस्त इरादों के लिए जाना जाता है। सैयद अली शाह गिलानी के अध्यक्ष रहते हुए मसरत को कई बार घाटी में पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करते हुए देखा जा चुका है। हालांकि मसरत फिलहाल 2015 से तिहाड़ जेल में बंद है। उसे सैयद अली शाह गिलानी का सबसे करीबी माना जाता था।

जुमे के दिन माहौल खराब कर सकते हैं कट्टरपंथी
रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया है कि मसरत आलम के हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का अध्यक्ष बनने से पाकिस्तान ने अपने एजेंडे को फिर से शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने बताया है कि कश्मीर में आने वाले दिनों के अंदर फिर से विरोध प्रदर्शन, हिसंक घटनाएं या पत्थरबाजी होने की उम्मीद है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि शुक्रवार को घाटी में कट्टरपंथी तत्व कुछ हिंसा कर सकते हैं। हालांकि जम्मू कश्मीर पुलिस का कहना है कि हमारे इंतजाम पूरे हैं।

'गिलानी की मौत के बाद संभाले रखा है स्थिति को'
जम्मू कश्मीर पुलिस का कहना है कि सैयद अली शाह गिलानी के इंतकाल के बाद हमने घाटी में स्थिति को संभाले रखा है, लेकिन इस बात की आशंका पूरी है कि मसरत आलम के हुर्रियत का अध्यक्ष बनने के बाद कुछ कट्टरपंथी तत्व परेशानी पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं। पुलिस के एक सीनियर ऑफिसर ने बताया है कि भले ही अभी मसरत आलम जेल में है, लेकिन अफगानिस्तान फैक्टर पाकिस्तान के लिए बूस्टर डोज के रूप में काम करेगा।

कौन है मसरत आलम?
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मसरत आलम पहले एक आतंकवादी था, लेकिन 1996 में वो अलगाववादी राजनीति में आ गया। इससे पहले वो पाकिस्तान समर्थक आतंकी संगठन के कमांडरों में से एक था। मसरत को कई बार गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन हर बार वो जेल से बाहर आ गया।
2003 में जब हुर्रियत के भाग हुए तो मसरत ने कट्टरपंथी धड़े को चुना, जिसका नेतृत्व सैयद अली शाह गिलानी ने किया। मसरत आलम को हुर्रियत कांफ्रेंस का महासचिव बनाया गया था जब उसके कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। अब मसरत आलम 2015 से जेल में है।












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