आखिर क्यों करना पड़ा भाजपा को राजस्थान विधानसभा में हंगामा, सीएम गहलोत ने बताई असली वजह
जयपुर, 20 सितंबर। राजस्थान में विधानसभा सत्र का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। भाजपा ने सत्रावसान नहीं करके सीधे सत्र बुलाने पर आपत्ति जताते हुए सदन के बाहर और भीतर हंगामा किया। भाजपा के विधायकों ने इसे लेकर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के चेंबर में भी धरना दिया और सदन की कार्यवाही के दौरान वेल में आकर नारेबाजी की। सरकार द्वारा सत्रावसान नहीं कर सीधे सत्र बुलाने से राजभवन के भी नाखुश होने की खबर आ रही है। विधानसभा सत्र से पहले भी भाजपा के विधायकों ने इस तरह के संकेत दिए थे। पार्टी ने अब इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपना लिया है।


सीपी जोशी बोले सरकार और राजभवन का मसला
राजस्थान सरकार द्वारा विधानसभा सत्र बुलाने से पहले सत्रावसान नहीं करने के मामले पर विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष की कोई भूमिका नहीं है। यह सरकार और राजभवन के बीच का मामला है। जोशी ने कहा कि सत्र बुलाना या सत्रावसान करना राजभवन और राज्य सरकार पर निर्भर करता है।

सीएम गहलोत बोले इनका बस चले तो सरकार गिरा दें
राजस्थान विधानसभा के सत्रावसान को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि हमने जानबूझकर विधान सभा की बैठक को निरंतर रखा है। हमने इनकी चलने नहीं दी वरना इनका बस चले तो यह कभी भी सरकार गिरा दे। सीएम गहलोत ने कहा कि विधानसभा की निरंतर बैठक जारी रखने का नुकसान हमें भी हुआ है। हम सदन में कई अध्यादेश लाते। लेकिन नहीं ला पाए। बीजेपी धरना देकर नाटक कर रही है। भाजपा प्रदेशों में सरकार गिराने का काम कर रही है। अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र के बाद भाजपा की नजर कई जगह पर है। झारखंड में भी ऐसे प्रयास किए गए।

हंगामे और नारेबाजी के बीच सदन की कार्रवाई स्थगित
विधानसभा में सदन की कार्रवाई शुरू होते ही बीजेपी के विधायकों ने हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी। वेल में आकर विधायकों ने प्रश्नों का कोटा पूरे नहीं होने को लेकर नारेबाजी की। सदन में हंगामा होने के 8 मिनट बाद ही विधानसभा अध्यक्ष ने 5 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। सदन की कार्रवाई शुरू होने पर भाजपा के विधायक फिर हंगामा और नारेबाजी करने लगे। इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष ने राज्यपाल को लौटाए दो बिलों की डिटेल सदन में रखी सदन में चार और बिल रखने के बाद कार्रवाई को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया।

2020 में राज्यपाल ने 3 बार लौटाया था सत्र बुलाने का प्रस्ताव
सीएम गहलोत ने काशी जुलाई 2020 में विधानसभा सत्र बुलाने के सरकार के प्रस्ताव को राज्यपाल ने तीन बार लौटा दिया था। पिछली बार राज्यपाल को इन्होंने मजबूर कर दिया। सरकार की कैबिनेट विधानसभा बुलाने के लिए आग्रह करती है तो राज्यपाल को विधानसभा का सत्र बुलाना पड़ता है। तब राज्यपाल के खिलाफ इतने आलेख लिखे गए कि जितना इतिहास में कभी नहीं हुआ।

नेता प्रतिपक्ष बोले विधायकों के अधिकारों का हनन
राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने सरकार की सत्रावसान नहीं करके सत्र बुलाने की परंपराओं को लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए गलत बताया है। कटारिया ने कहा कि नए सिरे से सत्र बुलाकर विधायकों के प्रश्न पूछने का हनन किया जा रहा है। राजभवन को किनारे कर दिया गया है। ऐसी परंपरा बना ली गई है।












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