धार्मिक स्थलों की वीसी में ऐसा क्या बोले पुष्कर के पुजारी जो मुस्कुरा उठे अशोक गहलोत, जानिए पूरा वाकया

जयपुर, 3 सितम्बर। राजस्थान के खाटूश्यामजी मंदिर में हादसे के बाद गहलोत सरकार एक्टिव मोड में है। सीएम अशोक गहलोत ने शनिवार को वीसी के जरिए प्रदेश के सभी धार्मिक मेलों की व्यवस्थाओं का फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री आवास पर बुलाई गई बैठक में रोचक वाकया हुआ। वीसी के जरिए हुई बैठक में पुष्कर मेले को लेकर चर्चा चल रही थी। मंदिर प्रमुख पुजारी ने इस दौरान रोचक टिप्पणी की। पुजारी ने कहा-गहलोत का मतलब है सौ तालों की एक चाबी। मेले के लिए कलेक्टर को अलग से बजट दिया जाए। ताकि बड़े अफसरों पर बार-बार निर्भर नहीं रहना पड़े। पुजारी की रोचक टिप्पणी सुनकर सीएम अशोक गहलोत भी मुस्करा दिए। सीएम गहलोत ने सीएमआर से वीसी के माध्यम से प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों पर आयोजन एवं मेलों के दौरान सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए संबंधित जिला अधिकारियों, मेला आयोजन ट्रस्टों के प्रतिनिधियों एवं चिन्हित धार्मिक स्थलों के धर्म गुरुओं के साथ बैठक की।

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मेलों में महिलाएं और बुजुर्ग हो वीआईपी

बैठक में मौजूद उद्योग मंत्री शंकुतला रावत ने कहा कि अधिकारी धन बरतने में कंजूसी करते हैं। सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है। लेकिन इसके बावजूद मेला होने वाले स्थान पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखा गया है। मंत्री ने कहा कि बहुत लोगों से बात हुई है। जिनका कहना है कि वह खुद धार्मिक मेलों के लिए धन खर्च करने के लिए तैयार है। लेकिन समन्वय के अभाव में जमीनी धरातल पर काम नहीं हो पाता है। रावत ने कहा कि अधिकारियों को मेला आयोजन होने से पहले बैठक कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देवस्थान की डीपीआर बनाने के लिए हमने अच्छा सा प्रोजेक्ट बनाया है। हम सभी जगह अच्छी व्यवस्थाएं कराने का प्रयास कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि वीआईपी के लिए हमने ऐसी व्यवस्था की है कि सिर्फ बुजुर्ग ही वीआईपी होंगे। सीएम गहलोत ने कहा कि अच्छा किया आपने। महिलाओं को भी वीआईपी कर दीजिए। मंत्री शकुंतला रावत ने जवाब में कहा कि बिलकुल साहब कर देंगे।

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    मेलों में आने वाले श्रद्धालु तारीफ करें

    सीएम गहलोत ने कहा कि धर्म गुरुओं ने सुझाव दिए है कि छोटे मंदिरों के लिए मीटिंग का सुझाव अहम है। हम लोग मेला प्राधिकरण का काम तमाम मंदिर के मैनेजमेंट के साथ लगातर संपर्क करें। उनकी क्या समस्याएं है। सरकार की तरफ से उनकी क्या अपेक्षा है। मंहतों की और पुजारियों की। वह कैसे पूरी हो। सीएम गहलोत ने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार का दखल कम से कम हो। परंतु मैनेजमेंट की व्यवस्थाएं इस प्रकार हो कि दूर से आने वाले श्रद्धालु राजस्थान की तारीफ कर सके। उनको लगे कि राजस्थान में गए तो हमें व्यवस्थित चीजों का लाभ मिला। अगर लोग धक्के खाते रहे। असुविधाएं हो। पीने का पानी का पता नहीं हो। तो बहुत तकलीफ होती है। हम चाहेंगे राजस्थान धार्मिक डेस्टिनेसन बने।

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