10 साल में टॉप 5 राज्यों में शामिल होगा राजस्थान, जानिए किस मामले में तोड़ देगा चीन की भी मोनोपॉली

जयपुर। नए साल 2021 के आगमन पर राजस्थान के लोगों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश प्रगति के पथ पर है। सब कुछ योजनानुसार होता रहा तो आगामी दस साल में राजस्थान देश के टॉप पांच राज्यों ने शुमार हो जाएगा। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट का विश्लेषण बताता है कि प्रदेश के भूगर्भ, जल, आकाश और वायू में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इन सबके विशेष प्रोजेक्ट भी राजस्थान में प्रगति पर है।

मोनाजाइट के मामले में चीन को मात

मोनाजाइट के मामले में चीन को मात

राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर के भूगर्भ में दुनिया का सबसे दुर्लभ खनिज मोनाजाइट का भंडार है। इसमें यूरेनियम-थोरियम जैसे 16 दुर्लभ अर्थ एलिमेंट भी हैं। वर्तमान में मोनाजाइट का 95 फीसदी उत्पादन चीन करता है, मगर वो दिन दूर नहीं जब इस मामले में राजस्थान की मोनोपॉली तोड़ देगा।

 उदयपुर की खदानें एक हजार फीट गहरी

उदयपुर की खदानें एक हजार फीट गहरी

पूरे भारत में सीसे और जस्ते की खदानें सिर्फ राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में है। अकेला मेवाड़ हर साल नौ हजार करोड़ की रॉयल्टी देता है। राजस्थान के राजसमंद की खदानों से चांदी का रिकॉर्ड खनन हो रहा है। अगले दस साल में यह आंकड़ा 27 हजार करोड़ तक होने का अनुमान है। उदयपुर हिंदुस्तान जिंक की चांदी की खदान में एक हजार फीट नीचे खुदाई होती है। बाड़मेर में रागेश्वरी डीप गैस प्लांट अगले छह माह में शुरू होने की उम्मीद।

 बीकानेर के लखासर में सोलर पार्क

बीकानेर के लखासर में सोलर पार्क

16 साल पहले बीकानेर जिले के लखासर में बिजली नहीं थी, मगर यहां की बंजर जमीन भी रोशन हो रही है। यहां का सबसे बड़ा सोलर पार्क तैयार है। अब 92 सौ मेगावाट क्षमता हो जाएगी। मई 2021 तक सौर ऊर्जा का नया केंद्र बीकानेर का लखासर होगा। यहां 48 सौ मेगावाट की इकाइयां लग रही हैं। राजस्थान में पहली बार स्वदेशी तेजस तैनात होंगे।

राजस्थान में 8000 मेगावाट पवन ऊर्जा का उत्पादन

राजस्थान में 8000 मेगावाट पवन ऊर्जा का उत्पादन

पवन ऊर्जा चक्कियों से अभी राजस्थान में 4913 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। 2025 तक राजस्थान में 8000 मेगावाट पवन ऊर्जा उत्पादन की संभावना है। हमारी क्षमता 1.27 लाख मेगावाट पवन ऊर्जा बनाने की है।

झालावाड़ में बनी देश की पहली वाटर टनल

झालावाड़ में बनी देश की पहली वाटर टनल

देश की पहली वाटर टनल राजस्थान के झालावाड़ में बनाई गई है। 9 किलोमीटर लंबी इस टनल को बनाने में 300 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इससे 637 गांवों तक पानी पहुंचेगा। 10 जिलों में बीसलपुर, ईसरदा और चंबल पर विशेष प्रोजेक्ट चल रहे हैं। बीसलपुर प्रोजेक्ट अभी से 2014 तक की आबादी के लिए तैयार। चंबल से बुझेगी करौली, भरतपुर, सवाई माधोपुर और धौलपुर की प्यास। ईसरदा से दौसा तक पानी की आपूर्ति की जाएगी।

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