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क्या राजस्थान दोहराएगा 66 साल पुराना इतिहास, जब मोहनलाल सुखाड़िया ने किया था जयनारायण व्यास का तख्तापलट

जयपुर। इस समय राजस्थान कांग्रेस दो हिस्सों में बंट चुकी है। राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट आमने-सामने हैं। दोनों ने अपने-अपने गुट के विधायकों की बाड़ाबंदी कर रखी है और सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। 14 जुलाई 2020 को लगातार दूसरे दिन विधायक दल की बैठक हुई है। खबर है कि बैठक में कांग्रेस ने एक्शन लेते हुए सचिन को उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया है। उनके साथ ही समर्थक मंत्री विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को भी हटाया गया है।

Rajasthan Political crisis Will repeat 66 years old history

देखने वाली बात यह है कि राजस्थान में 66 साल पुराना इति​हास दोहराया जाएगा या गहलोत सरकार पर आया यह राजनीतिक संकट टल जाएगा। यह पहला मौका नहीं है जब राजस्थान की कांग्रेस सरकार का तख्तापलट की कोशिशें सामने आई हैं। इससे पहले 1954 में ऐसा हो चुका है। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास को अपनी कुर्सी बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी थी, मगर वे सफल नहीं हो पाए थे।

66 साल पहले हुआ यूं था कि साल 1952 में लोकसभा ​के साथ विधानसभा चुनाव हुए थे। राजस्थान में जयनारायण व्यास के नेतृत्व में कांग्रेस ने 160 में से 82 सीटें जीती। खास बात यह थी कि कांग्रेस ने बहुमत तो पा लिया था, मगर खुद जयनारायण व्यास जोधपुर बी और जालौर ए सीट से विधानसभा चुनाव हार गए थे। तब अजमेर जिले की किशनगढ़ सीट से जीतने वाले चांदमल मेहता ने व्यास के लिए अपनी सीट खाली की और उपचुनाव में जीत दर्ज कर एक नवंबर 1952 को जयनारायण व्यास राजस्थान के मुख्यमंत्री बने।

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    जयनारायण व्यास राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने के दो साल तक सब कुछ ठीक चलता रहा, मगर फिर कांग्रेस में फूट हो गई। 38 साल के कांग्रेसी नेता मोहनलाल सुखाड़िया ने बगावत कर दी। हालात अशोक गहलोत व सचिन पायलट जैसे हो गए थे। अब आलाकमान ने गहलोत सरकार बचाने के लिए दिल्ली से रणदीप सुरजेवाला, अजय माकन और अविनाश पांडे को जयपुर भेजा। ठीक इसी तरह उस वक्त प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने व्यास सरकार को बचाने की कोशिश की और कांग्रेस ने पार्टी के तत्कालीन महासचिव बलवंत राय मेहता को जयपुर भेजा। व्यास सरकार पर आया सियासी संकट नहीं थमा तो विधायकों से मतदान करवाकर फैसला किया गया। परिणाम यह रहा ​कि विधायकों के मतदान में जयनारायण व्यास की सरकार गिर गई और मोहनलाल सुखाड़िया मुख्यमंत्री चुने गए। फिर व्यास ने एक तांगे में सामान भरवाया और मुख्यमंत्री आवास खाली कर दिया था।

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