राजस्थान : करंट ने छीने दोनों हाथ, कांस्टेबल-फौजी ने 30 दिन में यूं जुटाए 27 लाख, अब केरल में हाथ होंगे ट्रांसप्लांट

चूरू। राजस्थान में दोनों हाथ गंवा चुके प्रेमाराम मुंडेल के लिए कांस्टेबल और फौजी की यह जोड़ी किसी मसीहा से कम नहीं। दोनों ने मिलकर सोशल मीडिया का ऐसा इस्तेमाल किया कि देखते ही देखते 27 लाख रुपए एकत्रित हो गए। ये रुपए प्रेमाराम के हाथ ट्रांसप्लांट करवाने में काम लिए जाएंगे। सब कुछ ठीक रहा तो नए साल 2020 में प्रेमाराम अपने हाथों से काम करता नजर आएगा।

अजमेर के कोटड़ी का रहने वाला है प्रेमाराम

अजमेर के कोटड़ी का रहने वाला है प्रेमाराम

बता दें कि मूलरूप से राजस्थान के अजमेर जिले के रूपनगढ़ के गांव कोटड़ी निवासी प्रेमाराम की जिंदगी में वर्ष 2008 तक सब कुछ सामान्य था। प्रेमाराम अपने चाचा के साथ खेत में काम कर रहा था। तभी करंट की चपेट में आ गया। उस हादसे में प्रेमाराम की जान तो बच गई, मगर दोनों हाथ गंवाने पड़े। राजस्थान में खूब इलाज करवाया, मगर हाथ ट्रांसप्लांट के लिए ना उचित अस्पताल मिला और ना ही रुपयों की व्यवस्था हो पाई।

 केरल में ट्रांसप्लांट होंगे प्रेमाराम के हाथ

केरल में ट्रांसप्लांट होंगे प्रेमाराम के हाथ

फिर पता चला कि केरल के कोची स्थित अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिचर्स सेंटर में प्रेमाराम के हाथ ट्रांसप्लांट हो सकते हैं, जो न केवल हुबहू हमारे सामान्य हाथों जैसे दिखते हैं बल्कि उसी काम भी करते हैं। ये हाथ लगवाने का खर्च करीब 34 लाख रुपए है। फिर प्रेमाराम और उसके परिवार ने पाई-पाई जोड़नी शुरू की। सात लाख रुपए जोड़ पाए। शेष 27 लाख रुपए जोड़ पाना प्रेमाराम के परिवार के लिए संभव नहीं हो पाया।

30 दिन पहले आपणी पाठशाला चूरू आए

प्रेमाराम के चचेरे भाई फौजी सोराम मुंडेल ने भाई की मदद की ठानी, मगर राशि बड़ी थी। इसलिए सोराम मुंडेल के लिए अकेले जुटा पाना मुश्किल था। ऐसे में फौजी सोराम मुंडेल प्रेमाराम को लेकर करीब 30 दिन पहले चूरू स्थित आपणी पाठशाला पहुंचा। आपणी पाठशाला चूरू पुलिस के कांस्टेबल धर्मवीर जाखड़, दिनेश सैनी व उनकी टीम ओर से झुग्गी झोपड़ी के बच्चों के लिए संचालित स्कूल है। आपणी पाठशाला की टीम जरूरतमंद लोगों की सोशल मीडिया के जरिए मदद करवाने का काम भी कर रही है।

 एफबी पर लाइव होकर लगाई मदद की गुहार

एफबी पर लाइव होकर लगाई मदद की गुहार

प्रेमाराम जब चूरू की आपणी पाठशाला पहुंचा तो यहां की टीम ने अपने फेसबुक पेज पर लाइव होकर उसकी पीड़ा बयां की और मदद की गुहार लगाई। लोगों को उसकी पूरी कहानी बताकर हाथ ट्रांसप्लांट के लिए 34 लाख की दरकार बताई। एफबी के अलावा वाट्सअप ग्रुपों में भी प्रेमाराम की समस्या शेयर की गई। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सहायता कोष से भी एक लाख की मदद की गई।

 अकेले श्रवण रेवाड़ ने दिलवाए 15 लाख

अकेले श्रवण रेवाड़ ने दिलवाए 15 लाख

फौजी सोराम मुंडेल और आपणी पाठशाला की ओर से लगातार सोशल मीडिया पर मुहिम चलाई गई। नतीजा यह रहा कि न केवल चूरू, सीकर, अजमेर, नागौर समेत प्रदेश की कई गांव-ढाणियों के लोग बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीय कामगार भी प्रेमाराम की मदद को आगे आए और उसके खाते में रुपए डलवाने शुरू किए। सऊदी अरब में रह रहे नागौर जिले के डीडवाना निवासी श्रवण रेवाड़ ने खुद, रिश्तेदारों, दोस्तों के माध्यम से प्रेमाराम के खाते में 15 लाख रुपए जमा करवाए।

2 जनवरी 2020 को केरल जाएगा प्रेमाराम

2 जनवरी 2020 को केरल जाएगा प्रेमाराम

फौजी और कांस्टेबल की मुहिम रंग लाई। महीनेभर में ही प्रेमाराम के खाते में 27 लाख रुपए जमा हो गए। शेष राशि खुद के परिवार ने जोड़ रखी है। 34 लाख रुपए का जुगाड़ होने के बाद प्रेमाराम ने कोची स्थित अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिचर्स सेंटर के चिकित्सकों से अपॉइंटमेंट लिया है, जो 3 जनवरी का मिला है। प्रेमाराम अपने परिवार के साथ दो जनवरी को फ्लाइट से कोची जाएगा। उम्मीद है कि उसके हाथ ट्रांसप्लांट होने का काम जल्द ही शुरू होगा। बताया जाता है कि कोची का यह सेंटर अब तक 6 लोगों के हाथों का ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक कर चुका है।

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