Rajasthan News: बीजेपी मौजूदा 15 सांसदों के काटेगी टिकट, जानिए किन नेताओं की होगी छुट्टी
Rajasthan News: देश में लोकसभा चुनाव को लेकर बिगुल बज चुका है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में भाजपा में राजस्थान की 25 ही सीटों पर जीत हांसिल की है। अब चर्चा है कि पार्टी ज्यादातर सीटों पर लोकसभा चुनाव के प्रत्याशियों के चेहरे बदल सकती है। राजनीति के जानकारों का दावा है कि पार्टी प्रदेश की 25 में से 15 सीटों पर लोकसभा चुनाव में नए चेहरे उतार सकती है। जानकार कहते हैं कि इसके पीछे कई वजह है। लेकिन अहम बात यह है कि नरेंद्र मोदी जिस तरह नेतृत्व परिवर्तन में जुटे हुए हैं। उसका असर राजस्थान की लोकसभा सीटों पर दिखेगा। वहीं राजस्थान में लोकसभा सांसद पिछले दस सालों में कोई बेहतर परफॉर्मेंस नहीं दे पाए हैं। इससे जनता के बीच पार्टी की छवि पर असर दिखेगा। पार्टी राजस्थान में हर हाल में 25 सीटें जीतने की कवायद कर रही है। यही वजह है कि प्रदेश में ज्यादातर सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।
वसुंधरा फैक्टर दिखाएगा असर
राजस्थान में मौजूदा 25 सांसदों में से ज्यादातर नेताओं के नाम साल 2014 में वसुंधरा ने भाजपा को दिए थे। प्रदेश में साल 2019 में पार्टी ने इन नेताओं को एक बार फिर मौका देकर रिपीट किया। दो टर्म सांसद रहने के बाद अब प्रदेश के सियासी समीकरण बदल गए हैं। राजस्थान में हाल ही में विधानसभा चुनाव में भाजपा जीत हांसिल कर सरकार में हैं। पार्टी ने भजन लाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अभी सरकार में झालावाड़ से विधायक की भूमिका में काम कर रही है। ऐसे में राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन का असर लोकसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण में भी देखने को मिलेगा।

पीएम मोदी की बदलाव की नीति
गुजरात और राजस्थान सहित अन्य राज्यों में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने जिस तरह से सरकार में बदलाव किए हैं। वह बड़ा मैसेज देने वाला है। राजस्थान में पार्टी ने पूरा मंत्रिमंडल बदल दिया है। इसके बाद लोकसभा चुनाव को लेकर कयासों का बाजार गर्म हो गया है। चर्चा है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी नए चेहरों पर दांव खेल सकती है। राजनीति के जानकार कहते हैं कि पीएम मोदी के नेतृत्व परिवर्तन के प्रयोग को सराहा जा रहा है। इससे जनता के बीच पार्टी को लेकर सकारात्मक संदेश जा रहा है। यह भी बड़ी वजह है कि पार्टी आम चुनाव में नए चेहरों को सामने लाएगी।
विधानसभा चुनाव में 11 लोकसभा सीट पर कांग्रेस आगे
राजस्थान में विधानसभा चुनाव दौरान भाजपा और कांग्रेस के वोटिंग पर्सेंटेज में महीन अंतर रहा है। विधानसभा चुनाव के मतदान का आंकड़ा देखे तो कांग्रेस राजस्थान में 11 लोकसभा सीटों पर आगे रही है। जो भाजपा की चिंता बढ़ाने वाला है। पार्टी राजस्थान में हर हाल में 25 सीटों पर फतेह चाहती है। उधर प्रदेश में कांग्रेस भी आत्मविश्वास से लबरेज दिख रही है। प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और टोंक से विधायक सचिन पायलट भी लोकसभा चुनाव में नए चेहरों को आगे लाने की बात कह रहे हैं। ऐसे में भाजपा राजस्थान की सीटों को लेकर ज्यादा गंभीर नजर आ रही है।
पूर्वी राजस्थान कर रहा बैचेन
लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा पूर्वी राजस्थान से बहुत ज्यादा आशंकित है। ईआरसीपी और किरोड़ी लाल मीणा को उचित नेतृत्व नहीं दिए जाने से इस इलाके में पार्टी को लेकर नाराजगी है। हाल ही में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में ईआरसीपी को लेकर एक एमओयू साइन किया है। इसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई। माना जा रहा है लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। चर्चा है कि यह एमओयू उसी का नतीजा है। वहीं पूर्वी राजस्थान में बड़ी संख्या में कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के समर्थक हैं। जो उनकी वजह से भाजपा से जुड़े हुए हैं। जानकार कहते हैं कि किरोड़ी लाल मीणा को सरकार में उचित पद नहीं दिए जाने से उनमें नाराजगी है। ऐसे में पार्टी के सामने लोकसभा चुनाव बड़ी चुनौतियां है। अब माना जा रहा है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए पार्टी नए चेहरों को साधेगी।
जातीय समीकरणों की चुनौती
राजस्थान में लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण भी भाजपा के लिए चुनौती बनकर उभरेंगे। विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश की जातीय गणित अलग थी। इस दौरान गुर्जरों में सचिन पायलट को लेकर कांग्रेस से नाराजगी का भाजपा को फायदा मिला था। लेकिन अब जब लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में गुर्जरों का रुख अहम होगा। वहीं जाट समुदाय में भी सरकार में उचित नेतृत्व नहीं मिल पाने से नाराजगी है। मीणा खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। पार्टी के सामने इन जातियों को साधना जरूरी होगा। जातीय समीकरण भी लोकसभा चुनाव के दौरान पूरा असर दिखाएंगे। राजनीति के जानकार बताते हैं कि विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस से नाराज सभी जातियां भाजपा के पक्ष में आ गई थी। लेकिन अब जब राजस्थान में भाजपा की सरकार बन गई है तो इनकी नाराजगी भाजपा से भी बढ़ी है।












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