Umesh Mishra DGP : राजस्थान डीजीपी उमेश मिश्रा का दावा, रेप के 41 फीसदी केस झूठे
वर्ष 2022 में झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों के विरुद्ध कार्यवाई में पिछले वर्ष की तुलना में कुल 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पेंडिंग मामलों का राष्ट्रीय औसत 30 प्रतिशत है। जबकि राजस्थान में केवल 12 प्रतिशत है।

राजस्थान पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा ने दुष्कर्म के मामलों में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि राज्य में दर्ज बलात्कार के 41 प्रतिशत मामले झूठे हैं। डीजीपी उमेश मिश्रा सोमवार को पुलिस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राजस्थान में दर्ज कुल बलात्कार के मामलों में से 41 प्रतिशत झूठे पाए जाते हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर झूठे मामलों का प्रतिशत केवल 8 है।
डीजीपी ने यह भी कहा कि यह गलत धारणा है कि रेप के मामलों में राजस्थान भारत में पहले स्थान पर है जबकि हकीकत यह है कि रेप केस में मध्य प्रदेश पहले व राजस्थान दूसरे स्थान पर है। डीजीपी ने दावा किया कि गलत धारणा के पीछे का कारण यह है कि राजस्थान पुलिस ऐसे हर मामले को दर्ज करती है। मध्य प्रदेश में बलात्कार के मामलों की कम संख्या का कारण प्राथमिकी दर्ज करने में विफलता और अपराध की अपेक्षाकृत कम मात्रा नहीं है।
डीजीपी मिश्रा ने यह भी कहा कि अन्य राज्य केस को गंभीरता से नहीं लेते हैं। वे तो रेप केस की जांच भी सामान्य शिकायत की तरह से करते हैं। कई बार इसका फायदा अपराधियों को मिल जाता है और कई अहम सबूतों के नष्ट होने का खतरा रहता है। राजस्थान डीजीपी मिश्रा ने कहा कि पुलिस को स्पष्ट निर्देश है कि रेप का कोई भी मामला दर्ज करने में देरी नहीं करें। अगर कोई झूठा केस दर्ज करवाता है तो केस दर्ज करवाने वाले के खिलाफ कार्रवाई करें।
वर्ष 2022 में झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों के विरुद्ध कार्यवाई में पिछले वर्ष की तुलना में कुल 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पेंडिंग मामलों का राष्ट्रीय औसत 30 प्रतिशत है। जबकि राजस्थान में केवल 12 प्रतिशत है। दोषियों का सजा दिलाने का राष्ट्रीय औसत 28 प्रतिशत है। इस मामले में राजस्थान का प्रतिशत 47.9 प्रतिशत है।
डीजीपी मिश्रा ने कहा कि साल 2022 राजस्थान पुलिस के लिए कई मायनों में अच्छा रहा। महिलाओं पर अत्याचार के मामलों को सुलझाने में सफलता मिली है। 2018 में इन मामलों के निस्तारण में 211 दिन लगते थे जबकि अब 69 दिनों में निस्तारण हो रहा है। डीजीपी मिश्रा ने कहा कि पॉक्सो एक्ट के मामले में भी पुलिस त्वरित कार्रवाई कर रही है। इसी का नतीजा है कि पिछले 4 साल में ऐसे 12 मामलों में फांसी की सजा और 466 को उम्रकैद या 20 साल की कठोर सजा सुनाई गई है।












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