राजस्थान: आरएसएस के विरुद्ध जाकर भाजपा उलझी जातीय गणित में, जानिए संघ का एजेंडा कैसे कमजोर कर रही बीजेपी
राजस्थान में विधासभा चुनाव से पहले बढ़ती जातीय पंचायतों की गणित से संघ में बैचेनी बढ़ गई है। विपक्ष आरएसएस के हिंदुत्व एजेंडे को कमजोर करना चाहता है। भाजपा इस जातीय तोड़फोड़ में उलझती नजर आ रही है।

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले जातीय पंचायतों की गणित तेज हो गई है। हाल ही में प्रदेश के जाट और ब्राह्मण समुदाय ने जातीय पंचायत कर मुख्यमंत्री पद की मांग कर दी है। इन जातीय पंचायतों का असर सीधे तौर पर बीजेपी और संघ की विचारधारा पर दिखाई दे रहा है। आरएसएस ने देश में हिंदुत्व के एजेंडे को मजबूत कर भाजपा को मजबूती दी है। लेकिन राजस्थान में बीजेपी जातीय तोड़ फोड़ की गणित में उलझती दिखाई दे रही है। राजनीति के जानकारों की मानें तो संघ के एजेंडे के खिलाफ जाकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित कई नेताओं ने जातीय पंचायतों में पहुंचकर बयानबाजी की है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि इससे संघ में पार्टी नेताओं के खिलाफ नाराजगी और चिंता बढ़ी है। वहीं सियासी गलियारों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। प्रदेश में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में बीजेपी का हिंदुत्व के एजेंडे पर भरोसा कमजोर हुआ है। यह भी वजह है कि बीजेपी अब प्रदेश में जातीय पंचायतों का सहारा लेना चाह रही है। जिससे आरएसएस और बीजेपी के बीच नई बहस छिड़ गई है।
प्रदेश में विपक्ष के एजेंडे पर काम कर रही भाजपा
आरएसएस ने देश में हिंदुत्व के एजेंडे के आधार पर भाजपा को मजबूती देने की कोशिश की है। यही वजह है कि केंद्र में नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार पूरी मजबूती से सत्ता में है। ऐसे में देश की बाहरी और भीतरी ताकतें हिंदुत्व के एजेंडे का तोड़ ढूंढने में जुटी है। जानकार बताते हैं कि देश में उठ रही जातीय जनगणना की मांग भाजपा को कमजोर करने का ही एजेंडा है। भाजपा विरोधी ताकते चाहती हैं कि पार्टी हिंदुत्व के एजेंडे से हटकर जातीय गणित में उलझ जाए। जिससे विपक्ष को फायदा हो सके। यही वजह है कि देशभर में जातीय जनगणना और पंचायतों का सिलसिला बढ़ा है। ऐसे में पार्टी के नेताओं और संघ के लिए यह चिंता का विषय है। प्रदेश में भाजपा नेताओं का इस तरह की पंचायतों में शामिल होना साफ करता है कि विपक्ष का एजेंडा मजबूती से काम कर रहा है। इससे आरएसएस में बड़ी चिंता और बेचैनी है।

गहलोत की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा चिंतित
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं से प्रदेश में लगातार पैठ मजबूत करते जा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 19 नए जिले और 3 संभाग बनाकर विरोधियों के सामने लंबी लकीर खींच दी है। इससे भाजपा में खलबली है। अशोक गहलोत की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा चिंतित है। प्रदेश में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव है। ऐसे में भाजपा का सीधा मुकाबला अशोक गहलोत की लोकप्रियता से है। पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान भी है। पार्टी के शीर्षस्थ नेता चाहते हैं कि प्रदेश में पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़े। तभी सत्ता में आने की गुंजाइश बन सकेगी। अशोक गहलोत की लोकप्रियता के आगे इस वक्त भाजपा बहुत कमजोर स्थिति में आ चुकी है।













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