Rajasthan Assembly Election 2023: वसुंधरा सहित इन चालीस विधायकों के कटेंगे टिकट, जानिए भाजपा की रणनीति
राजस्थान में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने गुजरात फार्मूला लागू किया तो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत 40 विधायकों के टिकट काटने पक्के हैं। पार्टी राजस्थान में 100 नए चेहरों को मौका देगी।

Rajasthan Assembly Election 2023: गुजरात में बंपर जीत के बाद भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का फोकस राजस्थान में होगा। राजस्थान में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। माना जा रहा है कि भाजपा राजस्थान में गुजरात फार्मूला लागू करने जा रही है। प्रदेश में भाजपा का गुजरात फार्मूला लागू हुआ तो राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित उनके मंत्रिमंडल में खास रहे विधायकों और प्रत्याशियों के टिकट कटने पक्के हैं। गुजरात में भाजपा के फार्मूले ने राजस्थान में 70 वर्ष की आयु पार कर चुके नेताओं की नींद उड़ा दी है। अगर फार्मूला राजस्थान में लागू हुआ तो राजस्थान में मौजूदा 70 विधायकों के टिकट काटे जाएंगे। वही पार्टी प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों क्षेत्रों में 100 नए चेहरे चुनाव मैदान में उतारेगी। भाजपा ने गुजरात में पूर्व मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का टिकट काटकर सबको हैरान कर देने वाला फैसला लिया है। इसका असर राजस्थान में भी दिखने लगा है।

इन नेताओं के काटे जाएंगे टिकट
भाजपा प्रदेश में मौजूदा 71 विधायकों में से 40 नेताओं की टिकट गुजरात फार्मूले के आधार पर काटने जा रही है। उनमें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के अलावा कालीचरण सर्राफ, नरपत सिंह राजवी, वासुदेव देवनानी, कैलाश चंद मेघवाल, गुलाबचंद कटारिया और राजेंद्र राठौड़ जैसे प्रमुख नाम है। इनके अलावा हारे हुए प्रत्याशियों के भी बड़े पैमाने पर टिकट काटे जाएंगे। साथ ही निष्क्रिय नेताओं को घर बैठाया जाएगा। पार्टी प्रदेश में नए चेहरों को मौका देगी।

अमित शाह मनाएंगे असंतुष्ट नेताओं को
अमित शाह राजस्थान में असंतोष के चलते नाराज चल रहे नेताओं के साथ समझाइश करेंगे। पार्टी ने बागी नेताओं को फिर से पार्टी में शामिल करने की शुरुआत कर दी गई है। पार्टी चाहती है कि राजस्थान में एकजुटता दिखाई दे। नेताओं को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा संगठन में कार्य करने के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्हें मनाकर संगठन के साथ जोड़ कर पार्टी प्रदेश में मजबूत होना चाहती है। भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच का मनमुटाव है। पार्टी ने इसे दूर करने के लिए रणनीति बनाना शुरू कर दिया है।

क्या है भाजपा का गुजरात मॉडल
भाजपा ने गुजरात विधानसभा चुनाव में 65 वर्ष से अधिक आयु के नेताओं के टिकट काटे हैं। वही पार्टी ने निष्क्रिय नेताओं को घर बैठा दिया है। भाजपा ने गुजरात मैं सातवीं बार जीत हासिल की है। गुजरात में विकास मॉडल और संगठन की मजबूती की दम पर ही भाजपा सत्ता में लौट पाई है। गुजरात चुनाव में भाजपा के पन्ना प्रमुख मॉडल ने पार्टी को जमीन पर मजबूती दी है। उसी की बदौलत गुजरात में भाजपा जीतकर सत्ता में आई है। माना जा रहा है कि राजस्थान में भी इसी आधार पर संगठन को मजबूत किया जाएगा। राजस्थान में पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। संगठन को मजबूत करने के लिए यहां भाजपा को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।

राजस्थान में सक्रिय है वसुंधरा राजे
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे प्रदेश में पूरी तरह सक्रिय है पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और जनता के बीच वसुंधरा खुद को पूरी तरह सक्रिय बनाए हुए है। प्रदेश में वसुंधरा राजे के आयोजनों में अच्छी भीड़ देखी जाती है। राजस्थान में भाजपा के भीतर वसुंधरा राजे समर्थकों की बड़ी तादाद है। पार्टी के भीतर की गुटबाजी गाहे-बगाहे सामने आ जाती है। इसी गुटबाजी के चलते वसुंधरा समर्थक संगठन की गतिविधियों से दूरी बनाए रखते हैं। पार्टी के सामने वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया के बीच चल रही सीएम पद की रस्साकशी से पार पाना अपने आप में बड़ी चुनौती है। पार्टी इस मनमुटाव को दूर कर संगठन को मजबूत करने के लिए रणनीति पर काम करना शुरू कर चुकी है।












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