OPINION: राजस्थान में अशोक गहलोत की रणनीति से कांग्रेस का बढ़ रहा ग्राफ, जानिए मुख्यमंत्री की पूरी रणनीति

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में चल रहे तमाम बवाल थम चुके हैं। ऐसा लग रहा है जैसे कांग्रेस अभी से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो चुकी है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की योजनाओं और रणनीति से धीरे-धीरे कांग्रेस रफ्तार पकड़ते हुए आगे बढ़ने लगी है। पार्टी के भीतर अशोक गहलोत और सचिन पायलट का विवाद भी थम चुका है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि चुनाव से पहले राजस्थान में मुख्यमंत्री का चेहरा कोई नहीं होगा। पार्टी अशोक गहलोत और सचिन पायलट को साथ लाकर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर चुकी है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव गहलोत पायलट साथ मिलकर लड़ेंगे। जो लड़ाई कांग्रेस में चल रही थी। चुनाव नजदीक आते-आते वह लड़ाई भाजपा में तेज हो गई है। आने वाले चुनाव में भाजपा की इसी कमजोरी फायदा निश्चित तौर पर कांग्रेस को होगा।

पायलट का साथ पाकर खुश हैं सीएम गहलोत

कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच समझौता करवा दिया था। सीएम गहलोत अब कहते हैं कि उन्हें उम्मीद है कि वह दोनों साथ मिलकर काम करेंगे। चुनाव परिणाम के आंकड़े यह समझाने के लिए पर्याप्त हैं कि इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले गहलोत अपने पूर्व डिप्टी को अपने साथ पाकर खुश हैं। दरअसल पायलट टोंक सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। जो राज्य की महत्वपूर्ण सीटों में से एक है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 200 विधानसभा में 19 सीटों पर 1998 से वैकल्पिक रूप से कांग्रेस और भाजपा को वोट दिया गया है. इससे पता चलता है कि जो पार्टी इन 19 सीटों पर जीत हासिल करेगी। वह राज्य में सरकार बनाएगी। कांग्रेस 25 साल पुरानी सत्ता विरोधी लहर को मात देने में सक्षम होने को लेकर आश्वस्त दिख रही है।

ashok gehlot

भाजपा में भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतर्कलह

राजस्थान में भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर भारी अंतर्कलह है। पार्टी को राजस्थान में सरकार बनती दिख रही है। इसी को लेकर बीजेपी अतिउत्साह में है। बीजेपी द्वारा राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर कई प्रयोग किए गए हैं। यह कदम भाजपा के लिए आत्मघाती भी साबित हो रहा है। दरअसल राजस्थान में भाजपा के इस प्रयोग से मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार तैयार हो गए है। राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जनाधार वाली नेता हैं। वसुंधरा राजे दो बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। राजे की पार्टी कार्यकर्ताओं और आमजन के बीच पकड़ है। लेकिन पार्टी हाईकमान वसुंधरा राजे को कमान देने के लिए तैयार नहीं है। बीजेपी नेतृत्व राज्य में विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे और कमल के निशान पर चुनाव लड़ने का दावा करता है। यही वजह है कि प्रदेश में केंद्रीय नेताओं के ताबड़तोड़ दौरे हो रहे हैं। पार्टी के इस फैसले से कार्यकर्ताओं में निराशा है। पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कार्यकर्त्ता फील्ड में समय दे या नेताओं की जनसभाओं में शामिल हो। केंद्रीय नेता कार्यकर्ताओं को दौड़ा रहे हैं। इससे चुनाव से पहले ही कार्यकर्त्ता थक जाएंगे। उनके उत्साह में कमी आ जाएगी।

गहलोत की योजनाओं से कांग्रेस को मिल रही मजबूती

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चुनाव से पहले जिस तरह जनकल्याणकारी योजनाओं की बौछार कर रहे हैं। उससे प्रदेश में कांग्रेस को बढ़त मिलती नजर आ रही है। इसकी एक बड़ी वजह भाजपा में अंतर्कलह भी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी कार्यशैली से पिछले कुछ समय में जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत की है। राजनीति के जानकारों की मानें तो भाजपा के सामने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जीत पाना सबसे बड़ी चुनौती है। इसकी वजह अशोक गहलोत की लोकप्रियता है। भाजपा राजस्थान में जिस रणनीति पर काम कर रही है। उससे लगता नहीं है कि पार्टी अशोक गहलोत के खिलाफ चुनाव में उतनी मुखर हो पाएगी। भाजपा में वसुंधरा राजे को छोड़कर और कोई नेता इतना ताकतवर नहीं है। जानकार कहते हैं कि भाजपा नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की बात तो करती है। लेकिन विधानसभा चुनाव के छह महीने बाद ही लोकसभा चुनाव होने हैं। आम मतदाता मोदी के कहने पर दो बार वोट नहीं करेगा। नरेंद्र मोदी की स्वीकार्यता विधानसभा चुनाव के बजाय लोकसभा चुनाव में ज्यादा है। यह भी एक बड़ी वजह है कि राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस का ग्राफ बढ़ता जा रहा है।

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