OPINION: राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत की गिग वर्कर्स को सौगात, कानून बनाकर दी सामाजिक सुरक्षा

राजस्थान में गहलोत सरकार चुनावी साल में योजनाओं की बाढ़ ला दी है। सीएम गहलोत प्रदेशवासियों को जमकर सौगात दे रहे हैं। राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा के लिए अलग-अलग बोर्डों का गठन किया जा रहा है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा का दायरा मजबूत करने के लिए गहलोत सरकार कानून भी बना रही है। राज्य में गहलोत सरकार ने हाल ही में गिग वर्कर्स यानी घरों में खाने और सामान की डिलीवरी करने वाले लोगों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स विधेयक 2023 पारित कर दिया है। इसी के साथ राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है। जहां गिग वर्कर्स को कानून के दायरे में लाने के लिए विधेयक लाया गया है और ये गिग श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देता है।

एक्ट का उलंघन करने पर 5 से 50 लाख तक जुर्माना

गिग वर्कर्स विधेयक के अनुसार अगर कोई इस गिग वर्कर्स एक्ट का उल्लंघन करेगा तो 5 से 50 लाख तक जुर्माना लगेगा। गिग वर्कर्स का समूहक अगर रजिस्टर्ड गिग वर्कर्स के लिए बने कानून का पालन नहीं करता है तो राज्य सरकार उस पर पहली बार 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाएगी। यह राशि 50 लाख रुपये तक हो सकता है। सरकार के इस विधेयक से गिग श्रमिकों के हितों की रक्षा हो सकेगी। इसके साथ ही उनके कल्याण को स्वरूप दिया जा सकेगा। आपको बता दें प्रदेश में गिग वर्कर्स की बड़ी तादाद है।

ashok gehlot

हर वर्कर को मिलेगा यूनिक आईडी कार्ड

इस कानून के तहत राजस्थान के सभी गिग वर्कर्स और एग्रीगेटर्स का रजिस्ट्रेशन होगा औऱ सरकार गिग वर्कर्स का एक डेटाबेस तैयार करेगी। हर वर्कर के लिए एक यूनिक आईडी कार्ड तैयार किया जाएगा। विधेयक में प्लेटफ़ॉर्म आधारित गिग वर्कर्स फंड एंड वेल्फेयर फीस स्थापित करने का भी प्रावधान है। जिसके तहत गिग श्रमिकों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा और कल्याण कोष स्थापित किया जाएगा। बाकी सोर्सेस के अलावा एग्रीगेटर्स पर भी फीस चार्ज लगेगा। जिसमें प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर के हर ट्रांजेक्शन के आधार पर लिया जाएगा। अगर एग्रीगेटर निर्धारित समय में ये फीस नहीं देता है तो उस पर भुगतान की तारीख से 12 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज लगाया जाएगा। वहीं किसी भी क्लॉज का पहली बार उल्लंघन करने पर पांच लाख रुपये और उसके बाद 50 लाख रुपये तक जुर्माना लिया जा सकता है।

जानिए कौन होते हैं गिग वर्कर्स

दरअसल हर कारोबार में कुछ काम ऐसे होते हैं। जिनको स्थायी कर्मचारी के बजाए गैर स्थायी कर्मचारी से कराया जा सकता है। ऐसे काम के लिए कंपनियों कर्मचारियों को काम के आधार पर पेमेंट करती हैं। ऐसे ही कर्मचारियों को गिग वर्कर कहा जाता है। हालांकि ऐसे कर्मचारी कंपनी के साथ लंबे समय तक भी जुड़े रहते हैं। स्वतंत्र रूप से ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए काम करने वाले कर्मचारी, ठेका फर्म के कर्मचारी, कॉल पर काम के लिए उपलब्ध कर्मचारी, अस्थायी कर्मचारी गिग वर्कर्स हुए।

गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड का होगा गठन

भारत में ऑनलाइन कारोबार बढ़ने के बाद गिग वर्कर्स की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। एक अनुमान के अनुसार देश में इस समय 10 से 12 करोड़ गिग वर्कर हैं। भारत में अधिकांश गिग वर्कर ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स कंपनी और सामान की डिलीवरी जैसे कार्यों से जुड़े हैं। राजस्थान सरकार जो विधेयक लेकर आई है। उसके तहत राज्य एक राजस्थान प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड का गठन करेगा। ये गिग श्रमिकों और एग्रीगेटर्स का रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करेगा। गिग श्रमिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से ऐसे श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा दी जाएगी। इस बोर्ड में गिग श्रमिकों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके लिए 200 करोड़ का फंड भी स्थापित किया जाएगा। इस विधेयक का उद्देश्य एक वेलफेयर फीस डिडक्शन सिस्टम बनाना भी है। इसे एग्रीगेटर ऐप के साथ मर्ज किया जाएगा।

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