National Youth Mental Wellbeing Summit: बच्चों और युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा, बैंगलोर में हुआ आयोजन

National Youth Mental Wellbeing Summit: पिछले कुछ सालों से युवाओं में मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़े मामले बढ़ते जा रहे हैं। छोटी सी उम्र में हो रही मानसिक समस्‍याएं उनके व्‍यवहार के साथ मानसिक और शारीरिक विकास को भी प्रभावित कर रहीं हैं। युवाओं में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और उनके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को कैसे अच्‍छा रखा जाए इसको लेकर बेंगलुरू में राष्ट्रीय युवा मानसिक कल्याण शिखर सम्मेलन (National Youth Mental Wellbeing Summit)का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन मानसिक स्वास्थ्य समाधान के लिए काम कर रहे स्टार्टअप Mindei ने बेंगलुरु के येलहंका स्थित रॉयल ऑर्किड कन्वेंशन सेंटर में आयेाजित किया।

इस समिट में 120 से अधिक मनोचिकित्‍सक, मनोवैज्ञानिक, शिक्षक और अभिभावकों ने हिस्‍सा लिया। इस समिट में बड़ी संख्‍या में युवा भी मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने युवा मानसिक स्वास्थ्य की जटिलताओं से निपटने और युवा मस्तिस्‍क को सपोर्ट कर उन्‍हें स्‍वयथ्‍थ रखनें संबंधी व्‍यवहारिक रणनीतियों पर बात की गई। इसके साथ ही इस समिट में शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य कारकों पर भी चर्चा की गई।

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Mindei की को-फाउंडर ऋषु श्रीवास्तव ने माइंड वॉइस नाम के एआई-संचालित मानसिक स्वास्थ्य टेस्‍ट एक्‍यूपमेंट का डेमो दिखाया । माइंडवॉयस बच्चों और युवाओं में तनाव, थकान और आत्म-सम्मान संबंधी समस्याओं का पता लगाने के लिए ऑडियो सैंपल का यूज करता है। इस समिट में इस डेमो को पॉजिटिव रिसपांस मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत मोमपावर360 की सीईओ और संस्थापक तथा पूर्व मिसेज इंडिया यूनिवर्स लक्ष्मी शेषाद्री की स्‍पीच से हुई। शेषाद्री ने मांओं के मानसिक स्वास्थ्य और उसके बच्चे की भलाई के बीच संबंध पर जोर दिया। उन्होंने माताओं के लिए एक सहायक समुदाय का आह्वान किया, ताकि वे अपने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।

पैनल ने चुनौतियों और समाधानों पर की चर्चा

इस समिट में तीन पैनल ने युवाओं के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और समाधानों पर चर्चा की। जिसमें पहले पैनल में "स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों की पहचान और समाधान" पर चर्चा की गई, जिसमें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर प्रकाश डाला गया। क्यूपीआर इंडिया की ज्योति मेहता ने बताया कि प्रतिदिन 35 से अधिक छात्र आत्महत्या कर लेते हैं, उन्होंने समय रहते हस्तक्षेप करने पर जोर दिया। द इंटरनेशनल स्कूल, बैंगलोर के उप प्रधानाचार्य नवीन अंजो टॉम ने छात्रों के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण की वकालत की। अन्य वक्ताओं में बाल रोग विशेषज्ञ और बाल मनोचिकित्सा चिकित्सक डॉ. इंद्रजीत थोपटे और स्कूल काउंसलर रेशमा संजय शामिल थे।

दूसरे पैनल में "मानसिक स्वास्थ्य के लिए पालन-पोषण" पर ध्यान केंद्रित किया गया। बाल मनोवैज्ञानिक रिद्धि दोशी पटेल ने बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय और बाहरी गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डाला। नेतृत्व प्रशिक्षक हैदर जसदान ने बच्चों के साथ सार्थक संबंधों पर एक कविता सुनाई। पेरेंटिंग शिक्षक गोथा हरि प्रिया ने बच्चों को उनकी जिज्ञासा का पता लगाने की अनुमति देने के बारे में बात की।

अंतिम पैनल, "डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य को नेविगेट करना" ने प्रौद्योगिकी के उपयोग से संबंधित जोखिमों और समाधानों की जांच की। आघात-सूचित मनोचिकित्सक डॉ. मेघना सिंघल ने अत्यधिक स्क्रीन समय के कारण सामग्री, आचरण और संपर्क जोखिमों के बारे में चेतावनी दी। द लिटिल जिम इंडिया के सीईओ श्रेयस मेहता ने एक विकल्प के रूप में शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा दिया। हैप्पीनेट्ज़ की सीईओ ऋचा सिंह ने प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए आधारभूत नियम निर्धारित करने के लिए एक "तकनीकी अनुबंध" पेश किया। पॉडकास्टर और अभिभावक मोहुआ चिनप्पा ने डिजिटल बदमाशी से सावधान रहने के लिए विश्वास बनाने पर जोर दिया।

भारत के बेंगलुरु में स्थित मिंडेई ने 2023 से बच्चों की मानसिक और भावनात्मक भलाई का समर्थन करने के लिए स्कूलों और कॉलेजों के साथ काम किया है। इस स्टार्टअप को मनोविज्ञान, मनोरोग विज्ञान और स्वास्थ्य सेवा के विशेषज्ञों का समर्थन प्राप्त है। अधिक जानकारी के लिए, मिंडेई से [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है।

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