Shubham Gupta IAS : जूते-चप्पल बेचने वाला शुभम गुप्ता बना आईएएस, परिवार अभी भी किराए के मकान में
जयपुर, 17 अगस्त। अनिल गुप्ता का गला उस वक्त रुंध गया और आंखें भर आईं जब उन्होंने अपने बेटे शुभम गुप्ता की कामयाबी की कहानी बयां की। अनिल का रुंधा हुआ गला बिन बोले बहुत कुछ कह गया। आंखों से बहते आंसू खुशी के थे। उनमें गर्व भी था। गर्व हो भी क्यों नहीं? आखिर कभी दुकान पर बैठकर जूते चप्पल बेचने वाला इनका बेटा आज आईएएस अफसर है।

UPSC टॉपर शुभम गुप्ता के पिता का इंटरव्यू
IAS शुभम गुप्ता ने ही हाल ही अपना 28वां जन्मदिन मनाया है। इस मौके पर जानिए किराए के मकान में रहने वाले गुप्ता परिवार के बेटे की यूपीएससी टॉपर बनने की पूरी कहानी, जो वन इंडिया हिंदी से बातचीत में उनके पिता अनिल गुप्ता ने बताई है।

आईएएस शुभम गुप्ता, गांव भूदोली, नीमकाथाना सीकर
महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी शुभम गुप्ता मूलरूप से राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना उपखंड मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर स्थित गांव भूदोली के रहने वाले हैं। ये भूदोली के संतोलाल सिंघानची के पोते हैं। हालांकि वर्तमान में इनका परिवार जयपुर के रंगोली गार्ड वैशाली में किराए के मकान में रह रहा है।

गुजरात के वापी गुरुकुल से भी पढ़ाई की
अनिल गुप्ता बताते हैं कि वे जयपुर में ठेकेदारी का काम किया करते थे। इसी दौरान 11 अगस्त 1993 को शुभम का जन्म हुआ। शुभम सातवीं कक्षा में था तब कमाई नहीं होने के कारण वे परिवार समेत महाराष्ट्र के पालघर जिले के दहाणू रोड चले गए। वहां पर पिता अनिल ने जूते चप्पल बेचने की दुकान खोली। शुभम महाराष्ट्र के दहाणू रोड से 70 किमी दूर गुजरात के वापी स्थित श्री स्वामी नारायण गुरुकुल में पढ़ने करते थे।

स्कूल के बाद पिता की दुकान पर
अनिल कहते हैं कि उन्होंने दहाणू रोड के साथ-साथ वापी में भी जूते-चप्पलों की दुकान खोली थी। शुभम स्कूल से आने के बाद शाम चार से रात नौ बजे तक दुकान संभालता था। उस सपने में भी नहीं सोचा था कि जूते-चप्पल बेचने वाला उनका बेटा आईएएस अफसर बन जाएगा।

दिल्ली में रहकर भी की पढ़ाई
वापी से नौवीं तक की पढ़ाई करने के बाद शुभम गुप्ता दिल्ली चले आए। यहां पीजी में रहते हुए दसवीं के बाद की पढ़ाई पूरी की। दिल्ली विश्वविद्यालय से साल 2012-2015 में अर्थशास्त्र से बीए और फिर एमए किया। पिता हर माह बेटे के आठ हजार रुपए पढ़ाई के खर्च के लिए भेजा करते थे।

चौथे प्रयास में बने आईएएस
दिल्ली में रहते हुए शुभम गुप्ता ने यूपीएससी की तैयारियां शुरू कर दी थी, मगर शुभम गुप्ता का आईएएस अफसर बनने का सपना अपने चौथे प्रयास में पूरा हुआ। साल 2015 में पहले प्रयास में शुभम यूपीएससी की प्रारम्भिक परीक्षा भी पास नहीं कर पाए।

शुभम को दूसरे प्रयास में 366वीं रैंक
शुभम को अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में 366वीं रैंक मिली। ये आईएएस तो नहीं बन पाए, मगर इन्हें भारतीय अंकेक्षण और लेखा सेवा (IAAS) मिला। शिमला में ट्रेनिंग के दौरान शुभम ने फिर यूपीएससी 2017 में तीसरी बार भाग्य आजमाया और इस बार भी फेल हो गए।

साल 2018 में शुभम गुप्ता को छठीं रैंक मिली
भारतीय अंकेक्षण और लेखा सेवा में जॉब लगने के बाद भी शुभम ने मेहनत करना नहीं छोड़ा और यूपीएससी 2018 की परीक्षा दी। इधर, उन्हें भारतीय अंकेक्षण और लेखा सेवाक के अफसर के रूप में जयपुर में सहायक महालेखाकार नियुक्ति भी मिल गई। दिसम्बर 2018 से अगस्त 2020 तक काम भी किया, मगर फिर यूपीएससी 2018 का रिजल्ट आया, जिसमें शुभम गुप्ता ने छठवां स्थान प्राप्त किया।

शुभम गुप्ता को नागपुर में पहली पोस्टिंग
अनिल गुप्ता ने बताया कि यूपीएससी टॉपर बनने के बाद शुभम गुप्ता को महाराष्ट्र कैडर अलॉट हुआ। ट्रेनिंग के दौरान शुभम को नासिक में एडीएम, एसडीएम व तहसीलदार के रूप मे पोस्टिंग मिली। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद शुभम को पहली पोस्टिंग के रूप में नागपुर के एटापल्ली में एडीएम पद पर तैनात किया गया है।

आईएएस शुभम गुप्ता का परिवार
साल 2011 में शुभम का परिवार महाराष्ट्र के दहाणू रोड से वापस जयपुर लौट आया। वर्तमान में शुभम के पिता व बड़े भाई कृष्णा गुप्ता बिल्डर के रूप में कार्य कर रहे हैं। शुभम की मां अनुपमा हाउस वाइफ है जबकि बड़ी बहन भाग्यश्री गुप्ता सीए हैं। नवंबर 2020 में शुभम की रेवाड़ी के ईशा के साथ शादी हुई है।












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