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किरोड़ी सिंह बैंसला: PAK-चीन को युद्ध में चटा चुके हैं धूल, जानिए इनका फौज से BJP तक का सफर

Jaipur News, जयपुर। राजस्थान के करौली जिले के गांव मु​ड़िया में बच्चू सिंह के घर जन्मे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला बुधवार दोपहर को बेटे विजय बैंसला के साथ भाजपा का दामन थाम लिया। lok sabha election 2019 में हनुमान बेनीवाल की पार्टी रालोपा के नागौर सीट के लिए भाजपा से गठबंधन के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी चौंकाने वाली खबर है।

Journey of Kirori Singh Bainsla who joins bjp

बैंसला व उनके बेटे ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए राजस्थान प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर की मौजूदगी में दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी ज्वाइन की। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व अन्य नेताओं से ​मुलाकात की। यह पहला मौका नहीं जब कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ट्रेंड में हों। इससे पहले गुर्जर आंदोलन और 1962 व 1965 में पाक, चीन के साथ भारत के युद्ध के दौरान बैंसला सुर्खियों में रह चुके हैं। आइए डालते हैं बैंसला के फौज से भाजपा ज्वाइन करने तक के सफर पर एक नजर (Col Kirori Singh Bainsla Profile )।

युद्ध में बना लिया था इन्हें बंदी

यह बात तक की जब राजस्थान का 25 वर्षीय यह गबरू जवान देश की सरहद पर तैनात था। 1962 से भारत-चीन युद्ध हुआ तो बैंसला ने अदम्य साहस ​दिखाया। फिर दूसरी बार युद्ध का मौका 1965 में तब मिला जब पाक ने नापाक हरकत की। दोनों ही युद्धों में बैंसला ने देश के दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया। हालांकि 1965 के युद्ध में पाकिस्तान युद्धबंदी भी रहे।

'जिब्राल्टर की चट्टान' और 'इंडियन रेम्बो' के नाम से पहचान

फौजी में रहते हुए कर्नल ​बैंसला अपनी बहादुरी के लिए दो उपनामों से पहचाने जाते थे। एक जिब्राल्टर की चट्टान और इंडियन रेम्बो। युद्ध में अदम्य साहस दिखाने वाले बैंसला ने सिपाही से कर्नल रैंक तक तरक्की पाई। कर्नल के पद तक पहुंचकर रिटायर हुए। बैंसला भारतीय सेना की राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए थे। हालांकि फौजी बनने से पहले कुछ साल तक शिक्षक के रूप में सेवाएं दी थी।

कर्नल किरोड़ी बैंसला का परिवार

(Gurjar leader kirori singh bainsla Family) कर्नल किरोड़ी बैंसला दिग्ग्ज गुर्जर नेता हैं। राजस्थान के दौसा, करौली, धौलधपुर, सवाई माधोपुर, भरतपुर समेत अन्य गुर्जर बाहुल्य इलाकों में बैंसला का अच्छा खास प्रभाव है। इनकी पत्नी का निधन हो चुका है। बेटी रेवेन्यू सेवा में है। तीन बेटे हैं, जिनमें दो फौजी हैं और एक निजी कम्पनी में काम करता है।

गुर्जर आंदोलन होते हुए राजनीति में आए

राजस्थान में गुर्जर आरक्षण मतलब कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला। फौज से रिटायर होने के बाद बैंसला गांव लौटे। कुछ समय बाद सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जरों को सं​गठित करना शुरू किया। 2007 में हजारों गुर्जर कर्नल बैंसला के नेतृत्व में आरक्षण की मांग को लेकर रेल पटरियों और सड़कों पर उतरे। इसके बाद 2019 तक भी रह-रहकर आरक्षण की चिंगारी सुलगती रही। छह दर्जन से अधिक गुर्जर फायरिंग में मारे भी गए। इधर, गुर्जर आरक्षण आंदोलन के चलते बैंसला भाजपा की तत्कालीन सरकार के करीब आए और 2009 में टोंक-सवाई माधोपुर से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा। हालांकि इसमें हार का सामना करना पड़ा। अब लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले भाजपा का दामन फिर से थामा (kirori singh bainsla Join BJP)। इस बार भी कहीं से चुनाव लड़ेंगे या नहीं यह अभी तय नहीं हो पाया है।

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