जयपुर : बीआरटीएस काॅरिडोर प्रोजेक्ट पर विवाद, 3 सरकारी विभाग प्रोजेक्ट पर फिर से होगा विचार
जयपुर। राजस्थान के जयपुर में बीआरटीएस काॅरिडोर प्रोजेक्ट बनने के बाद से ही विवादों में रहा है। करोड़ों रुपए खर्च कर इसे बनाया गया, लेकिन इसमे तकनीकी खामियों के चलते यह पूरी तरह से सफल नहीं हो सका। इसे लेकर अब तीन सरकारी विभाग इसकी उपयोगिता पर फिर से विचार कर रहे हैं।

विभागों के मुखियाओं का कहना है कि जरुरत पड़ी तो इन्हें हटा दिया जाएगा। हांलाकि इसे लेकर पूरी सरकारी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और स्थानीय लोगों से भी इस बारे में चर्चा की जाएगी। वहीं, डीसीपी ट्रैफिक आदर्श सिधु ने बताया कि राजधानी में बीआरटीएस कॉरिडोर में होने वाले हादसों को लेकर गंभीर चिंतन किया जा रहा है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में चौमूं पुलिया से रोड नंबर 14 सीकर रोड, एलिवेटेड रोड से 200 फिट तक अजमेर रोड और 200 फिट रोड से प्रधान वाटिका तक बीआरटीएस कॉरिडोर बने हुए हैं। बीआरटीएस कॉरिडोर कितने व्यवहारिक है।
इसे लेकर विभिन्न एजेंसियों के साथ चर्चा की जा रही है। शहर में अधिकांश बीआरटीएस कॉरिडोर में बसों का संचालन नहीं हो रहा है। ऐसे में बीआरटीएस कॉरिडोर में होने वाले हादसों को रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं और जल्द ही कॉरिडोर को लेकर भी अहम फैसला संभावित विभाग की ओर से लिया जाने वाला है। गौरतलब है कि बीआरटीस काॅरिडोर में तीन साल की दुर्घटना आंकड़ों पर विचार किया जाए तो काॅरिडोर में साल 2018 से 2020 तक बीआरटीए काॅरिडोर में सड़क हादसों में 55 लोगों की मौत हो चुकी है।
साल 2018 में 22, 2019 में 20 और 2020 में 13 लोग लापरवाही के चलते जान गवां चुके हैं। इन काॅरिडोर में तीन साल के दौरान 214 हादसे हुए हैं। इनमें 186 लोग गंभीर रुप से घायल भी हो चुके हैं। सबसे ज्यादा हादसे चैमू पुलिया से रोड नंबर 14 सीकर रोड बीआरटीएस काॅरिडोर में हुए हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि काॅरिडोर लंबा होने के कारण बीच में सड़क पार करने का रास्ता नहीं हैं। इसलिए पैदल चलने वाले लोगों ने कई जगहों से सरिए हटा दिए हैं और कोरिडोर के अंदर से ही वे सड़क पार करते हैं। इस कारण भी हादसे होते हैं।












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