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IPS Couple : पति डॉ. विकास पाठक व पत्नी प्रीति चंद्रा एक साथ बने DIG, रोचक है इनकी Love Story

जयपुर, 5 जनवरी। राजस्थान कैडर के दो आईपीएस इन दिनों चर्चा में हैं। एक लेडी सिंघम IPS प्रीति चंद्रा और दूसरे आईपीएस डॉ. विकास पाठक। ये दोनों पति-पत्नी हैं और एक साथ डीआईजी बने हैं। प्रीति चंद्रा राजस्थान और विकास पाठक यूपी के रहने वाले हैं। दोनों की सक्सेस स्टोरी, प्रेम कहानी, शादी और प्रमोशन तक का पूरा सफर काफी रोचक है।

प्रीति चंद्रा के पिता रिटायर्ड फौजी रामचंद्र सुंडा

प्रीति चंद्रा के पिता रिटायर्ड फौजी रामचंद्र सुंडा

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में ​प्रीति चंद्रा के पिता रिटायर्ड फौजी रामचंद्र सुंडा कहते हैं कि उन्हें गर्व है कि उनकी बेटी राजस्थान में ही पैदा होने और राजस्थान कैडर में ही आईपीएस बनने वाली पहली महिला हैं। प्रमोशन के बाद बेटी प्रीति को सीआईडीसीबी जयपुर में डीआईजी पद पर लगाया गया है।

 दिल्ली में है आईपीएस दम्पति का घर

दिल्ली में है आईपीएस दम्पति का घर

राजस्थान कैडर की यह आईपीएस जोड़ी वर्तमान में दिल्ली में निवास कर रही है। दिल्ली के उत्तम नगर में इनका घर है। आईपीएस प्रीति व विकास के दो बेटी हैं। एक आरिका पाठक व दूसरी ऋत्विक चौधरी। दोनों बेटियों में से एक अपने नाम के साथ पिता का सरनेम पाठक और दूसरी बेटी मां का सरनेम चंद्रा लगाती हैं।

प्रीति कूदन सीकर व विकास बस्ती यूपी से

प्रीति कूदन सीकर व विकास बस्ती यूपी से

बता दें कि प्रीति चंद्रा का जन्म राजस्थान के सीकर जिले के गांव कुंदन में 21 अगस्त 1979 को हुआ था। वहीं, विकास पाठक उत्तर प्रदेश के बस्ती में 26 जुलाई 1981 को जन्मे। प्रीति चंद्रा ने एमए और एमफिल तथा विकास पाठक ने एमबीबीएस की डिग्री हासिल की।

आईपीएस प्रीति चंद्रा की शिक्षा

आईपीएस प्रीति चंद्रा की शिक्षा

रामचंद्र सुंडा ने बताया कि उनकी बेटी ने दसवीं तक की शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से प्राप्त की। सीकर के मारू विद्यालय से 12वीं और जयपुर के महारानी कॉलेज से एमए किया। फिर बीएड की डिग्री भी ली और जयपुर से पत्रकारिता शुरू की।

आईपीएस प्रीति चंद्रा का परिवार

आईपीएस प्रीति चंद्रा का परिवार

दादा- भेभाराम सुंडा, पूर्व सैनिक

पिता- रामचंद्र सुंडा, पूर्व सैनिक
माता- शांति देवी, गृहिणी
भाई- कमलेश चंद्रा, मॉटिवेशनल स्पीकर
बहन- कीर्ति चंद्रा, फैशन डिजाइनर

प्रीति चंद्रा रैंक 255 यूपीएससी 2008

प्रीति चंद्रा रैंक 255 यूपीएससी 2008

पत्रकारिता के दौरान ही प्रीति चंद्रा ने यूपीएससी 2008 की तैया​री शुरू की और बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में 255वीं रैंक हासिल की। उधर, यूपी के बस्ती में डॉ. विकास पाठक ने भी यूपीएससी परीक्षा क्रेक कर डाली थी। दोनों शुरुआती ट्रेनिंग के लिए मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) पहुंचे।

 LBSNAA में ट्रेनिंग के दौरान प्रीति के परिजनों से मिले विकास

LBSNAA में ट्रेनिंग के दौरान प्रीति के परिजनों से मिले विकास

LBSNAA में ट्रेनिंग के दौरान प्रीति के पिता रामचंद्र सुंडा व माता शांति देवी और भाई कमलेश चंद्रा उनसे मिलने गए थे। तब ​प्रीति ने अपने साथ ट्रेनिंग कर रहे विकास पाठक से परिजनों को मिलाया था। तब प्रीति ने विकास को दोस्त बताया था। परिजनों ने भी इसे सामान्य परिचय ही समझा था।

 आईएएस व जज का रिश्ता ठुकराया

आईएएस व जज का रिश्ता ठुकराया

रामचंद्र सुंडा ने बताया कि बेटी के आईपीएस बनने के बाद उनके पास शादी के लिए रिश्ते आने लगे थे। पंजाब से एक आईएएस व सीकर जिले के गांव कटराथल निवासी एक जज का रिश्ता आया। रिश्ता फाइनल करने से पहले रामचंद्र ने बेटी से पूछा तो जवाब मिला कि वो कल बताएगी।

svpnpa हैदराबाद में तय हुआ रिश्ता

svpnpa हैदराबाद में तय हुआ रिश्ता

शादी की बात को लेकर दूसरे दिन बेटी प्रीति चंद्रा की पिता से बात हुई तो उन्होंने कहा कि LBSNAA मसूरी में जिस आईपीएस विकास पाठक से मुलाकात करवाई वो उन्हें पसंद करती हैं। फिर LBSNAA से विकास पाठक और प्रीति चंद्रा ट्रेनिंग के लिए svpnpa हैदराबाद में चले गए। वहां दोनों के परिवार इनसे मिलने पहुंचे और वहीं इनका रिश्ता तय कर दिया था।

2010 में हुई प्रीति-विकास की शादी

2010 में हुई प्रीति-विकास की शादी

प्रशिक्षण के दौरान की दोस्ती प्यार में बदलने के बाद प्रीति और विकास ने साल 2010 में जयपुर में शादी कर ली। शुरुआत में विकास पाठक को तमिलनाडु कैडर अलॉट हुआ था, जिसे उन्होंने प्रीति से शादी के चलते बदलवाकर राजस्थान चले आए। अब ये आईपीएस पति पत्नी डीआईजी भी बने गए।

प्रीति के नाम में चंद्रा का रोचक किस्सा

प्रीति के नाम में चंद्रा का रोचक किस्सा

दरअसल, प्रीति चंद्रा सीकर के जाट व विकास पाठक यूपी के ब्राह्मण परिवार से हैं। प्रीति के पिता का सरनेम सुंडा है जबकि ये चंद्रा लगाती हैं। इसके पीछे की वजह रामचंद्र सुंडा ये बताते हैं कि बेटी ने उनके नाम रामचंद्र से चंद्रा लगाने लगी थी। फिर उसी के नक्शे कदम पर चलकर भाई कमलेश व बहन कीर्ति ने सरनेम सुंडा की बजाय चंद्रा रखा।

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