कौन हैं गजेंद्र शेखावत: कभी विदेश में करते थे खेती, अशोक गहलोत के बेटे को हराकर बने केंद्रीय मंत्री

जयपुर। राजस्थान की सियासी उठा-पटक में ऑडियो टेप की एंट्री से भूचाल आया हुआ है। अशोक गहलोत की सरकार गिराने की साजिश रचने वाले इन कथित ऑडियो टेप में भाजपा द्वारा कांग्रेस विधायकों को प्रलोभन देकर खरीद फरोख्त का दावा किया जा रहा है। इनमें केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का भी नाम सामने आया है। हालांकि केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि ऑडियो को फर्जी है। मैं जांच के लिए तैयार हूं।

Gajendra Singh Shekhawat Biography : birth family education political career and more

राजस्थान में तेजी से बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच जानिए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की जीवनी। किस तरह से उन्होंने अपना राजनीतिक सफर तय किया। विदेश से लौटकर जोधपुर से लोकसभा चुनाव 2019 लड़ा और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को हराकर मोदी सरकार में मंत्री बने।

सीकर के गांव मेहरोली में जन्मे गजेंद्र सिंह शेखावत

सीकर के गांव मेहरोली में जन्मे गजेंद्र सिंह शेखावत

गजेंद्र सिंह शेखावत का परिवार वर्तमान में जोधपुर की 34-ए, अजीत कॉलोनी में निवास करता है। मूलरूप से शेखावत सीकर जिले के रहने वाले हैं। सीकर जिले के गांव मेहरोली में शंकर सिंह शेखावत व मोहन कंवर के घर 3 अक्टूबर 1967 को गजेन्द्र सिंह शेखावत का जन्म हुआ। शंकर सिंह शेखावत जलदाय विभाग में वरिष्ठ अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए। पिता की सर्विस राजस्थान में अनेक स्थानों पर रही। ऐसे में शेखावत की स्कूली शिक्षा भी अलग-अलग शहर-कस्बों में हुई। शेखावत ने जयनारायण विश्वविद्यालय, जोधपुर राजस्‍थान से एमए (दर्शन शास्‍त्र) और एमफिल (दर्शन शास्‍त्र) से डिग्री प्राप्त की। 24 नवम्बर 1993 को गजेन्द्र सिंह शेखावत की शादी नौनंद कंवर के साथ हुई। इनके एक बेटा व दो बेटी हैं।

 जोधपुर विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे

जोधपुर विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे

गजेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान की राजनीति में कॉलज की पढ़ाई के दौरान ही कदम रख दिया था। 1992 में जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के टिकट पर छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीत हासिल की। छात्र जीवन से ही संघ परिवार से भी जुड़े रहे। इसके बाद समाज सेवा को अपनाया और स्वदेशी जागरण मंच व सीमा जन कल्याण समिति में कार्य किया।

 1994 में इथोपिया गए गजेंद्र सिंह शेखावत, करने लगे खेती

1994 में इथोपिया गए गजेंद्र सिंह शेखावत, करने लगे खेती

1992 में जोधपुर विश्वविद्यालय से छात्रसंघ चुनाव जीतने के बाद गजेंद्र सिंह शेखावत साल 1994 में ईस्ट अफ़्रीका के देश इथोपिया चले गए। वहां खुद की जमीन पर खेती करने लगे, लेकिन मन में कहीं ना कहीं राजनीति की वो ललक जिंदा रही। शायद यही वजह है कि 20 साल बाद वर्ष 2014 में चुनाव लड़ने के लिए वतन वापसी की।

 लोकसभा चुनाव 2014 में चंद्रेश कुमारी को हराया

लोकसभा चुनाव 2014 में चंद्रेश कुमारी को हराया

छात्र जीवन से ही भाजपा से जुड़ाव रहने के कारण लोकसभा चुनाव 2014 में टिकट भी मिल गया। पहला ही चुनाव जीता और केन्द्र में कृषि राज्यमंत्री के पद तक पहुंचे। लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस की चंद्रेश कुमारी को 4 लाख एक हजार 51 मतों से मात देकर पहली बार सांसद बने। इसके बाद मोदी टीम के साथ जुड़कर सक्रियता से काम किया और जोधपुर ही नहीं बल्कि पूरे मारवाड़ और राजस्थान में लोगों का दिल जीता। सांसद को हाल ही किसान मोर्चा का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया।

 लोकसभा चुनाव 2019 में वैभव गहलोत को हराया

लोकसभा चुनाव 2019 में वैभव गहलोत को हराया

लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा ने गजेंद्र सिंह शेखावत पर फिर भरोसा जताया। इस बार के चुनाव में शेखावत का मुकाबला मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत से था। शेखावत ने 7 लाख 88 हजार 888 व गहलोत ने 514448 वोट पाए। शेखावत की 2 लाख 74 हजार 440 मतों से जीत हुई। लोकसभा चुनाव 2019 में जोधपुर सीट राजस्थान की सबसे हॉट सीटों में से एक थी।

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