CM Ashok Gehlot ने किया पत्नी के संग इंदिरा रसोई में भोजन, दाल मंगोड़ी की सब्जी और चपाती का उठाया लुत्फ
Rajasthan के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर से अपने सादगी भरे अंदाज में नजर आए। गहलोत ने गुरुवार को जल महल की पाल पर संचालित इंदिरा रसोई घर पहुंच कर सपत्नीक आम लोगों के बीच बैठकर भोजन किया। गहलोत को भी वही भोजन परोसा गया। जो आम जनता को दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने धर्म पत्नी सुनीता गहलोत के साथ पहले इंदिरा रसोई में खाना खाने का टोकन लिया। फिर वहां पहले से खाना खा रहे लोगों के साथ जाकर बैठ गए। मुख्यमंत्री को रसोई में दाल मंगोड़ी की सब्जी, चपाती, चावल, सलाद, परोसा गया। जिसे उन्होंने साथ में बैठे अन्य लोगों के साथ चर्चा करते हुए बड़े चाव से खाया।
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इंदिरा रसोई की शुरुआत करने पर जताया सीएम का आभार
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इंदिरा रसोई में लोगों से भोजन की गुणवत्ता स्वच्छता कर्मचारियों की व्यवहार सहित अन्य व्यवस्थाओं के बारे में बात करते हुए निरीक्षण किया। लोगों ने इंदिरा रसोई योजना की शुरुआत करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आभार जताया। गहलोत के साथ जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री महेश जोशी, उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी व नगर निगम जयपुर हेरिटेज की महापौर मुनेश गुर्जर ने भी भोजन किया।

गहलोत ने की जनप्रतिनिधियों से इंदिरा रसोई में भोजन की अपी
इंदिरा रसोई में भोजन के बाद मुख्यमंत्री गहलोत ने मीडिया से कहा कि राज्य सरकार ने कोई भी भूखा नहीं सोए की भावना के अनुरूप इंदिरा रसोई में 8 रुपए में सम्मानपूर्वक पौष्टिक भोजन परोसा जा रहा है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से माह में कम से कम एक बार इंदिरा रसोई में भोजन करने की अपील भी की है। उन्होंने कहा कि इससे यहां नियमित भोजन करने के लिए आने वाले लोगों का मान-सम्मान बढ़ेगा। साथ ही भोजन की गुणवत्ता भी बनी रहेगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कोरोना काल में आमजन ने बिना भय के सावधानीपूर्वक कोई भी भूखा नहीं सोए के संकल्प के साथ घर-घर जाकर भोजन पहुंचाया है। जन सहभागिता का यह प्रयास पूरे देश में सराहा गया है।

इंदिरा रसोई में मिलता है 8 रुपए में भरपेट भोजन
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि हमारा सपना था कि प्रदेश में कोई भी गरीब तबका भूखा न रहे इस को ध्यान में रखते हुए इन रसोई की शुरुआत की गई है। आज हम 8 रूपए में लोगों को बैठा कर भरपेट भोजन करवा रहे हैं। जबकि 17 रूपए का अनुदान सरकार दे रही है। पिछली सरकार में ऐसा नहीं था। पिछली सरकार में 12 रूपए का अनुदान सरकार देती थी।












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