Rajasthan में सरदार शहर सीट के लिए थम गया प्रचार, सीट पर होगा त्रिकोणीय मुकाबला
राजस्थान में सरदार शहर सीट पर उपचुनाव के लिए प्रचार शनिवार शाम 5 बजे थम गया है। कांग्रेस ने इस सीट पर सहानुभूति कार्ड खेला है। वहीं भाजपा सत्ता विरोधी लहर से सीट निकलना चाहती है। आरएलपी ने मुकाबला त्रिकोणीय कर दिया है।

Rajasthan में सरदारशहर उपचुनाव में शनिवार को शाम 5 बजे से चुनाव प्रचार थम गया है। इस सीट पर मतदाता 5 दिसंबर को मतदान करेंगे। इस सीट पर जाट वोटों की लामबंदी ने कांग्रेस और भाजपा की राह को मुश्किल बना दिया है। मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार दिखाई दे रहे हैं। त्रिकोणीय मुकाबले के चलते इस सीट पर चौकाने वाले परिणाम भी सामने आ सकते हैं। खास बात यह है कि इस सीट पर चुनाव मुद्दों से दूर है। पार्टियों की रणनीति केवल जातिगत समीकरणों और सहानुभूति बटोरने तक ही सीमित है। कांग्रेस के नेता पूरी तरह से इस विश्वास में है कि यहां उनका फेंका गया सहानुभूति कार्ड तुरुप का इक्का साबित होगा। वहीं भाजपा सत्ता विरोधी लहर के भरोसे अपनी चुनावी वैतरणी पार करने की तैयारी में है। हालांकि भाजपा पिछले चुनाव के मुकाबले यहां कुछ कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। कांग्रेस ने इस सीट पर दिवंगत विधायक भंवर लाल शर्मा के बेटे अनिल शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं भाजपा ने अपने पुराने चेहरे अशोक पिंचा पर दांव खेला है। दूसरी तरफ हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी ने डेयरी की राजनीति में बड़ा नाम रहे लालचंद मूंड को चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबला दिलचस्प बना दिया है।

कांग्रेस से अनिल शर्मा
सरदारशहर से कांग्रेस के उम्मीदवार अनिल शर्मा भी राजनीति के पक्के खिलाड़ी माने जाते हैं। ब्राह्मण अनिल शर्मा के पक्ष में माने जा रहे हैं। वह ब्राह्मण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। वे साल 1995 में सादुलशहर नगर पालिका के चेयरमैन बने थे। शहर के अलावा इस सीट के ग्रामीण इलाके जहां ब्राह्मण मतदाता बाहुल्य है। वहां उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। अनिल शर्मा को अपने पिता दिवंगत विधायक भंवरलाल शर्मा के नाम का फायदा मिल रहा है। कुल मिलाकर उनको ब्राह्मण वोट का फायदा मिलता दिख रहा है।

भाजपा से अशोक पिंचा
पार्टी में निर्विरोध चेहरा और संगठन की पूरी ताकत साथ शहरी इलाके में अच्छी पकड़ मानी जाती है। पिंचा जनसंघ के जमाने से पार्टी और विचारधारा से जुड़े हैं। 2008 के विधानसभा चुनाव में अशोक पिंचा सरदारशहर सीट से खड़े हुए थे। उनके सामने कांग्रेस के दिवंगत विधायक भंवरलाल शर्मा मैदान में उतरे थे। उस वक्त अशोक पिंचा 9774 वोटों से यह चुनाव जीत लिया था। उसके अगले चुनाव में 2018 में उन्हें भंवर लाल शर्मा ने हार का मुंह दिखाया।

आरएलपी से लालचंद मूंड
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने सरदारशहर उपचुनाव में जाट कैंडिडेट को उतारा है। पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने लालचंद के नाम पर दांव चला है। लालचंद मूंड चूरू जिला दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष हैं। इससे उनकी ग्रामीण इलाकों में अच्छी पकड़ मानी जाती है। जाट बहुल इलाका होने के चलते उनकी समाज में गहरी पैठ है। उनका चुनाव प्रबंधन भी बेहद खर्चीला देखा जा रहा है। मूंड के मैदान में उतरने से जाट समाज के काफी वोट उनके पक्ष में जाएंगे।

करीब तीन लाख मतदाता चुनेंगे नया विधायक
सरदारशहर उपचुनाव के लिए 5 दिसंबर को मतदान होगा। 8 दिसंबर को मतगणना के बाद चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक इस चुनाव में 2 लाख 89 हजार 579 मतदाता है। जिनमें 1 लाख 52 हजार 640 पुरुष मतदाता और एक लाख 36 हजार 935 महिला मतदाता और 4 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। उपचुनाव में 497 सर्विस मतदाता भी हैं।

उपचुनाव में भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड
2018 में प्रदेश कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद अब तक 8 चुनाव हो चुके हैं। इनमें से छह पर कांग्रेस ने अपना कब्जा जमाया है और भाजपा एक सीट पर ही जीत हासिल कर पाई है। सरदारशहर का होने वाला यह 9वां उपचुनाव होगा। इसके लिए दोनों ही पार्टियों ने एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है। सरदारशहर में भंवरलाल शर्मा साल 2018 में अशोक पिंचा को पटखनी देकर विधायक बने थे। इसमें सबसे ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि आजादी के बाद सरदारशहर में 1952 से लेकर 2018 तक 15 चुनाव हो चुके हैं। जिनमें 9 बार कांग्रेस ने जीत का ताज पहना है। सिर्फ दो बार भाजपा को यहां से विधायक मिला है और वह साल 1980 और 2008 का था। इनमें से सबसे ज्यादा 6 बार दिवंगत भंवरलाल शर्मा यहां से विधायक रहे हैं।

ऐसे काम करता है सहानुभूति फैक्टर
राजस्थान में उपचुनाव में इतिहास रहा है कि यहां सहानुभूति लहर चुनाव का पासा पलट देती है। पिछले साल वल्लभ नगर सीट से कांग्रेस के दिवंगत विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत की पत्नी प्रीति शक्तावत, सहाड़ा सीट से कांग्रेस के दिवंगत विधायक कैलाश त्रिवेदी की पत्नी गायत्री देवी, सुजानगढ़ से कांग्रेस के दिवंगत विधायक मास्टर भंवरलाल मेघवाल के पुत्र मनोज मेघवाल के नाम पर मतदाताओं ने मुहर लगाई थी। कांग्रेस सरदार शहर सीट पर भी सहानुभूति फैक्टर के जरिए ही चुनाव मैदान में उतरी है।

बेनीवाल और भाटी का गठजोड़ बदल सकता है परिणाम
जैसा कि पिछले कुछ दिनों से बीकानेर के पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी का झुकाव हनुमान बेनीवाल की तरफ देखा जा रहा है। अगर उन्होंने इस सीट पर आरएलपी को अपना समर्थन दिया तो सरदार शहर सीट पर उपचुनाव में जाट राजपूत समाज का गठजोड़ होगा। ऐसा हुआ तो सरदार शहर सीट के उपचुनाव का परिणाम बदल सकता है। आरएलपी प्रत्याशी लालचंद मूंड की ग्रामीण क्षेत्र पर गहरी पकड़ के बाद यहां त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है। ऐसे में देवी सिंह भाटी का समर्थन अगर उन्हें मिला तो इस सीट के चुनाव परिणाम अप्रत्याशित होंगे।
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