Indian Railways : उत्तर पश्चिम रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट बनकर 39 लड़कियों ने थामा ट्रेन का स्टेयरिंग

कोमल है पर कमजोर नहीं : उत्तर पश्चिम रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट बनकर 39 लड़कियों ने थामा ट्रेन का स्टेयरिंग

जयपुर, 7 सितम्‍बर। आधी आबादी का यह पूरा सच है कि ये कोमल है पर कमजोर नहीं। मौका मिले तो ये भी पुरुषों के दबदबे वाले क्षेत्र में कामयाब हो सकती हैं। इसका ताजा उदाहरण है ये 39 लड़कियां, जो उत्तर पश्चिम रेलवे में बतौर असिस्टेंट लोको पायलट भर्ती हुई है। इन बेटियों ने अब ट्रेन का स्टेयरिंग थाम लिया है।

loco pilot

उत्तर पश्चिम रेलवे में इन 39 बेटियां का लोको पायलट बनना इसलिए भी खास है क्‍योंकि अधिकांश लड़कियां डॉक्‍टर, टीचर, इंजीनियर या प्रोफसर जैसा जॉब करना पसंद करती हैं। रेलवे में लोको पायलट बनना चुनिंदा लड़कियां का ख्‍वाब होता है। वैसे भी भारतीय रेलवे की पॉलिसी है कि सीधे लोको पायलट के पद पर भर्ती नहीं हो सकती है। इसके लिए कर्मचारी को बतौर असिस्टेंट लोको पायलट कुछ समय तक काम करना पड़ता है। अनुभव लेने के बाद फिर उसे लोको पायलट बनाया जाता है।

न्‍यूज 18 की खबर के अनुसार उत्तर पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ कैप्टन शशि किरण बताते हैं कि भारत में हर क्षेत्र में महिला शक्ति अपनी उपस्थित दर्ज करवा चुकी है। उत्तर पश्चिम रेलवे (जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बीकानेर मंडल) में 39 लड़कियां अब तक असिस्टेंट लोको पायलट अलग अलग रूट्स पर ट्रेनों का संचालन कर रही है। यह हम सबके लिए गर्व की बात है।

बात चाहे जयपुर की ममता मीणा की हो या किसी और बेटी की। प्रोफेशनल लोको पायलट बनने के बाद इनका आत्‍मविश्‍वास देखते ही बन रहा है। विवाहित ममता अपने परिवार की जिम्‍मेदारियों के साथ साथ लोको पायलट की भूमिका भी बखूबी निभा रही है। ममता कहती है कि लोको पायलट बनने के कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, मगर इंसान ठान ले तो वह कुछ भी कर सकता है।

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