MP news: पब्लिक को कब मिलेगी RTI की ऑनलाइन सुविधा? जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार और सूचना आयोग से मांगा जबाब
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आम नागरिकों को अभी तक RTI में सवाल पूछने की ऑनलाइन सुविधा न मिलने पर नाराजगी जताई है। सिलसिले में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन और मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जबाब मांगा है। याचिका में यह राहत चाही गई है कि केंद्र सरकार की तर्ज पर मप्र में भी आरटीआई आवेदन और अपीलो के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की जाए।

केंद्र सरकार की तर्ज पर मप्र में भी सूचना आयोग और सरकार के द्वारा नागरिकों को RTI में सवाल पूछने की ऑनलाइन व्यवस्था नहीं है। इस सिलसिले में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल ने जबलपुर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिस पर गुरूवार को चीफ जस्टिस रवि मलिमथ और जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने की मामले में सुनवाई हुई। याचिका में प्रस्तुत किए गए बिंदुओं और मांग पर कोर्ट ने गौर किया। अदालत ने भी आश्चर्य जताया कि केंद्र सरकार की तरह राज्य में RTI की जानकारी हासिल करने ऑनलाइन व्यवस्था नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से भारत के संविधान में अनुच्छेद 19(1)a में वर्णित वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अनुक्रम में भारत के नागरिकों को संसद द्वारा 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सरकार से सवाल पूछने संबंधी हक़ का हवाला दिया गया।
याचिकाकर्ता विशाल बघेल ने कानूनी पहलुओं के आधार पर बताया कि किसी व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ी जानकारी संबंधित विभाग को 48 घंटे के भीतर प्रदान की जाना चाहिए। भले ही आवेदन लिखित, ऑनलाइन या अन्य युक्ति से प्रस्तुत किया गया हो। याचिका में बताया गया कि मध्यप्रदेश राज्य ने लंबे पत्राचार के बाद जब ऑनलाइन पोर्टल 2021 में बनाया तो उसमें सभी विभागों और शासकीय कार्यलयों को जोड़ा ही नहीं है, जिससे नागरिक किसी भी आवेदन को ऑनलाइन लगाने में असमर्थ हैं। यहां तक कि मप्र हाईकोर्ट भी ऑनलाइन आरटीआई आवेदन पेश करने की सुविधा विकसित कर चुका है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार के विभागों में ऑनलाइन व्यवस्था ना किए जाने से नागरिकों के संविधान प्रदत्त मूल अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।












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