Upsc success story: 'पापा का सपना था..', बोलते ही रोने लगी जबलपुर की स्वाति शर्मा, बोली - यूपीएससी जर्नी हैं

UPSC success story: जिंदगी खुद में एक इंतिहान है, इसे संवारने का हर किसी को मौका मिलता है। यही चांस मध्य प्रदेश के जबलपुर की स्वाति शर्मा को मिला। कठिन माने जाने वाले यूपीएससी एग्जाम को क्रैक कर 15वीं रैंक हासिल की है।

Upsc success story of Swati Sharma Jabalpur

UPSC success story of Swati Sharma: मध्य प्रदेश के जबलपुर की रहने वाली स्वाति शर्मा। एक साधारण से परिवार और छोटे से ट्रांसपोर्टर की बेटी ने ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जिसके सामने परिवार के लिए सबसे बड़ी दौलत और अब शोहरत है। यूपीएससी में टॉप 25 में 15वीं रैंक हासिल की है।

बुलंदी के पहाड़ पर चढ़ना बोलने में जितना आसान है, उतना ही हकीकत में कठिन। उन्ही में यूपीएससी का एग्जाम भी शामिल हैं। स्वाति के सपनों के घर में यूपीएसएस ने भी जगह बनाई थी। जब नतीजे आए और हकीकत में बदला तो पूरे परिवार को आसमान भरके खुशियां मिल रही है।

15 रैंक हासिल करने के बाद स्वाति बेहद खुश है। 25 साल की स्वाति का पुश्तैनी घर सतना जिले के मैहर के नजदीक छोटे से गांव में है। कई साल पहले पूरा परिवार जबलपुर में आकर बस गया। जहां स्कूल और कॉलेज की पूरी पढ़ाई की।

Upsc success story of Swati Sharma Jabalpur

स्वाति अपनी इस सक्सेस के पीछे अपने परिवार को ही बड़ा मंत्र मानती है। कहा कि स्कूलिंग खत्म होने के बाद बड़े प्रशासनिक ओहदे पर नौकरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। दिल के एक कोने में परिवार की आर्थिक स्थिति भी छिपी थी।

एक जर्नी के तौर पर यूपीएससी को चुना। डगर कठिन थी, लेकिन हौसला बुलंद था। दिल के भीतर कई बार यह बात रह जाती थी कि परीक्षा की तैयारी कैसे करेंगे? महंगी कोचिंग और पढ़ाई के बाकी इंतजाम कैसे होंगे?

स्वाति से जब पूछा कि उसकी सफलता का श्रेय किसको जाता है तो वह भावुक हो गई। 'पापा का यह बड़ा सपना था...' कहते हुए उसकी आंखो से खुशियों के आंसू छलकने लगे। ऐसा होना भी लाजमी था, क्योकि स्वाति बेहद करीब से अपने पिता के संघर्ष को देखते आई है।

Upsc success story of Swati Sharma Jabalpur

उसने बताया कि सतना में छोटा सा ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करने वाले उसके पिता धर्मेंद्र शर्मा ने हिम्मत बढ़ाई। उन्होंने मुश्किल हालातों में भी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। दिल्ली में एग्जाम की तैयारी करने भेजा। हर जरुरत को पूरा किया।

2019 में पहली बार यूपीएससी का एग्जाम दिया। उसके बाद दूसरे मौके में भी सक्सेस नहीं मिली। मन में निराशा भी थी। लेकिन मां ममता शर्मा भी पिता के साथ ताकत बनकर खड़ी हो गई। तीसरी बार के लिए सभी ने कहा कि हिम्मत मत हारो। घर वालों के पॉजिटिव सोच से परीक्षा के दरवाजे पर खड़ी हो गई।

स्वाति ने अपनी इस पूरी सफलता को एक जर्नी माना है। वो कहती है कि नौकरी ज्वाइन करने पर इस जर्नी का दूसरा पड़ाव शुरू होगा। शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कुछ करने की तमन्ना है। बेसहारा दुखी और कमजोर लोगों का भविष्य में सहारा बन सकूं, आगे की जिन्दगी में यही कोशिश होगी।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+