Jabalpur fire case: क्यों न CBI को सौंप दी जाए जांच, लापरवाही को लेकर हाईकोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी
जबलपुर, 19 अगस्त: न्यू लाइफ मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल अग्निकांड के बाद अस्पतालों की जांच के गठित टीम अब कटघरे में है। लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट तल्ख़ टिप्पणी की हैं। कोर्ट ने कहा है कि क्यों न आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले इस मामले की जांच CBI को सौंपी जाए। दरअसल डाक्टरों की जिस टीम के द्वारा अस्पतालों की जांच की जा रही हैं, उसमें तीन डाक्टर्स दागी है। उनके निलंबित किया जाना था, लेकिन उन्हें अस्पतालों के निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई
जबलपुर के विजय नगर स्थित न्यू लाइफ मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में भीषण अग्निकांड हुआ था। जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई थी और 5 अन्य लोग बुरी तरह घायल हो गए। शहर के निजी अस्पतालों में इसी तरह की घोर लापरवाही को लेकर लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन ने कोरनाकाल के वक्त याचिका दायर की थी। जिसमें इसी तरह के किसी बड़े हादसे की चिंता जताई गई थी। याचिका को लेकर हाईकोर्ट लगातार प्रशासन को दिशा-निर्देश देता आया, लेकिन अस्पतालों की ठीक ढंग से जांच ठंडे बस्ते पड़ी रही। जब यह बड़ी घटना हुई तो जिले के सभी निजी अस्पतालों की जांच के लिए डाक्टरों की टीम बनाई गई।

जिन्हें निलंबित करना था उनसे कराई जा रही जांच
मामले को लेकर कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें अस्पतालों की जो निरीक्षण रिपोर्ट पेश की गई, उसमें जांच करने वाले डाक्टरों की टीम में तीन डाक्टर्स दागी शामिल है। जिस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि जिन डाक्टर्स को पहले निलंबित किया जाना था, उन्हें जांच करने के अधिकार दे दिए गए। जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है।

कोर्ट ने की तल्ख़ टिपण्णी
कोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर माना है। जिन दागी डाक्टर्स पर सवाल उठाए गए, उन्हें सस्पेंड करने की अनुशंसा भी की गई। कोर्ट ने कहा है कि जब इसी तरह जांच होना है तो क्यों न लोगों की जिंदगी से जुड़े गंभीर मामले की जांच CBI को सौंप दी जाए? कोर्ट ने संबंधित डाक्टरों के निलंबन आदेश पेश करने के निर्देश दिए है और सरकार से जबाब माँगा है। अगली सुनवाई सोमवार 22 अगस्त को निर्धारित की है।

कोरोना काल में 65 प्राइवेट हॉस्पिटल को परमीशन
लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विशाल बघेल ने बताया कि कोरोना काल में विगत तीन साल में 65 निजी अस्पतालों को संचालन की अनुमति दी गई। जिन अस्पतालों को अनुमति दी गई है, उनमें नेशनल बिल्डिंग कोड, फायर सिक्योरिटी के नियमों का पालन नहीं किया गया है। जमीन के उपयोग का उद्देश्य दूसरा होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति दी गई है। बिल्डिंग का कार्य पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र नहीं होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गई है।












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