Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

जबलपुर में लॉटरी ठगी का सनसनीखेज ड्रामा, आशा कार्यकर्ता ने गढ़ी खुद के अपहरण की कहानी, जानिए कैसे गंवाए 4 लाख

MP News: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के बरगी क्षेत्र में एक 36 वर्षीय आशा कार्यकर्ता के साथ हुई 4 लाख रुपये की लॉटरी ठगी ने न केवल पुलिस, बल्कि पूरे शहर को चौंका दिया। यह कहानी शुरू हुई एक फर्जी लॉटरी कॉल से, और इसका अंत हुआ एक स्व-रचित अपहरण ड्रामे के साथ, जिसमें विदेशी नंबर से धमकी भरे कॉल और एक रोता-बिलखता वीडियो शामिल था।

इस सनसनीखेज मामले ने साइबर ठगी की गहरी जड़ों और मानसिक दबाव में लिए गए फैसलों की भयावहता को उजागर किया है। आइए, इस अनोखी और रोचक कहानी के हर पहलू को विस्तार से जानते हैं-कैसे एक सामान्य महिला ठगों के जाल में फंसी, और कैसे उसने खुद को बचाने के लिए अपहरण का नाटक रचा।

Sensational drama of lottery fraud in Jabalpur Asha worker fabricated story of her own kidnapping

ठगी की शुरुआत: लॉटरी का लालच

यह कहानी शुरू होती है मार्च 2025 में, जब बरगी क्षेत्र की रहने वाली 36 वर्षीय आशा कार्यकर्ता राधा (बदला हुआ नाम) के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को एक लॉटरी कंपनी का कर्मचारी बताया और दावा किया कि राधा की "करोड़ों रुपये की लॉटरी" लगी है। उसे न केवल नकद पुरस्कार, बल्कि सोना-चांदी जैसे कीमती सामान भी मिलने वाले हैं। राधा, जो एक सामान्य परिवार से थी और मेहनत से कमाए पैसे से घर चलाती थी, इस लालच में आ गई।

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, राधा ने बताया, "कॉलर ने कहा कि मेरे नाम पर 2 करोड़ रुपये और 5 किलो सोना निकला है। उसने मुझसे आधार कार्ड और बैंक खाते की डिटेल मांगी। मुझे लगा कि यह सच है।" कॉलर की चिकनी-चुपड़ी बातों ने राधा का भरोसा जीत लिया, और वह रोजाना उससे बात करने लगी। कॉलर ने उसे बार-बार आश्वासन दिया कि "बस थोड़ा सा प्रोसेसिंग शुल्क" जमा करने पर सारा पैसा और सोना उसके पास पहुंच जाएगा।

4 लाख की ठगी: डर और दबाव का खेल

कुछ हफ्तों बाद, कॉलर ने कहानी को नया मोड़ दिया। उसने दावा किया कि वह "सोने की खेप" के साथ सीमा पर पकड़ा गया है, और अगर राधा ने तुरंत पैसे नहीं भेजे, तो उसे भी पुलिस गिरफ्तार कर लेगी। डर और तनाव में राधा ने अपने जीवन भर की जमा-पूंजी और रिश्तेदारों से उधार लिए गए 4 लाख रुपये को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि ये खाते फर्जी थे, और पैसे तुरंत विदेशी खातों में स्थानांतरित कर दिए गए।

राधा ने पुलिस को बताया, "उसने कहा कि अगर मैंने पैसे नहीं भेजे, तो मेरे परिवार को जेल हो जाएगी। उसने मुझे धमकाया कि मेरे आधार कार्ड का दुरुपयोग हो रहा है, और मैं मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंस जाऊंगी। मैं इतना डर गई थी कि मैंने बिना सोचे-समझे पैसे भेज दिए।"

पैसा भेजने के बाद कॉलर का नंबर बंद हो गया। राधा को तब अहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुकी है। लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। 4 लाख रुपये गंवाने का सदमा राधा के लिए इतना बड़ा था कि उसने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे मामले को और सनसनीखेज बना दिया।

अपहरण का ड्रामा: खुद रची साजिश

पैसे गंवाने के बाद राधा गहरे तनाव में चली गई। उसे डर था कि परिवार और समाज को अपनी गलती का सच बताने पर उसे ताने सुनने पड़ेंगे। 26 अप्रैल 2025 को वह बिना किसी को बताए घर से निकल गई। परिजनों ने सोचा कि वह किसी जरूरी काम से गई होगी, लेकिन जब कई दिन बीत गए और राधा वापस नहीं लौटी, तो 4 मई को उन्होंने बरगी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

इसी बीच, 20 मई को राधा के परिवार को एक विदेशी नंबर से व्हाट्सएप पर एक वीडियो मिला। वीडियो में राधा रोती-बिलखती नजर आई। उसने कहा, "मुझे बचा लो, वरना ये लोग मुझे मार डालेंगे।" वीडियो के साथ एक धमकी भरा मैसेज भी था, जिसमें लिखा था, "अगर दो लाख रुपये नहीं दिए, तो राधा के शरीर के टुकड़े कर बरगी और जबलपुर के जंगलों में फेंक देंगे।" इस वीडियो और मैसेज ने परिवार को दहशत में डाल दिया।

परिजनों ने तुरंत बरगी थाने में शिकायत दर्ज की। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और साइबर सेल की मदद से जांच शुरू की। 4 जून को फिर से एक कॉल आया, जिसमें ठग ने इस बार 50 हजार रुपये की मांग की। पुलिस ने कॉल डिटेल्स और व्हाट्सएप नंबर को ट्रेस किया, जो एक विदेशी वीओआईपी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) नंबर निकला। लेकिन जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

पुलिस जांच: सच्चाई का पर्दाफाश

बरगी थाना प्रभारी सुभाष तिवारी के नेतृत्व में पुलिस ने राधा की मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच की। जांच में पता चला कि राधा जबलपुर के ही एक रिश्तेदार के घर छिपी हुई थी। 10 जून को पुलिस ने उसे ढूंढ निकाला और पूछताछ के लिए थाने लाया। राधा ने शुरू में अपहरण की कहानी दोहराई, लेकिन सख्ती बरतने पर उसने सच उगल दिया।

राधा ने कबूल किया कि उसने 4 लाख रुपये की ठगी होने के बाद तनाव में आकर खुद के अपहरण का ड्रामा रचा था। उसने अपने मोबाइल से ही रोते-बिलखते हुए एक वीडियो बनाया और उसे ठग के नंबर पर भेजा, जो अब भी उसके संपर्क में था। ठग ने उसी वीडियो को राधा के परिवार को भेजकर फिरौती की मांग की। विदेशी नंबर का इस्तेमाल ठग ने वीओआईपी सर्विस के जरिए किया था, ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके।

पुलिस ने राधा के बयान में बताया, "मुझे लगा कि अगर मैं अपहरण का नाटक करूंगी, तो परिवार मुझ पर गुस्सा नहीं करेगा। मैंने वीडियो बनाकर ठग को भेज दिया, और उसने मेरे परिवार को धमकाने के लिए इसका इस्तेमाल किया। मुझे नहीं पता था कि यह इतना बड़ा मामला बन जाएगा।"

विदेशी नंबर का रहस्य

पुलिस जांच में सामने आया कि ठग ने व्हाट्सएप और कॉल के लिए एक वीओआईपी नंबर का इस्तेमाल किया, जो संभवतः पाकिस्तान या बांग्लादेश से ऑपरेट हो रहा था। साइबर सेल के डीएसपी राजेश दंडोतिया ने बताया, "ऐसे नंबर आमतौर पर साइबर ठग इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इन्हें ट्रेस करना मुश्किल होता है। हमने इंटरनेशनल साइबर क्राइम यूनिट से संपर्क किया है, और ठग की पहचान के लिए बैंक खातों की डिटेल्स भी खंगाली जा रही हैं।"

राधा की मानसिक स्थिति: तनाव और पछतावा

पुलिस ने राधा को उसके परिजनों को सौंप दिया, लेकिन इस घटना ने उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला। राधा के पति ने बताया, "वह कई दिनों से उदास थी। हमें नहीं पता था कि वह इतने बड़े झांसे में फंस गई थी। अब हम उसे काउंसलिंग के लिए ले जाएंगे।"

मनोवैज्ञानिक डॉ. अनिता शर्मा ने इस मामले पर कहा, "साइबर ठगी का शिकार होने के बाद लोग अक्सर गहरे तनाव और अपराधबोध में चले जाते हैं। राधा ने अपहरण का ड्रामा इसलिए रचा, क्योंकि उसे अपनी गलती का सामना करने का डर था। ऐसे मामलों में परिवार का समर्थन और काउंसलिंग जरूरी है।"

साइबर ठगी का बढ़ता खतरा

यह मामला जबलपुर में साइबर ठगी की बढ़ती घटनाओं का एक और उदाहरण है। 2024 में जबलपुर में साइबर फ्रॉड के तीन बड़े मामले सामने आए थे, जिनमें 41 लाख रुपये की ठगी हुई थी। इनमें से एक मामले में एक कॉलेज प्रिंसिपल को डिजिटल अरेस्ट करके 10 लाख रुपये ठगे गए थे।

साइबर सेल के अधिकारियों का कहना है कि लॉटरी, शेयर मार्केट, और फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डीएसपी दंडोतिया ने चेतावनी दी, "किसी भी अनजान कॉलर पर भरोसा न करें, खासकर अगर वे लॉटरी या पैसे की बात करें। तुरंत पुलिस से संपर्क करें।"

पुलिस की कार्रवाई और भविष्य

बरगी थाना प्रभारी सुभाष तिवारी ने बताया, "राधा ने अपहरण की झूठी कहानी बनाई थी, इसलिए उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया। लेकिन ठगी के मामले में हम ठगों की तलाश कर रहे हैं। उनके बैंक खातों और वीओआईपी नंबर की जांच की जा रही है।"

पुलिस ने राधा के मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है और उसमें मौजूद चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल ने यह भी आशंका जताई कि ठग एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जो भारत में फर्जी लॉटरी और डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी कर रहा है।

जागरूकता की जरूरत

इस घटना ने जबलपुर में साइबर ठगी को लेकर लोगों में चर्चा छेड़ दी है। स्थानीय निवासी रमेश यादव ने कहा, "ऐसे मामले डरावने हैं। मेरी बहन को भी लॉटरी का कॉल आया था, लेकिन हमने पुलिस को बता दिया। सरकार को और सख्ती करनी चाहिए।" वहीं, बरगी की एक अन्य आशा कार्यकर्ता ने कहा, "राधा ने गलती की, लेकिन उसे ठगों ने फंसाया। हमें ट्रेनिंग चाहिए कि ऐसे कॉल्स से कैसे बचें।"

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+