राम भक्त अखिलेश गुमास्ता ने अंग्रेजी में लिखी 831 पेज की रामायण, जबलपुर के डॉक्टर ले जाएंगे अयोध्या
Ramayan: अयोध्या में होने जा रहे हैं रामलला के भव्य प्राण प्रतिष्ठा को लेकर हर कोई उत्साहित है। पूरा देश राम मय नजर आ रहा है। ऐसे में जबलपुर के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अखिलेश गुमाश्ता की चर्चा भी लाज़िमी है। यूं तो डॉक्टर अखिलेश गुमाश्ता पेशे से अस्थि रोगों के सर्जन हैं।लेकिन उनकी एक और पहचान है।
दरअसल उन्होंने करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक रामायण का अंग्रेजी में अनुवाद किया है। इसके चलते अयोध्या में होने जा रहे रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर उनकी और उनके प्रयासों की चर्चा भी बेहद प्रासंगिक है।

उन्हें रामायण को अंग्रेजी में लिखने में 6 साल से भी ज्यादा समय लगा। डॉक्टर अखिलेश गुमाश्ता ने 13 जुलाई 2004 को रामायण का अंग्रेजी में अनुवाद शुरू किया जो फरवरी 2010 में पूरा हो पाया।
अंग्रेजी में रामायण लिखने वाले डॉक्टर अखिलेश गुमाश्ता कहते हैं कि अब तक अवधी और हिंदी में रामायण उपलब्ध हैं। लेकिन आने वाली पीढ़ी को सरल और काव्यात्मक भाषा में समझाने के लिए ही उन्होंने यह प्रयास किया है। रामायण को अंग्रेजी में लिखने वाले जबलपुर के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अखिलेश गुमाश्ता का कहना है कि स्वामी विवेकानंद ने भारत के धर्म और आध्यात्म को प्राण केंद्र निरूपित किया है और इनके सबसे बड़े टूल रामायण और भागवत गीता ही हैं लेकिन अब तक रामायण का जो भी अनुवाद हुआ है। वह कहानी के तौर पर ही हुए हैं। इसमें उन्हें भक्ति, संस्कृति त्याग और आस्था की कमी नजर आई इसी को देखते हुए ही उन्होंने रामायण को पढ़ना शुरू किया और फिर खुद ही अंग्रेजी में लिखते गए।
डाक्टर गुमाश्ता का कहना है कि उनकी कृति को अवधी रामायण का हूबहू अनुवाद कहना गलत होगा क्योंकि इसमें कई भाव उन्होंने अपनी तरफ से भी समाहित किए हैं। उनका मानना है कि काव्य गद्य से भी ज्यादा प्रभावी होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने रामायण को गद्यात्मक ढंग के बजाय काव्यात्मक तरीके से लिखने को प्राथमिकता दी। रामायण को अंग्रेजी में काव्यात्मक ढंग से लिखने के पीछे की कहानी भी बड़ी ही दिलचस्प है।
डॉक्टर अखिलेश गुमाश्ता बताते हैं कि साल 2000 के आसपास की बात है जब वे अपने 4 साल के बेटे को रामायण के प्रसंग के बारे में बता रहे थे तब 14 साल के वनवास पर उनके बेटे ने 14 का अंग्रेजी में अनुवाद पूछा तभी से डाक्टर गुमाश्ता के मन में रामायण को अंग्रेजी में लिखने का ख्याल आया और तभी से उन्होंने इसे लिखना शुरू किया। 13 जुलाई 2004 को गुरु पूर्णिमा के दिन डॉक्टर अखिलेश गुमाश्ता ने रामायण को अंग्रेजी में लिखना शुरू किया जो फरवरी 2010 में पूरी हुई।
अस्थि रोग विशेषज्ञ के साथ-साथ डॉक्टर अखिलेश गुमाश्ता की ख्याति अंग्रेजी में रामायण लिखने की तो है ही साथ ही वे हर साल जबलपुर में वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का आयोजन भी करते हैं। जिसमें देश के साथ-साथ दुनिया के कोने-कोने से भी ऐसे लोग पहुंचते हैं। जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और रामायण पर शोध करते हैं।
वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में कई देशों के मंत्रियों से लेकर राजनायिक भी शामिल होते हैं जो अपने देश से सम्बंधित भगवान राम और रामायण से जुड़े संस्मरण जबलपुर में आकर सुनाते हैं।












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