NIA Raid In Jabalpur: आईएसआईएस माड्यूल मचाना चाहता था बड़ी तबाही, 7 दिन की रिमांड पर आरोपी, बड़ा खुलासा

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एमपी के जबलपुर में आईएसआईएस से जुड़े बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। तीन लोगों की गिरफ्तार करने के साथ करीब आधा दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लिया है।

NIA Raid In Jabalpur ISIS module

NIA Raid In Jabalpur: मध्य प्रदेश में एक महीने के भीतर राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने दूसरी बड़ी कार्रवाई कर आतंकी संगठन ISIS के नापाक इरादों को नाकाम कर दिया। ऐसी कार्रवाई जिसके इनपुट बेहद खतरनाक रहे और एक्शन में जरा सी देरी देश के किसी हिस्से में बड़ी तबाही की वजह बन सकती थी।

बेहद खुफिया तरीके से NIA ने एमपी पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते एटीएस के साथ जबलपुर में ज्वाइंट ऑपरेशन किया। जिसमें आईएसआईएस से जुड़े आतंकी मॉड्यूल भंडाफोड़ किया। दो दिन चली इस कार्रवाई की पहली खेप में पक्के सबूतों के आधार 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

एक प्रेस नोट का हवाला देते हुए एएनआई ने अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट जारी की है। जिसके मुताबिक जबलपुर में 13 जगहों पर दिन-रात हुई कार्रवाई में सैयद ममूर अली, मोहम्मद आदिल खान और मोहम्मद शाहिद के रूप में पहचाने गए आरोपियों को गिरफ्तार कर भोपाल ले जाया गया। जहां विशेष कोर्ट में पेश किया गया।

NIA को आरोपियों की सात दिन की रिमांड मिली हैं। उनसे आतंकी मॉड्यूल से जुड़े अन्य कनेक्शन के सिलसिले में आगे की पूछताछ की जाएगी। जांच एजेंसी ने इन आरोपियों के ठिकानों से तलाशी के दौरान गोला-बारूद, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए है।

दावा किया गया है कि करीब नौ महीने पहले अगस्त 2022 में मोहम्मद आदिल खान की जानकारी जांच एजेंसी के हाथ लगी थी। आदिल के सिलसिले में मिले इनपुट की हाईलेवल जांच हुई तो उसका कनेक्शन ISIS समर्थित गतिविधियों में होना पाया गया। जिसके आधार पर 24 मई को NIA ने केस- आरसी-14/2023/एनआईए/डीएलआई दर्ज किया।

आरोप है कि वह उसके सहयोगी आईएसआईएस के इशारे पर भारत में हिंसक आतंकी हमले करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के साथ-साथ जमीनी 'दावा' कार्यक्रमों के माध्यम से आईएसआईएस के प्रचार प्रसार में शामिल थे। मॉड्यूल स्थानीय मस्जिदों और घरों में बैठकें करता था और देश में आतंक फैलाने की योजना और साजिशें रचता था।

जांच से पता चला कि तीनों कट्टरपंथी आरोपियों का हिंसक जिहाद को अंजाम देने प्लान था। इसके लिए वह फंड इकठ्ठा करने के साथ आईएसआईएस प्रचार सामग्री का का प्रचार करने में भी जुटे थे। अपने माड्यूल में युवाओं को भर्ती करने के साथ हथियार और गोला-बारूद खरीदने की भी तैयारी की जा रही थी।

गिरफ्तार आरोपियों में सैयद मामूर अली ने 'फिसाबिलिल्लाह' के नाम से एक स्थानीय समूह तंजीम बनाया और इसी नाम से वह एक व्हाट्सएप समूह भी संचालित करने लगा था। वह अपने साथियों के साथ पिस्तौल खरीदने जबलपुर स्थित एक अवैध हथियार सप्लायर के कॉन्टेक्ट में था।

जांच में यह बात भी सामने आई कि आदिल जबलपुर में समान विचारधारा वाले कट्टरपंथी व्यक्तियों के एक सक्रिय ग्रुप को इकट्ठा करने सफल रहा। एनआईए की जांच के अनुसार, मॉड्यूल के कुछ मेंबर पहले से ही हिजरत (उड़ान) पर विचार कर रहे थे। जबकि अन्य की भारत में हिंसक जिहाद को अंजाम देने के लिए एक स्थानीय संगठन बनाने का बड़ा प्लान था।

आदिल युवाओं को आईएसआईएस में शामिल करने के लिए कई यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप चैनल भी चला रहा था। जांच में आगे पता चला कि शाहिद ने पिस्तौल सहित हथियार खरीदने की भी योजना बनाई थी। भारत में हिंसक हमलों के लिए आईईडी और यहां तक कि ग्रेनेड जैसे घातक हथियार खरीदने की भी योजना बनाई थी।

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