RTI Act: मध्य प्रदेश के प्राइवेट स्कूल भी आरटीआई के दायरे में, राज्य सूचना आयुक्त का बड़ा फैसला
अब मध्य प्रदेश के निजी स्कूलों को भी आरटीआई तहत जानकारी देना अनिवार्य है। रीवा के एक मामले पर सुनवाई के बाद राज्य सूचना आयुक्त ने यह बड़ा आदेश दिया है।

MP's private schools: मध्य प्रदेश के प्राइवेट स्कूल अब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने से इंकार नहीं कर सकेंगे। यदि किसी ने मनमानी जारी रखी तो अब स्कूल की खैर नहीं। राज्य सूचना आयुक्त ने बड़ा आदेश दिया है। दरअसल यह फैसला रीवा जिले के एक प्राइवेट स्कूल के खिलाफ की गई शिकायत के बाद लिया गया। संबंधित स्कूल ने मान्यता संबंधी जानकारी देने से इंकार कर दिया था। हवाला दिया गया कि निजी स्कूल RTI के दायरे में नहीं आते।

मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी पर और नकेल कस गई है। लगातार शिकायतों और स्कूल प्रबंधन के रवैये के बाद सूचना आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। रीवा के एक स्कूल के मामले में सुनवाई हुई। जिसके सभी पहलुओं पर विचार करते हुए राज्य सूचना आयुक्त ने बड़ा फैसला सुनाया है। अब एमपी में सरकार से अनुदान प्राप्त प्राइवेट स्कूल भी पूरी तरह RTI के दायरे में होंगे। जानकारी मांगने वाले आवेदक को निर्धारित समय सीमा में चाही गई जानकारी मुहैया कराना होगा। ऐसा न करने वाले स्कूलों के खिलाफ RTE Act 2009 और RTE rules 2011 के तहत प्राइवेट स्कूलों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई होगी। साथ ही उन्हें हर हाल में जानकारी देना अनिवार्य होगा। कानून का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ जुर्माना भी लगाया जाएगा। राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह का कहना है कि एजुकेशन डिपार्टमेंट के पास रेगुलेटरी अथॉरिटी होने के नाते पर्याप्त अधिकार हैं।

दरअसल कुछ समय पहले रीवा के एक निजी स्कूल का मामला सामने आया था। जिसकी मान्यता के संबंध में जानकारी चाही गई थी। लेकिन आरटीआई के अधीन न होने का बहाना बनाकर संबंधित स्कूल ने जानकारी देने से इंकार कर दिया। यह मामला जब सूचना आयुक्त के पास पहुंचा तो सुनवाई के बाद बड़ा आदेश दिया गया है। आपको बता दें कि यूपी और हरियाणा में इस तरह की व्यवस्था पहले लागू हो चुकी हैं। उसी तर्ज पर अब एमपी में भी सभी स्कूलों को नए आदेश का पालन करना होगा।












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