MP Municipal Election Result 2022: ईवीएम की ‘गुलाबी’ रंग की बटन ने कई को किया ‘लाल’,‘NOTA’ से कई जीते कई हारे
हर चुनाव की तरह मप्र के नगरीय निकाय चुनाव में भी ‘नोटा’ (NOTA) की चर्चा है। दरअसल अंग्रेजी में नन ऑफ द एबव (NOTA – None of the none of the above) कहे जाने वाले नोटा का मतलब ‘इनमे से कोई नहीं’ है। mp municipal election
जबलपुर, 17 जुलाई: भाजपा-कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए जबलपुर 'शहर की सरकार' का चुनाव नाक का सवाल था। जिसमें महापौर पद के लिए कांग्रेस ने बाजी मार ली और भाजपा के मंसूबों पर पानी फेर दिया। कुल 11 मेयर कैंडिडेट के अलावा कुल 79 वार्डों में पार्षद बनने उतरे सभी प्रत्याशियों को 13 हजार 8 सौ 25 वोटर्स ने नकार दिया। यानि इतने मतदाताओं ने EVM गुलाबी रंग की नोटा (NOTA) बटन दबाई। कुछ वार्डों में नोटा के खाते में पड़े वोटों ने पार्षद उम्मीदवारों की हार को जीत में बदल दिया।

नोटा ने भी निभाया बड़ा रोल
नगरीय निकाय चुनाव में महापौर पद के लिए चुनाव मैदान में कुल 11 उम्मीदवार थे। 12 उम्मीदवार के रूप नोटा ने भी अपनी भूमिका अदा की। कुल 9 लाख 75 हजार 5 सौ चार मतदाताओं में से 5 लाख 79 हजार 1 सौ 43 विधिमान्य मत डाले गए। जिसमें से महापौर पद के लिए 69 मत नामंजूर हुए। निर्वाचन आयोग दिशा निर्देशों नियमों के मुताबिक EVM में 'नोटा' (NOTA) यानि 'इनमें से कोई नही' विकल्प भी था। जिसे 6 हजार 3 सौ 37 मतदाताओं ने पसंद करते हुए सभी 11 महापौर प्रत्याशियों को नकार दिया।

वोटर्स को 364 पार्षद प्रत्याशी भी नही आए पसंद
जबलपुर नगर निगम के 79 वार्ड में कुल 364 पार्षद प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। लेकिन वोटिंग करने वाले कुल 5 लाख 79 हजार 1 सौ 43 मतदाताओं में 6337 वोटर्स ऐसे थे, जिन्होंने सभी 364 पार्षद उम्मीदवारों को पसंद नही किया । इन मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

5 प्रत्याशियों का नोटा ने बिगाड़ा खेल
शहर सरकार के 79 वार्डों में कुछ पार्षद प्रत्याशियों की जीत-हार के समीकरण में 'नोटा' ने बड़ा रोल अदा किया। 5 वार्ड ऐसे है जहाँ चुनाव मैदान में उतरे मुख्य प्रत्याशियों के बीच जीत-हार का अंतर सौ वोटों से कम था। जो उम्मीदवार हारा यदि 'नोटा' को मिले वोट, उसके खाते में जाते, तो बाजी पलट जाती।

महापौर के निर्वाचन में चौथे नंबर पर ‘नोटा’
महापौर के चुनाव में कुल 11 प्रत्याशियों में से मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच ही रहा। इनके अलावा 9 उम्मीदवारों में बहुजन समाज पार्टी से प्रत्याशी लखन अहिरवार इकलौते कैंडिडेट रहे, जिनके खाते में दस हजार से ज्यादा वोट आए। अहिरवार को कुल 19 हजार 4 सौ 19 वोट मिले और महापौर निर्वाचन में तीसरा स्थान बनाया। चौथे नंबर पर 'इनमे से कोई नही यानि नोटा' ने अपनी जगह बनाई। नोटा के खाते में 6337 वोट गए।

क्या होता है ‘नोटा’ ?
हर चुनाव की तरह मप्र के नगरीय निकाय चुनाव में भी 'नोटा' (NOTA) की चर्चा है। दरअसल अंग्रेजी में नन ऑफ द एबव (NOTA - None of the none of the above) कहे जाने वाले नोटा का मतलब 'इनमे से कोई नहीं' है। EVM में नोटा का गुलाबी रंग का बटन होता है। जिसका बटन दबाने का संदेश है कि चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों में से आपको कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2013 के विधानसभा चुनावों से नोटा का विकल्प दिया था। वोटों की गिनती के समय नोटा पर डाले गए वोट भी गिने जाते हैं।
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