MP assembly election 2023: चुनाव में उतरने पूर्व सैनिकों ने भी ठोकी ताल, सियासी जंग में किसको देंगे पटकनी?
MP assembly election 2023: हर मोर्चे पर देश के लिए डटे रहने वाले एमपी के पूर्व सैनिकों का मन सियासी जंग लड़ने बेताब हैं। बीजेपी-कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी, बसपा, सपा और ओवैसी की पार्टी के जहां उम्मीदवार जोर आजमाइश करते दिखेंगे तो वहीं पूर्व 7 सीटों पर पूर्व सैनिक भी अपना दम दिखा सकते हैं।
इसके लिए पूर्व सैनिकों ने एक संगठन बनाया हैं। जिसमें उन्होंने प्रदेश के छावनी परिषद् वाले विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला लिया हैं। पूर्व सैनिक नितेश पांडे का कहना है कि राजनीति को दलदल समझने का मिथक तोड़ना उनका लक्ष्य हैं। उनका तबका भी बताएगा कि वह सामजिक क्षेत्र में कितना दम रखता हैं।
ये संगठन राजनैतिक दल नहीं है। फिर भी सात में से कई सीटें जीतने का दावा कर दिया गया हैं। जबलपुर, ग्वालियर, सागर, इंदौर, मुरैना, बीना, महू में छावनी परिषद् हैं। यहाँ की विधानसभा सीटें पूर्व सैनिकों के निशाने पर हैं। संगठन सदस्यों का कहना है कि प्रदेश हो देश जिन दलों ने राज किया, भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने के सिर्फ हवा हवाई वादे किए, लेकिन हकीकत इससे जुदा रही। भ्रष्टाचार मुक्त सरकारें नहीं पाईं, उसके बदले पार्टियां चुनाव जीतने मुफ्तखोरी को हवा देकर मजबूत लोगों को कमजोर बनाने तुली हैं।

पूर्व सैनिक संघ का दावा है कि 2023 विधानसभा चुनाव में हम भले ही चुनाव ना जीते लेकिन राजनीतिक दलों को अपनी हैसियत जरुर बताएंगे। जानकारी के मुताबिक जबलपुर कैंट विधानसभा में करीब 40000 वोटर सैनिक और उनके परिवार है। इसके अलावा अन्य केंद्रीय कर्मचारियों का भी सपोर्ट हैं। पूर्व सैनिकों के विधानसभा चुनाव में उतरने के इस फैसले से प्रमुख दलों में हड़कंप मचा हैं। अभी से वोटर्स के आंकड़ों को लेकर भाजपा कांग्रेस दोनों अलग-अलग गणित लगा रहे हैं। यह भी याद रखना जरुरी है कि पिछले चुनाव में कई सीटें ऐसी रही जहां बीजेपी-कांग्रेस प्रत्याशियों में जीत-हार का अंतर महज हजार वोट से कम रहा।












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