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Jabalpur News: जड़ें छोड़ने लगा जबलपुर का मदन महल किला, सदियों पुरानी इस संपदा को लेकर ASI चिंतित

Madan mahal fort Jabalpur: मध्य प्रदेश के जबलपुर का प्रसिद्द मदनमहल किला आजादी की लड़ाई की न सिर्फ निशानी है, बल्कि गोंड रानी दुर्गावती की भी इससे यादें जुड़ी हैं। प्रकृति प्रेमियों के पसंदीदा जगहों में भी यह शामिल हैं। लेकिन इसको वक्त की नजर सी लग रही हैं। इसकी चट्टानी दीवारों के क्षरण होने की बात सामने आई हैं।

किले की छत की मजबूती पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिस पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने भी चिंता जताई है। इस कारण किले को संरक्षित करने कई जरुरी फैसले लिए जा रहे हैं। वैसे भी मदनमहल का किला पुरातत्व विभाग के आधीन है, इसलिए वहां किसी भी प्रकार का कार्य करने में जिला या निगम प्रशासन सक्षम नहीं है।

11वीं सदी के आस-पास इस किले का निर्माण हुआ था। जो गोंडवाना साम्राज्य की धरोहर रहा। अपनी स्थापत्य कला की कई खूबियों को समेटे यह किला काले पत्थर की एक बड़ी शिला पर स्थापित है। कहा जा रहा है कि किले का स्ट्रक्चर नीचे का ढांचा खोखला हो रहा है। बढ़ता गैप चिंता का कारण बना हुआ हैं। छत समेत किले के कई हिस्सों में दरारें भी दिखने लगी हैं। खुले आसमान के नीचे बारिश के पानी और तेज धूप के अलावा कई तरह की वजहों का हवाला दिया जा रहा हैं।

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    अब पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग करेगा ये काम
    पुरातत्व विभाग द्वारा किले के बेस में चट्टान से लग कर तो सीमेंट-कांक्रीट से ही क्षरण को भरने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन चट्टान के ऊपर स्थित किले की दीवारों और छत को विशेष प्रकार के पेस्ट से और खास तकनीक से सुरक्षित किया जाएगा है। किले के अलावा विभाग द्वारा किले के 100 मीटर की परिधि में आने-जाने के मार्गों को दुरुस्त करने और वहां की पुरा संरचनाओं को व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    संरक्षण का प्राकृतिक तरीका
    ख़ास बात यह है कि किले के निर्माण में जिन चीजों का उपयोग हुआ, उसके बारे शोध के साथ वैसे ही आइटम से सुधार कार्य होगा। जिम्मेदारों का कहना है कि सुधार कार्य के लिए तैयार किए जाने वाले पेस्ट में गुड़, बेल, उड़द की दाल, चूना और कुछ खास पौधों की जड़ों का उपयोग किया जा रहा है। एएसआइ रीजन के अधीक्षक डा. शिवाकांत बाजपेई बताते है कि पहले के समय में जुड़ाई के लिए उपयोग किए जाने वाले यौगिक से भरने का प्रयास चल रहा है।किले के सौ मीटर परिधि में व्यवस्थाएं बेहतर करने की दिशा में काम कर रही है।

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